भारत
एक घंटा पहले
4
विचारों
चीन की चालबाजी के जवाब में भारत की बड़ी कार्रवाई
भारत ने एक कड़े रुख के तहत शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश की 27 प्रमुख जगहों और उनकी भौगोलिक पहचान को अपने आधिकारिक मैप में विधिवत रूप से शामिल कर लिया है। यह कदम चीन द्वारा पिछले कुछ वर्षों में अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न इलाकों के नाम बदलने के बार-बार किए जा रहे प्रयासों के जवाब में उठाया गया है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने इन सभी स्थानों को आधिकारिक तौर पर मानचित्र में जगह दी है। एक आधिकारिक बयान के माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा अरुणाचल प्रदेश के मानचित्र पर इन स्थानों को आधिकारिक रूप से चिन्हित करने का मुख्य उद्देश्य इनकी सटीक पहचान सुनिश्चित करना है, ताकि आम नागरिकों के बीच इन्हें लेकर बेहतर जागरूकता बनी रहे।
भारत का स्पष्ट संदेश
अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्रों का नाम बदलने की चीन की अजीबोगरीब हरकतों को भारत ने हमेशा पूरी तरह से सिरे से खारिज किया है। भारत सरकार ने हमेशा ऐसे कदमों को निरर्थक और बेतुका करार दिया है। भारत का स्पष्ट मानना है कि चीन द्वारा किए जा रहे इस तरह के प्रयास उस अटल सच्चाई को कतई नहीं बदल सकते, जो यह है कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है और भविष्य में भी रहेगा।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लोंग जू भी मैप में शामिल
भारत के आधिकारिक मैप में जगह पाने वाले 27 स्थानों की सूची में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC के बेहद करीब स्थित लोंग जू का नाम प्रमुख है। यह इलाका ऐतिहासिक रूप से 1959 में भारत और चीन के बीच हुए शुरुआती टकराव के केंद्रों में गिना जाता है, जब चीनी सेना ने पहली बार इस क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश की थी। सरकारी बयान के अनुसार, अपर सुबनसिरी जिले में लोंग जू के निकट स्थित माजा गांव को भी अब मैप में विशेष रूप से मार्क किया गया है। इसके अलावा, इस सूची में बिसा गांव और कई अत्यंत रणनीतिक पर्वतीय दर्रों को भी शामिल किया गया है। इनमें ड्जो ला, रिजा ला और पुकुर ला जैसे महत्वपूर्ण दर्रे शामिल हैं। इसके साथ ही, थाग ला दर्रे को भी आधिकारिक तौर पर मैप में शामिल किया गया है, जो ऊंचाई के लिहाज से रणनीतिक तौर पर काफी अहम है। वर्ष 1962 में भारत और चीन के बीच हुए युद्ध के दौरान इसी क्षेत्र में शुरुआती संघर्ष देखे गए थे।
अन्य प्रमुख स्थल जो मैप का हिस्सा बने
मैप में शामिल की गई सूची काफी विस्तृत है, जिसमें जयरामपुर का नाम भी शामिल है। जयरामपुर को चांगलांग जिले का एक मुख्य रसद केंद्र माना जाता है और इसे पूर्वी सीमा क्षेत्र का प्रवेश द्वार कहा जाता है। यह क्षेत्र पूर्वी अरुणाचल प्रदेश और म्यांमा की सीमा की तरफ सुरक्षा बलों की गतिविधियों और आवाजाही के लिए बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। सूची में पूर्वी अरुणाचल प्रदेश के शंभू सरोवर, बड़ा कुंडुन और छोटा कुंडुन जैसे स्थान भी शामिल किए गए हैं। इसके अलावा धन बाड़ी, प्रीतनगर, तेरितनगर और तवांग रोड पर स्थित रामनगर जसवंतगढ़ भी आधिकारिक मैप में दर्ज हुए हैं। गौरतलब है कि जसवंतगढ़ में ही भारतीय शहीद जसवंत सिंह रावत का स्मारक स्थित है। इन स्थानों के अलावा सागर, पद्मा, ज्योतिनगर और बैसाखी गांवों को भी इसमें जगह दी गई है। सूची में 1962 के युद्ध के नायक त्रिलोक सिंह थापा की याद में निर्मित शेर-ए-थापा स्मारक, छोटा रोपुक, बड़ा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा, कमलांग अभयारण्य के पास का कमलांग नगर और एक प्रसिद्ध बुद्ध मंदिर भी शामिल हैं।
चीन की पहले भी रही हैं नापाक कोशिशें
चीन समय-समय पर भारतीय क्षेत्रों के लिए काल्पनिक नाम गढ़ने का काम करता रहा है, जिसे भारत ने हर बार सख्ती से ठुकराया है। भारत का रुख हमेशा से यह रहा है कि ऐसे बेबुनियाद विमर्श गढ़ने से जमीन की सच्चाई नहीं बदलती। चीन अरुणाचल प्रदेश को जांगनान के नाम से संबोधित करता है। चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने सबसे पहले 2017 में जांगनान के छह स्थानों के नामों की एक सूची जारी की थी। इसके बाद 2021 में 15 स्थानों के साथ दूसरी सूची और 2023 में 11 स्थानों की तीसरी सूची जारी की गई थी। भारत ने चेतावनी दी है कि चीन के ऐसे कदम द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में हो रही कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
Comments
0 comment