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एक दिन पहले
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मधुमक्खी पालन से बदल रही किसानों की आर्थिक स्थिति
लखीमपुर खीरी जिले में किसान अब पारंपरिक खेती के अलावा मधुमक्खी पालन जैसे लाभकारी व्यवसायों की ओर रुख कर रहे हैं। उद्यान विभाग की ओर से इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे किसानों की आय में इजाफा हो रहा है। विभाग की ओर से किसानों को मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए 40 से 50 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान किया जा रहा है।
क्या है 'पहले आओ, पहले पाओ' योजना
जिला उद्यान प्रभारी मृत्युंजय सिंह के अनुसार, इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसमें चयन की प्रक्रिया 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर की जाती है। योजना के तहत विभाग न केवल आर्थिक सहायता देता है, बल्कि किसानों को मधुमक्खी पालन का वैज्ञानिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है ताकि वे अपनी आय को दोगुना कर सकें।
मुनाफे का गणित
मधुमक्खी पालन कम भूमि, कम लागत और कम समय में शुरू किया जाने वाला एक बेहतरीन व्यवसाय है। एक बॉक्स से सालभर में लगभग 30 से 35 किलो तक शुद्ध शहद प्राप्त किया जा सकता है। बाजार में प्राकृतिक और शुद्ध शहद की बढ़ती मांग के कारण किसानों को इसके अच्छे दाम मिल रहे हैं। शहद के अलावा मोम, रॉयल जेली और परागकण जैसे उत्पादों से भी अतिरिक्त आय अर्जित की जा रही है।
सफल किसानों की कहानी
जिले के कई किसानों ने इस योजना से जुड़कर अपनी तकदीर बदली है:
- रीता देवी: इन्हें उद्यान विभाग की तरफ से 20 बॉक्स मिले हैं, जिससे वे अब अच्छी कमाई कर रही हैं।
- कपिल वर्मा: यह युवा किसान पिछले 3 वर्षों से इस काम में लगा है और वर्तमान में उनके पास 100 बॉक्स हैं।
- धरमू: कल्हौरी गांव के रहने वाले धरमू के पास भी 20 बॉक्स हैं, जिसका लाभ उन्हें विभाग के प्रशिक्षण के बाद मिल रहा है।
- शिवम: परसादपुर गांव के शिवम पिछले 6 वर्षों से मधुमक्खी पालन कर रहे हैं और उनके पास भी 100 बॉक्स उपलब्ध हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मधुमक्खियां न केवल शहद देती हैं, बल्कि फसलों में परागण की प्रक्रिया में भी मदद करती हैं, जिससे खेतों में कृषि उत्पादन भी बेहतर होता है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और आयुर्वेद में शहद के उपयोग के कारण इस व्यवसाय का भविष्य बेहद उज्ज्वल माना जा रहा है।
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