सफलता की कहानी: बिना अपनी जमीन के जमुई के साकेंद्र ने रचा कीर्तिमान, एक ही खेत में छह सब्जियां और सालाना 10 लाख की कमाई व्यापार 3 महीने पहले 41
जमुई के किसान साकेंद्र यादव के पास अपनी एक इंच जमीन नहीं है, फिर भी लीज की करीब तीन एकड़ जमीन पर एक साथ छह तरह की सब्जियां उगाकर वे सालाना 10 लाख रुपये से अधिक कमा रहे हैं और इसी कमाई से अपना घर भी बना रहे हैं।

कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर दिखाने का हौसला हो तो संसाधनों की कमी कभी रास्ते की रुकावट नहीं बनती। जमुई के किसान साकेंद्र यादव इस बात की जीती-जागती मिसाल हैं। उनके पास अपनी एक इंच जमीन तक नहीं है, इसके बावजूद वे लीज पर ली गई जमीन पर सफल खेती कर रहे हैं और अच्छी कमाई कर रहे हैं।

साकेंद्र का मानना है कि अधिकतर किसान एक ही फसल पर निर्भर रहते हैं और पारंपरिक तरीके से साल भर में सिर्फ दो फसलें ही उगाते हैं। लेकिन अगर इससे हटकर लोग सब्जी या किसी भी तरह की नकदी फसल की ओर रुख करें तो उससे कहीं बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है।

बिना जमीन के भी संवारी खेती की राह

जमुई जिले के खैरा प्रखंड स्थित बल्लोपुर गांव के रहने वाले साकेंद्र यादव लीज पर खेत लेकर खेती करते हैं। अपनी जमीन न होने के बावजूद उन्होंने हार मानने के बजाय खेती को आगे बढ़ाने का रास्ता चुना। उन्होंने यह साबित कर दिया कि खेती से अच्छी कमाई के लिए जमीन का मालिक होना जरूरी नहीं है।

साकेंद्र अपने खेती के अनूठे तरीके को लेकर भी इलाके में चर्चित हैं। उन्होंने करीब तीन एकड़ जमीन लीज पर लेकर एक ही खेत में बींस, भिंडी, नेनुआ और खीरा समेत कुल छह प्रकार की सब्जियों की खेती की है।

हर साल 10 लाख रुपये की आमदनी

साकेंद्र यादव बताते हैं कि वे पिछले करीब आठ वर्षों से सब्जी की खेती कर रहे हैं। शुरुआत में उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। खेती के लिए जमीन का इंतजाम, सिंचाई की व्यवस्था और बाजार तक सब्जियां पहुंचाना आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और धीरे-धीरे अपने खेती के तरीके में बदलाव करते गए।

एक ही खेत में अलग-अलग सब्जियां लगाने का फायदा यह हुआ कि किसी एक फसल के खराब होने पर दूसरी फसल से उस नुकसान की भरपाई हो जाती है। साथ ही बाजार में विभिन्न सब्जियों की मांग रहने के कारण बिक्री में भी उन्हें लाभ मिलता है। खेत की ताजी सब्जियां आसपास के बाजारों तक पहुंचती हैं और अच्छी कीमत भी दिलाती हैं। यही वजह है कि उनकी सालाना आमदनी 10 लाख रुपये से अधिक तक पहुंच चुकी है।

खेती से होने वाली इस कमाई ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है और आज वे आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं।

खेती की कमाई से बन रहा अपना मकान

सब्जी की खेती से मिली सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण साकेंद्र का अपना मकान है, जिसे वे खेती से हुई कमाई के दम पर बनवा रहे हैं। उनका कहना है कि किसानों को एक ही फसल और पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर नकदी फसलों की ओर बढ़ना चाहिए, क्योंकि इससे बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है।

साकेंद्र ने बताया कि पहले उन्हें सब्जियां बेचने के लिए खुद बाजार तक ले जाना पड़ता था, लेकिन अब धीरे-धीरे व्यापारी सीधे उनके खेत से ही सब्जियां खरीद ले जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में और भी बड़े पैमाने पर खेती करने की उनकी योजना है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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