पशुओं को हरी घास खिला रहे हैं? पहले जान लें ये अहम बातें, वरना बिगड़ सकती है सेहत उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 2
गर्मी के मौसम में बिना सिंचाई वाली या नहर किनारे उगी हरी घास पशुओं के पाचन तंत्र को बिगाड़ सकती है। विशेषज्ञ संतुलित आहार के साथ सही मात्रा में ज्वार का चारा खिलाने की सलाह देते हैं।

इस समय गर्मी का मौसम अपने चरम पर है और इसका असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुओं की सेहत पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में जो पशुपालक अपने जानवरों को हरी घास खिला रहे हैं, उन्हें खास सतर्कता बरतने की जरूरत है। दरअसल, बिना सिंचाई वाली हरी घास आसानी से मिल जाती है, लेकिन यही घास कई बार विषैली होकर जानवरों के पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा देती है, जिससे पशु तेजी से बीमार पड़ने लगते हैं। आइए जानते हैं कि इस मौसम में पशुओं को कौन सी घास और किस तरीके से खिलाना सही रहता है।

संतुलित आहार क्यों है जरूरी

पशु वैज्ञानिक डॉ. दिवाकर के अनुसार, गर्मी के दिनों में दुधारू पशुओं का दूध उत्पादन घट जाता है, जबकि कम दूध देने की स्थिति में भी पशु सामान्य दिनों जितना ही चारा खाता है। इस वजह से पशुपालक को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है—एक ओर पशु की बीमारी पर खर्च करना पड़ता है और दूसरी ओर दूध भी कम मिलता है। ऐसे में पशुओं को स्वस्थ और उत्पादक बनाए रखने के लिए उन्हें संतुलित आहार देना बेहद आवश्यक हो जाता है।

किस तरह की घास से बचें

किसान भोलानाथ पाण्डेय बताते हैं कि गर्मी के मौसम में अक्सर किसान ऐसी घास को चारे के रूप में इस्तेमाल करने लगते हैं, जिसकी सिंचाई नहीं की जाती और जिस पर पानी का कोई असर नहीं पड़ता। यह घास ज्यादातर नहर की पटरी, खेत की मेड़ या चकरोट पर उगी होती है, जिसे किसान और पशुपालक छीलकर ले आते हैं और जानवरों को खिला देते हैं।

लेकिन यही घास पशुओं के पाचन तंत्र को बिगाड़ देती है, जिससे उनका पेट खराब हो जाता है और पेचिस जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। इसलिए गर्मी के मौसम में जब भी जानवरों को हरी घास खिलाएं, तो ऐसी ही घास का इस्तेमाल करें जिसकी बराबर सिंचाई होती हो या जो लगातार पानी के संपर्क में रहती हो, वरना आपके पशु को नुकसान पहुंच सकता है।

ज्वार का चारा क्यों है फायदेमंद

पशु विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक गर्मी पड़ने पर पशुओं को ज्वार का चारा खिलाना चाहिए, क्योंकि यह एक पौष्टिक आहार माना जाता है। हालांकि इसे खिलाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है और इसे सही मात्रा में ही देना चाहिए।

  • खिलाते समय ज्वार 4 से 5 किलो ही इस्तेमाल करें।
  • इसके साथ 10 किलो भूसा का उपयोग किया जा सकता है।
  • अधिक मात्रा में ज्वार न खिलाएं, क्योंकि इससे पशु बीमार पड़ सकते हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर सही मात्रा में ज्वार का सेवन कराया जाए, तो इससे जानवरों की भूख भी काफी बढ़ती है, जो उनकी सेहत के लिए लाभदायक साबित होता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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