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एक घंटा पहले
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आमदनी का बड़ा जरिया बनी निंबोली
खंडवा जिले के पंधाना क्षेत्र से एक बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहां की महिलाओं ने नीम के फलों यानी निंबोली को अपनी आर्थिक उन्नति का आधार बना लिया है। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने इस सीजन में रिकॉर्ड 1000 टन निंबोलियों का संग्रहण किया है। इन्हें 18 से 19 रुपये प्रति किलो की दर से बेचकर महिलाओं ने कुल 1 करोड़ 80 लाख रुपये की कमाई की है। यह सफलता कृषि नमामि प्रोड्यूसर फार्मर कंपनी के संगठित प्रयासों का नतीजा है।
दक्षिण भारत में है जबरदस्त मांग
कृषि नमामि के CEO सुनील पंडोले ने बताया कि पंधाना से एकत्रित की गई निंबोलियां मुख्य रूप से दक्षिण भारत भेजी जा रही हैं। इन निंबोलियों से नीम का तेल, पाउडर और खल्ली तैयार की जाती है। इन उत्पादों का उपयोग जैविक कीटनाशकों के अलावा त्वचा संबंधी उपचारों और औषधीय उत्पादों को बनाने में किया जाता है, जिसके कारण बाजार में इनकी मांग लगातार बनी हुई है।
शून्य लागत और बेहतर मुनाफ़ा
इस व्यवसाय की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें किसी भारी निवेश की आवश्यकता नहीं है। गांव में मौजूद नीम के पेड़ों से निंबोलियां इकट्ठा करना ही मुख्य काम है। बिना किसी अतिरिक्त खर्च के इतनी बड़ी राशि कमाकर महिलाओं ने आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है। इससे न केवल उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी सुधार आया है।
पर्यावरण संरक्षण को मिला बढ़ावा
इस व्यावसायिक पहल का असर पेड़ों की सुरक्षा पर भी पड़ा है। पहले जो लोग नीम के पेड़ों को बेकार समझकर काट देते थे, अब वे इनकी आर्थिक उपयोगिता को समझ गए हैं। कमाई का जरिया बनने के कारण अब गांव के लोग पेड़ों को काटने के बजाय उन्हें बचाने के लिए जागरूक हुए हैं, जो पर्यावरण की दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि है।
औषधीय गुणों की खदान
नीम की निंबोली अपने औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। निंबोली से निकला तेल त्वचा के रोगों, मुंहासों और संक्रमण को दूर करने में कारगर है। साथ ही, यह बालों को मजबूत बनाने और डैंड्रफ जैसी समस्याओं को खत्म करने में भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
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