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एक घंटा पहले
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पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनातनी एक बार फिर हिंसक मोड़ ले चुकी है। पिछले कुछ दिनों से दोनों देशों के बीच हमलों का सिलसिला थमा हुआ था और ऐसी उम्मीदें जताई जा रही थीं कि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए तनाव कम करने का प्रयास कर सकते हैं। हालांकि, इस शांति को झटका देते हुए ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर अचानक बैलिस्टिक मिसाइलों से बड़ा हमला कर दिया है। इस नए हमले के बाद पूरे क्षेत्र में एक बार फिर बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ने की आशंका गहरा गई है।
हमले को लेकर सेंटकॉम का बड़ा खुलासा
इस अचानक हुए हमले की पुष्टि खुद अमेरिकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) ने की है। अमेरिकी सेना ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए इस घटना की पूरी जानकारी साझा की है। सेंटकॉम के अनुसार, यह हमला ईरान की सेनाओं द्वारा अमेरिकी सैनिकों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाने के इरादे से किया गया था।
अमेरिकी सेंट्रल कमान ने अपने बयान में बताया:
"आज शाम 5:45 बजे (ET), इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के सैन्य बलों ने ईरान की धरती से कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह हमला मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सुरक्षा बलों पर अचानक किया गया एक बड़ा प्रयास था। हालांकि, सतर्क अमेरिकी रक्षा प्रणालियों ने ईरान की सभी मिसाइलों को सफलतापूर्वक हवा में ही रोक दिया। हमारे सैनिक पूरी तरह से मुस्तैद और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।"
होर्मुज स्ट्रेट पर गहराया पुराना विवाद
इस हमले से पहले दोनों देशों के बीच कुछ समय के लिए शांति देखी जा रही थी। हाल के हफ्तों में दोनों ओर से कोई भी आक्रामक कार्रवाई नहीं की गई थी, लेकिन पृष्ठभूमि में होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भारी तनाव बना हुआ था। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाने वाला यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा है।
- दुनिया भर में कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी होर्मुज स्ट्रेट के संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।
- अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रही तनातनी की वजह से इस क्षेत्र से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति पर बेहद बुरा असर पड़ा है और वर्तमान में यहां से होने वाली सप्लाई ना के बराबर रह गई है।
जब्त फंड और जहाजों को रोकने की चेतावनी
इस विवाद के पीछे एक और बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया बयान भी माना जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट में जिन भी जहाजों, मालवाहक जहाजों (कार्गो) और संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है, उसकी पूरी भरपाई ईरान के फ्रीज फंड (जब्त धन) से की जाएगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति के इस कड़े रुख के बाद ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यदि कोई भी देश या निजी कंपनी अमेरिका की इस योजना को अमलीजामा पहनाने की कोशिश करेगी, तो ईरानी सेना होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले उनके जहाजों को रोक देगी। इस तरह के घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में पहले से ही नाजुक हालातों को और अधिक विस्फोटक बना दिया है।
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