व्यापार
13 घंटे पहले
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मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के हरसूद क्षेत्र से जुड़ी यह कहानी सिर्फ कामयाबी की दास्तान नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और हौसले की ऐसी मिसाल है जो हर किसी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। आर्थिक तंगी और मुश्किल हालात के बीच बचपन गुजारने वाले रितेश गोयल आज निमाड़ अंचल के बड़े उद्योगपति और कॉलोनाइजर के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।
जब विस्थापन में उजड़ गया पूरा कारोबार
कभी हरसूद की जमीन पर बसा रितेश गोयल का कारोबार नर्मदा परियोजना के चलते हुए विस्थापन में पूरी तरह तबाह हो गया। घर, फैक्ट्री और बरसों से बनी पहचान, सब कुछ पीछे छूट गया। उस दौर में उनके पास खोने को बहुत कुछ था, लेकिन हार मानने के बजाय उन्होंने खंडवा पहुंचकर नए सिरे से जिंदगी शुरू करने का फैसला किया। यही उनके जीवन का सबसे कठिन, मगर निर्णायक मोड़ साबित हुआ।
रितेश गोयल बताते हैं कि उनका पुश्तैनी पेशा व्यापार का था, पर विस्थापन के बाद सब कुछ खत्म हो गया। ऐसे में उन्होंने बेहद छोटे स्तर से दोबारा शुरुआत की। उन्होंने मंडी में काम किया, पुराने व्यापार को धीरे-धीरे फिर से खड़ा किया और नए क्षेत्रों की ओर कदम बढ़ाए। गिट्टी और निर्माण कार्य जैसे कामों में अनुभव लेकर उन्होंने अपने लिए नई राहें तलाशीं।
कॉलोनी डेवलपमेंट बना जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट
इसके बाद रितेश गोयल ने कॉलोनी डेवलपमेंट के क्षेत्र में कदम रखा, जो उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। मेहनत, ईमानदारी और दूरदृष्टि के बल पर उन्होंने एक के बाद एक कई प्रोजेक्ट शुरू किए। आज निमाड़ क्षेत्र में उनके 14 से 15 बड़े कॉलोनी प्रोजेक्ट संचालित हो रहे हैं।
उनका ‘बालाजी ग्रुप’ आज एक बड़ा नाम बन चुका है, जो न सिर्फ कारोबार कर रहा है, बल्कि सैकड़ों लोगों को रोजगार भी मुहैया करा रहा है।
समाजसेवा में भी सबसे आगे
कारोबार के साथ-साथ रितेश गोयल समाज सेवा के मोर्चे पर भी लगातार सक्रिय रहे हैं। कोरोना काल में जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए वे खुद सड़कों पर उतरे और सेवा कार्य किए, जिसकी वजह से लोग उन्हें प्यार से ‘निमाड़ का सोनू सूद’ भी कहने लगे।
धार्मिक और शैक्षणिक क्षेत्र में योगदान
धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। छैगांव माखन स्थित दिव्य बालाजी नगर में भगवान तिरुपति बालाजी की 81 फीट ऊंची भव्य मूर्ति का निर्माण कराया जा रहा है, जो आने वाले समय में एक बड़ा धार्मिक और पर्यटन केंद्र बन सकता है। इसके अलावा ओंकारेश्वर में केदारेश्वर धाम मंदिर निर्माण की योजना भी तैयार की जा रही है।
शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने ‘एंजेल प्लेनेट स्कूल’ की स्थापना की, जहां बच्चों को बेहतर पढ़ाई के साथ-साथ खेल और दूसरी गतिविधियों में आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। इस स्कूल के कई बच्चों ने जिला और प्रदेश स्तर पर उपलब्धियां हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
उतार-चढ़ाव से भरा संघर्ष का सफर
रितेश गोयल कहते हैं कि जब वे खंडवा आए थे, तब उनके पास सीमित संसाधन थे और उन्होंने एक छोटे से मकान से अपनी नई शुरुआत की थी। इस संघर्षपूर्ण सफर में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। आज उनकी गिनती कामयाब उद्योगपतियों में होती है और उनका कारोबार करोड़ों में पहुंच चुका है।
यह कहानी हमें सिखाती है कि अगर इंसान में मेहनत, हिम्मत और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो वह किसी भी मुश्किल को पार कर शून्य से शिखर तक का सफर तय कर सकता है।
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