डेढ़ घंटे में 6000 रसगुल्ले तैयार करती है यह मशीन, घटी मजदूरी की लागत बिहार 2 घंटे पहले 3
सीतामढ़ी के एक मिठाई कारखाने में लगी आधुनिक रसगुल्ला मेकिंग मशीन सिर्फ डेढ़ घंटे में 6000 रसगुल्ले बना देती है, जबकि यही काम कारीगरों को कम से कम 8 से 10 घंटे में पूरा करना पड़ता था।

आज के दौर में किसी भी कारोबार को आगे ले जाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल जरूरी हो गया है। मिठाई बनाने यानी हलवाई के पारंपरिक पेशे में भी अब एक ऐसी तकनीक पहुँच चुकी है, जो व्यापारियों के लिए मुनाफे का सौदा बन रही है। जिन मिठाइयों को हाथ से बनाने में ढेर सारी मेहनत और लंबा वक्त लगता था, वही अब मशीन के सहारे चंद मिनटों में तैयार हो जाती हैं। सीतामढ़ी के चंदन मिष्ठान भंडार में लगी आधुनिक रसगुल्ला मेकिंग मशीन इसकी ताजा मिसाल है। यह मशीन काम को आसान बनाने के साथ-साथ मिठाई बनाने की पुरानी प्रक्रिया को भी पूरी तरह बदल रही है, और बड़े मिठाई कारोबारियों के लिए एक फायदेमंद निवेश साबित हो रही है।

कम समय में रिकॉर्ड उत्पादन और एक जैसा आकार

कारखाने की संचालक रेनू सिंह बताती हैं कि इस स्वचालित मशीन की सबसे बड़ी खूबी इसकी रफ्तार और कार्यक्षमता है। आम मजदूरों को 5 से 6 हजार रसगुल्ले बनाने में जहाँ 6 से 10 घंटे लग जाते हैं, वहीं यह मशीन यही काम महज एक से डेढ़ घंटे में निपटा देती है।

मशीन चलाने वाले कर्मचारी के मुताबिक, यह तेज रफ्तार के साथ बेहतरीन फिनिशिंग देती है। इसकी मदद से एक ही आकार और बराबर वजन की लोइयाँ कटती हैं, जिससे सभी रसगुल्ले देखने में एक जैसे और आकर्षक बनते हैं। हालांकि गोलियाँ कटने के बाद उन्हें पकाने में थोड़ा समय जरूर लगता है, लेकिन अगर एक साथ चार कड़ाही का इस्तेमाल किया जाए तो करीब दो घंटे में पूरी खेप तैयार हो जाती है।

मजदूरी के भारी खर्च से राहत

लोकल मीडिया से बातचीत में रेनू सिंह ने बताया कि किसी भी कारोबार में मजदूरों पर होने वाला खर्च सीधे मुनाफे को घटा देता है। पारंपरिक तरीके से 6000 रसगुल्ले बनाने के लिए कम से कम 5 से 6 कुशल कारीगरों और सहायकों की जरूरत पड़ती है। आज के समय में एक मुख्य कारीगर की दैनिक मजदूरी 1000 से 1200 रुपये तक होती है, जिससे रोजाना का खर्च काफी बढ़ जाता है।

उनका कहना है कि यह नई मशीन इस खर्च को लगभग शून्य कर देती है। जो काम मजदूर 8 से 10 घंटे में करते हैं, उसे मशीन एक घंटे में पूरा कर देती है। इस तरह यह व्यापारियों की लेबर कॉस्ट बचाकर उनके मुनाफे को सीधे बढ़ाने में मदद करती है।

लागत, आधुनिक सेटअप और आगे का मुनाफा

इस उपयोगी रसगुल्ला मेकिंग मशीन की कीमत करीब 4.25 लाख रुपये है और इसे कोलकाता से मँगवाया गया है। इस पर किसी तरह की सरकारी सब्सिडी नहीं ली गई है, फिर भी अपने फायदों की वजह से यह काफी किफायती साबित हो रही है।

मिठाई निर्माण को पूरी तरह आधुनिक और साफ-सुथरा बनाने के लिए कारखाने में सिर्फ यही मशीन नहीं, बल्कि एक पूरा सेटअप तैयार किया गया है। इसमें दूध को सुरक्षित रखने के लिए बीएमसी (बल्क मिल्क चिलर), मिठाई को ठंडा और ताजा रखने के लिए कोल्ड रूम और पकाने के लिए स्टीम बॉयलर शामिल हैं। शुद्धता, सफाई और कम लागत में अधिक उत्पादन चाहने वाले छोटे-बड़े कारोबारियों के लिए यह सेटअप भविष्य की राह दिखा रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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