बिहार
एक घंटा पहले
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विचारों
भाई की मौत से मिली प्रेरणा
बिहार के जमुई जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। सुमन सौरभ नाम के एक व्यक्ति ने पिछले 16 सालों से रक्तदान को अपना लक्ष्य बना लिया है। उनके इस जज्बे के पीछे एक बेहद दुखद अतीत छिपा है। बचपन में सुमन ने अपने भाई को एक गंभीर बीमारी के दौरान खो दिया था। उस वक्त न तो स्वास्थ्य सुविधाएं पर्याप्त थीं और न ही समय पर खून की व्यवस्था हो सकी थी, जिसके चलते उनके भाई ने दम तोड़ दिया। अपने भाई को खोने के बाद सुमन ने संकल्प लिया कि वे भविष्य में किसी भी परिवार को खून की कमी के कारण अपना प्रियजन नहीं खोने देंगे।
लगातार 16 वर्षों से जारी सेवा
सुमन सौरभ ने साल 2011 में रक्तदान की दिशा में अपना सफर शुरू किया था। शुरुआती दिनों में चुनौतियां काफी अधिक थीं, लेकिन धीरे-धीरे उनके इस अभियान से लोग जुड़ते गए और एक बड़ा सामाजिक परिवार तैयार हो गया। सुमन न केवल खुद नियमित रूप से रक्तदान करते हैं, बल्कि वे रक्तदान शिविरों का आयोजन कर दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं। उनका यह प्रयास आज इतना व्यापक हो चुका है कि अब तक 10 हजार यूनिट से अधिक रक्त का दान उनके माध्यम से सुनिश्चित किया जा चुका है। सुमन ने खुद अब तक 40 बार रक्तदान किया है और वे हर साल 2 से 3 बार रक्तदान करना जारी रखते हैं।
तकनीक का इस्तेमाल और व्यापक मदद
सुमन सौरभ की कार्यशैली का दायरा केवल जमुई तक सीमित नहीं है। उनका यह सेवा कार्य जमुई के बाहर अन्य जिलों, राज्यों और शहरों तक फैला हुआ है। उन्होंने जरूरतमंदों तक समय पर मदद पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया और WhatsApp ग्रुप का सहारा लिया है। जब भी किसी को किसी विशेष ब्लड ग्रुप की आवश्यकता होती है, तो वे अपने नेटवर्क के जरिए तुरंत रक्तदान की व्यवस्था करते हैं। उनके इस डिजिटल प्रयास से न जाने कितने ऐसे लोगों को जीवनदान मिला है जो गंभीर परिस्थितियों में खून के लिए दर-दर भटक रहे थे।
युवाओं के लिए मिसाल
सुमन सौरभ का मानना है कि रक्तदान मानवता की सेवा का सबसे बड़ा जरिया है। वे बताते हैं कि यदि आज से कई साल पहले उनके भाई को समय पर रक्त मिल जाता, तो वे आज जीवित होते। उनका लक्ष्य है कि भविष्य में किसी भी परिवार को उस पीड़ा से न गुजरना पड़े, जिसे उन्होंने झेला है। इस नेक काम में उन्हें बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं का भी सहयोग मिलता है। सुमन कहते हैं कि रक्तदान करने से न केवल किसी की जान बचती है, बल्कि रक्तदान करने वाले को भी आत्मिक संतुष्टि प्राप्त होती है। वे समाज के हर वर्ग से अपील करते हैं कि लोग बिना किसी संकोच के रक्तदान के लिए आगे आएं। आज उनके जमुई स्थित इस अनूठे अभियान के कारण सैकड़ों लोग न केवल जागरूक हुए हैं, बल्कि स्वयं भी नियमित रक्तदाता बन गए हैं। रक्तदान के प्रति उनकी यह निष्ठा आज पूरे बिहार के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन चुकी है।
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