उपनाम: हिंदी साहित्य
गयाजी: संगीत और साहित्य की मिठास से बदल रही ऑब्जर्वेशन होम के बच्चों की जिंदगी, सुधा मिश्रा की अनोखी पहल
गया जिले की एक शिक्षिका सुधा मिश्रा अपने अनूठे शिक्षण कौशल से ऑब्जर्वेशन होम में रहने वाले बच्चों के भविष्य को नया आकार दे रही हैं। वे पारंपरिक पढ़ाई के बजाय गीत, संगीत और कविता के माध्यम से बच्चों में सकारात्मक बदलाव लाने का काम कर रही हैं।
गिरीश तिवारी 'गिर्दा': पहाड़ के जन-जन की आवाज, जिनके गीतों ने उत्तराखंड आंदोलन में फूंकी नई जान
उत्तराखंड के प्रख्यात जनकवि गिरीश तिवारी 'गिर्दा' की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया जा रहा है, जिन्होंने अपनी लेखनी से राज्य के हर बड़े संघर्ष को एक नई दिशा दी थी।
कुमार विश्वास ने साझा किया हैरान करने वाला अनुभव, मंच पर खुद को ही गाते हुए देखा
प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास ने एक साक्षात्कार के दौरान अपने जीवन का एक अजीब और चौंकाने वाला वाकया सुनाया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें एक ऐसा अनुभव हुआ जिससे वे काफी समय तक भ्रमित रहे थे।
हिंदी लेखन का शानदार मौका: प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर जीतें 1 लाख रुपए तक का इनाम
देशभर के उभरते और अनुभवी लेखकों के लिए एक बेहतरीन मंच, जहां आप अपनी प्रतिभा दिखाकर न केवल राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं, बल्कि आकर्षक इनाम भी जीत सकते हैं।
असफलता के दौर में मुंशी प्रेमचंद के ये विचार भरेंगे आपमें नया आत्मविश्वास
महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के अनमोल विचार आज भी जीवन के कठिन संघर्षों में दिशा दिखाने का काम करते हैं। यदि आप हार से निराश महसूस कर रहे हैं, तो उनके ये विचार आपको पुनः उठ खड़े होने की प्रेरणा देंगे।
विद्या बालन के को-स्टार रहे ये अभिनेता, कभी 30 रुपये में काटते थे पूरा दिन, चॉल में बीते दिन, अब फिल्मों और ओटीटी पर जमी धाक
जम्मू-कश्मीर से ताल्लुक रखने वाले इस कश्मीरी पंडित अभिनेता ने थिएटर से शुरुआत कर फिल्मों और वेब सीरीज तक अपनी पहचान बनाई। संघर्ष के दिनों में कभी उन्हें दिन भर का खर्च सिर्फ 30 रुपये में चलाना पड़ता था।
क्रांतिकारियों में जोश भरने वाला खंडकाव्य 'पथिक', जानिए पंडित रामनरेश त्रिपाठी का सुल्तानपुर से नाता
पंडित रामनरेश त्रिपाठी की रचना 'पथिक' ने आजादी की लड़ाई में क्रांतिकारियों के भीतर अदम्य उत्साह भरा। इस महान साहित्यकार का जन्म सुल्तानपुर जिले के कोइरीपुर गांव में हुआ था।