हजारीबाग की पकरी-बरवाडीह खदान ने फिर रचा इतिहास, लगातार दूसरे साल बनी देश की नंबर-1 कोयला खदान झारखंड 2 घंटे पहले 6
झारखंड के हजारीबाग स्थित पकरी-बरवाडीह कोयला खदान ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता साबित की है। कोयला मंत्रालय द्वारा जारी मूल्यांकन में खदान ने देश में पहला स्थान हासिल कर लगातार दूसरी बार 5 स्टार रेटिंग प्राप्त की है।

पकरी-बरवाडीह का शानदार प्रदर्शन

झारखंड के हजारीबाग जिले के बड़कागांव में स्थित पकरी-बरवाडीह कोयला खनन परियोजना ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपना लोहा मनवाया है। इस परियोजना ने अपनी बेहतरीन खनन कार्यप्रणाली और सुरक्षित संचालन के चलते देश भर की कोयला खदानों में खुद को नंबर-1 साबित किया है। पकरी-बरवाडीह को लगातार दूसरे वर्ष 5 स्टार रेटिंग से नवाजा गया है, जो इसकी जिम्मेदारी और पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह खदान देश की प्रमुख ओपन-कास्ट कोयला खदानों में से एक है, जिसका मुख्य काम एनटीपीसी के विभिन्न बिजली संयंत्रों तक कोयले की निरंतर आपूर्ति करना है। इस प्रकार, यह क्षेत्र देश की ऊर्जा सुरक्षा और विकास में अहम भूमिका निभा रहा है।

कोयला मंत्रालय द्वारा सम्मान

हाल ही में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कोयला मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत कोयला नियंत्रक कार्यालय द्वारा देश की कोयला खदानों का व्यापक मूल्यांकन किया गया। इस प्रक्रिया में एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड की तीन प्रमुख ओपन-कास्ट कोयला खदानों को 5 स्टार रेटिंग प्रदान की गई है। इन खदानों में झारखंड की पकरी-बरवाडीह, ओडिशा की दुलंगा और छत्तीसगढ़ की तलाईपल्ली परियोजनाएं शामिल हैं। हालांकि, इन सभी में सबसे बड़ी उपलब्धि पकरी-बरवाडीह ने हासिल की है, जिसने देशभर की 5 स्टार रेटिंग वाली खदानों की सूची में शीर्ष स्थान बरकरार रखा है।

सुरक्षा और पर्यावरण पर केंद्रित मानक

किसी भी खदान को 5 स्टार रेटिंग मिलना केवल कोयला उत्पादन के आंकड़े पर निर्भर नहीं करता। इसके लिए कोयला नियंत्रक संगठन द्वारा कड़े पैमानों पर जांच की जाती है। इन मानकों में मुख्य रूप से खदान के भीतर सुरक्षा व्यवस्था, पर्यावरणीय संरक्षण के उपाय, सतत और जिम्मेदार खनन पद्धतियां, उन्नत तकनीकी प्रबंधन और कार्यस्थल की बेहतर कार्यप्रणाली शामिल हैं। पकरी-बरवाडीह ने इन सभी क्षेत्रों में उच्च स्तरीय प्रदर्शन कर लगातार दूसरे साल खुद को नंबर-1 बनाए रखा है। इससे पहले वित्तीय वर्ष 2023-24 के मूल्यांकन में भी पकरी-बरवाडीह को यह गौरव प्राप्त हुआ था।

एनटीपीसी माइनिंग की अन्य परियोजनाएं

एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड की अन्य खदानों का प्रदर्शन भी इस वर्ष उल्लेखनीय रहा है। ओडिशा स्थित दुलंगा कोयला खदान ने लगातार छठे वर्ष 5 स्टार रेटिंग प्राप्त की है और इस बार वह सूची में पांचवें स्थान पर रही है। इसी तरह छत्तीसगढ़ की तलाईपल्ली खदान को इस वर्ष आठवां स्थान प्राप्त हुआ है। यह स्पष्ट है कि एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड का प्रबंधन अपनी सभी खदानों में आधुनिक तकनीकों और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर बेहद गंभीर है, जिसके नतीजे सकारात्मक रूप से सामने आ रहे हैं।

ऊर्जा उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान

एनटीपीसी देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी है और उसकी कोयला खदानों का प्रबंधन सीधे तौर पर देश के बिजली उत्पादन से जुड़ा है। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट के आंकड़ों पर गौर करें तो वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान उसकी परिचालन कोयला खदानों ने देश भर के 22 से अधिक ताप विद्युत संयंत्रों को 140 मिलियन टन से भी अधिक कोयला उपलब्ध कराया है। अकेले पकरी-बरवाडीह की बात करें तो यहाँ का कोयला उत्पादन 16.31 मिलियन टन से बढ़कर 17.39 मिलियन टन तक पहुँच गया है, जो इस परियोजना की बढ़ती कार्यक्षमता का प्रमाण है।

जिम्मेदारी और तकनीकी प्रगति

पकरी-बरवाडीह परियोजना के अधिकारियों का कहना है कि उनका प्राथमिक लक्ष्य सुरक्षित तरीके से आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए कोयले का खनन करना है। खनन के साथ-साथ यहाँ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, स्थानीय लोगों के कल्याण और श्रमिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है। कोयला मंत्रालय के इस स्टार रेटिंग कार्यक्रम का मूल उद्देश्य ही यह है कि खदानें केवल उत्पादन के पीछे न दौड़ें, बल्कि खनन क्षेत्र में एक सुरक्षित और जवाबदेह कार्यसंस्कृति विकसित करें।

हजारीबाग के लिए गौरव का क्षण

पकरी-बरवाडीह को लगातार दूसरी बार देश की नंबर-1 5 स्टार ओपन-कास्ट खदान का दर्जा मिलना हजारीबाग जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह सम्मान न केवल परियोजना के अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि झारखंड का यह क्षेत्र विकास और सुरक्षा के संतुलन के साथ कैसे काम कर रहा है। आने वाले समय में भी इस खदान से देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में और अधिक योगदान मिलने की प्रबल संभावना है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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