उपनाम: पशु आहार
पशुपालन: बारिश के मौसम में ऐसे रखें गाय और भैंस का ख्याल, दूध उत्पादन में नहीं आएगी कमी
मानसून के दौरान नमी और उमस का सीधा असर दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य और दूध देने की क्षमता पर पड़ता है। विशेषज्ञों के सुझाए गए इन खास उपायों और सही आहार प्रबंधन को अपनाकर आप अपने पशुओं को तंदुरुस्त रख सकते हैं और दूध की मात्रा को बरकरार रख सकते हैं।
दूध में कम फैट की समस्या से परेशान हैं? महंगे सप्लीमेंट की जगह अपनाएं ये प्राकृतिक उपाय, बढ़ेगी पशुपालकों की कमाई
झारखंड के देवघर जिले के पशुपालक दूध में कम फैट की समस्या से जूझ रहे हैं, जिससे उन्हें सही दाम नहीं मिल पा रहा है। देवघर कृषि विज्ञान केंद्र की पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन ने इसके लिए हरे चारे और संतुलित आहार जैसे आसान व किफायती समाधान बताए हैं।
पशुओं का दूध उत्पादन बढ़ाना है आसान: महंगे चारे की जगह अपनाएं पशु चिकित्सकों का यह सस्ता और कारगर डाइट फार्मूला
अगर आपके दुधारू पशु उम्मीद के मुताबिक दूध नहीं दे रहे हैं, तो महंगे चारे के बजाय उनके खानपान के तरीके को बदलने की जरूरत है। गोंडा के पशु चिकित्सा अधिकारी ने दूध बढ़ाने के लिए कुछ आसान और किफायती तरीके बताए हैं।
सीकर: पशुपालकों की बड़ी राहत, अब चारे की जांच के लिए जयपुर नहीं जाना होगा, 16 लाख में तैयार हुई लैब
सीकर में नई पशु पोषाहार प्रयोगशाला शुरू होने से पशुपालकों को अब चारे की गुणवत्ता जांच के लिए बाहर नहीं भटकना पड़ेगा। इस आधुनिक लैब के जरिए पशुओं के चारे की शुद्धता की पहचान अब स्थानीय स्तर पर ही हो सकेगी।
पशुपालकों के लिए महुआ किसी वरदान से कम नहीं, दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ सेहत में होगा सुधार
ग्रामीण क्षेत्रों में पाए जाने वाले महुआ के फूल पशुओं की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माने गए हैं. पशुपालन विशेषज्ञों के मुताबिक, इनका सही इस्तेमाल गाय-भैंसों की कमजोरी दूर करने और दूध की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है.
धान की खेती में अजोला का कमाल: यूरिया का 30 प्रतिशत खर्च घटेगा, पशुओं को मिलेगा पौष्टिक चारा
धान की खेती करने वाले किसानों के लिए अजोला एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है। यह न केवल रासायनिक खाद पर होने वाले खर्च को कम करता है, बल्कि खरपतवार पर नियंत्रण पाने और पशुओं के लिए पौष्टिक चारे का काम भी करता है।
पशुओं को हरी घास खिला रहे हैं? पहले जान लें ये अहम बातें, वरना बिगड़ सकती है सेहत
गर्मी के मौसम में बिना सिंचाई वाली या नहर किनारे उगी हरी घास पशुओं के पाचन तंत्र को बिगाड़ सकती है। विशेषज्ञ संतुलित आहार के साथ सही मात्रा में ज्वार का चारा खिलाने की सलाह देते हैं।
बरसात में हरे चारे की कमी होगी दूर, जून में लगाएं नेपियर घास; 3-4 साल तक कटाई के साथ बढ़ेगा दूध उत्पादन!
नेपियर घास बरसात के मौसम में दुधारू पशुओं के लिए हरे चारे का भरोसेमंद विकल्प है। जून में एक बार बुआई करने पर इससे तीन से चार साल तक पौष्टिक हरा चारा मिलता रहता है और दूध उत्पादन में बढ़ोतरी होती है।