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एक घंटा पहले
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संघर्ष से सफलता की नई कहानी
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के तुरकौलिया प्रखंड स्थित अमवा गांव के रहने वाले विजय यादव ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत और सही दिशा में किए गए प्रयास से खेती को एक मुनाफे वाला व्यवसाय बनाया जा सकता है। आज विजय यादव जिले भर में एक प्रगतिशील किसान के रूप में पहचाने जाते हैं। कभी आर्थिक तंगी के कारण दूसरे राज्य जाकर मजदूरी करने वाले विजय यादव आज सालाना 20 लाख रुपये का टर्नओवर हासिल कर रहे हैं। उनकी सफलता की यह यात्रा कई लोगों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
आर्थिक तंगी और पंजाब का सफर
विजय यादव के जीवन में बदलाव की शुरुआत बहुत ही विषम परिस्थितियों में हुई थी। अपनी मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद ही उन पर परिवार की पूरी जिम्मेदारी आ पड़ी थी। परिवार की माली हालत बेहद खराब थी, और उनके पिता ने संन्यास लेकर संत का जीवन अपना लिया था। घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था, जिसके चलते साल 1996 में उन्होंने पंजाब का रुख किया। वहां काफी संघर्ष के बाद उन्हें एक नौकरी मिली, जिसमें उनका शुरुआती वेतन केवल 800 रुपये महीना था। उन्होंने अपनी ईमानदारी और कड़ी मेहनत से काम किया, जिसके चलते समय के साथ उनकी पगार बढ़कर 5000 रुपये प्रतिमाह तक पहुंच गई थी।
खेती की प्रेरणा और गांव वापसी
पंजाब में नौकरी करने के दौरान, विजय यादव अक्सर अपने खाली समय और रविवार की छुट्टियों में वहां के लहलहाते खेतों को देखा करते थे। वे पंजाब की आधुनिक और वैज्ञानिक खेती से काफी प्रभावित हुए। वहां के किसानों को विविधतापूर्ण फसलें उगाते देख उनके मन में भी अपने गांव लौटकर कृषि के क्षेत्र में कुछ नया करने का विचार आया। इस सोच ने धीरे-धीरे उनके भीतर आत्मविश्वास जगाया और उन्होंने अंततः अपनी नौकरी छोड़ने का जोखिम भरा निर्णय लिया। उन्होंने अपने गांव वापस आकर खेती में नया प्रयोग शुरू करने की ठानी।
खेती में विविधता और नई फसलों का प्रयोग
गांव लौटने के बाद विजय यादव ने सबसे पहले बैंगन की खेती से अपनी शुरुआत की। उनकी मेहनत रंग लाई और धीरे-धीरे उन्हें खेती की समझ बेहतर होने लगी। वे पारंपरिक फसलों के अलावा बाजार की मांग के अनुरूप नई और उन्नत किस्मों की फसलों की ओर बढ़े। उन्होंने बड़े स्तर पर भिंडी, विभिन्न तरह की गोभी और अन्य हरी सब्जियों की खेती शुरू की। इसके साथ ही उन्होंने हॉर्टिकल्चर यानी बागवानी पर भी विशेष ध्यान दिया। उन्होंने अपने खेतों में ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और शिमला मिर्च जैसी नकदी फसलों का उत्पादन शुरू किया। इसके अलावा, उन्होंने नींबू और पपीते के बड़े बागान भी तैयार किए हैं।
पशुपालन और कुल कमाई
विजय यादव ने केवल खेती पर ही निर्भरता नहीं रखी, बल्कि अपनी आमदनी को बढ़ाने के लिए पशुपालन को भी अपनाया। उनके पास उन्नत नस्ल के दुधारू मवेशी हैं, जिनसे उन्हें दूध उत्पादन के जरिए अतिरिक्त लाभ होता है। कृषि और पशुपालन के इस तालमेल ने उन्हें आर्थिक रूप से बेहद सशक्त बना दिया है। कभी मात्र 800 रुपये की नौकरी के लिए तरसने वाले विजय यादव आज अपनी मेहनत की बदौलत हर साल 20 लाख रुपये तक की शानदार कमाई कर रहे हैं। उनकी सफलता का यह सफर दिखाता है कि अगर सही दृष्टिकोण के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए, तो खेती घाटे का नहीं बल्कि विकास का साधन बन सकती है।
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