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57 मिनट पहले
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विचारों
जलवायु परिवर्तन का विकराल रूप
इस समय धरती पर जलवायु परिवर्तन की स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि मौसम के मिजाज ने अपना चरम स्तर छू लिया है। यह केवल एक सामान्य बदलाव नहीं है, बल्कि एक ऐसी वैश्विक संकट की घड़ी है जहां मौसम का चक्र पूरी तरह से बेपटरी हो गया है। कभी भीषण गर्मी से जमीनें तप रही हैं, तो कभी मूसलाधार बारिश सीधा सैलाब बनकर तबाही ला रही है। हालिया घटनाएं इस बात की पुष्टि करती हैं कि वैज्ञानिकों की पूर्व चेतावनियां अब धरातल पर सच साबित हो रही हैं।
फ्रांस और स्पेन में आग का तांडव
इस वक्त यूरोप के दो प्रमुख देश फ्रांस और स्पेन भीषण जंगलों की आग से जूझ रहे हैं। फ्रांस के गिरोंद इलाके में आग की लपटें तेजी से फैल रही हैं, जिससे वहां के निवासियों का जीवन मुश्किल में पड़ गया है। स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह आग पेरिस के कुल क्षेत्रफल से लगभग चार गुना बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले चुकी है। फ्रांस में अब तक करीब 2.6 लाख लोगों को उनके घरों से सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है।
वहीं स्पेन की हालत भी कम चिंताजनक नहीं है। इस सप्ताह वहां लगभग 1.16 लाख लोगों को अपने घर खाली करने पड़े हैं। यदि इन दोनों देशों के प्रभावित लोगों की कुल संख्या को जोड़ा जाए, तो यह आंकड़ा 3.75 लाख के करीब पहुंच जाता है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने खुलकर माना है कि पूरा आइबेरियन प्रायद्वीप जलवायु परिवर्तन के बेहद गंभीर असर का सामना कर रहा है।
दमकलकर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण हालात
फ्रांस के नूवेल-अकितेन क्षेत्र की प्रीफेक्ट सोफी ब्रोका ने स्वीकार किया कि उनके देश ने पहले कभी जंगलों में ऐसी आग नहीं देखी थी। आग बुझाने के दौरान अब तक 84 दमकलकर्मी झुलस चुके हैं, जिनमें से 10 को तो अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। राहत और बचाव कार्य में 2,500 दमकलकर्मी, 1,500 सैनिक और 1,200 पुलिसकर्मी दिन-रात जुटे हुए हैं। इसके अलावा सैकड़ों स्वयंसेवक और स्विट्जरलैंड की एक विशेष दमकल टीम भी इस संकट की घड़ी में मदद कर रही है। स्पेन में स्थिति थोड़ी संभली है, लेकिन खतरा अभी भी बरकरार है।
आने वाली हीटवेव की चेतावनी
मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी दे दी है कि आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है। फ्रांस में मंगलवार से एक और नई हीटवेव शुरू होने की आशंका है, जिसमें तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक जाने का अनुमान है। तापमान में यह बढ़ोतरी जंगलों की आग को और अधिक हवा दे सकती है। स्पेन की पारिस्थितिकीय परिवर्तन मंत्री सारा आगेसेन ने नागरिकों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग के मुताबिक, सोमवार से चौथी हीटवेव शुरू हो सकती है, जो सामान्य से अधिक तापमान के साथ आग के जोखिम को कई गुना बढ़ा देगी।
एशिया में मॉनसून का विकराल रूप
एक तरफ यूरोप आग की लपटों में घिरा है, तो दूसरी तरफ एशिया में मॉनसून ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। चीन में एक के बाद एक आए तूफानों ने हालात खराब कर रखे हैं। बावी तूफान की मार से लोग संभल भी नहीं पाए थे कि नोल तूफान ने ग्वांगडोंग क्षेत्र में दस्तक दे दी। गांसू प्रांत में भी चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। वहीं, पाकिस्तान के पंजाब, गुजरांवाला और लाहौर जैसे इलाकों में भी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। भारत के कई हिस्सों में भी भारी बारिश के कारण भूस्खलन और बाढ़ की खबरें चिंता पैदा कर रही हैं।
भविष्यवाणी सच साबित हो रही है
वैज्ञानिक पिछले कई दशकों से जिस तरह के क्लाइमेट चेंज की बातें कर रहे थे, अब उसके परिणाम आंखों के सामने हैं। यूरोप के जिन देशों में तापमान आमतौर पर 30 से 32 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं जाता था, वहां अब भीषण गर्मी आम बात हो गई है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि 21वीं सदी के दौरान धरती के तापमान में 4 डिग्री सेंटीग्रेड की बढ़ोतरी निश्चित है। इसके गंभीर परिणाम होंगे, जिनमें ग्लेशियरों का पिघलना और समुद्र के जलस्तर में 0.25 से 0.30 मीटर तक की वृद्धि शामिल है। यदि यही स्थिति रही, तो आने वाले समय में दुनिया के कई बड़े तटीय शहर पानी में डूब सकते हैं। यह सब अब महज एक अनुमान नहीं, बल्कि धरती के अस्तित्व पर मंडराता हुआ प्रत्यक्ष खतरा है।
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