मुंबई सिद्धिविनायक मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: ट्रस्ट ने उद्धव गुट पर लगाए गंभीर आरोप, जांच की मांग तेज महाराष्ट्र एक घंटा पहले 3
मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों पर ट्रस्ट ने पहली बार आधिकारिक सफाई पेश की है। ट्रस्ट अध्यक्ष सदा सरवणकर ने दावा किया कि मंदिर की व्यवस्था सुधारने के बाद दान की राशि में भारी बढ़ोतरी हुई है और उन्होंने गड़बड़ी में शामिल कर्मचारियों के शिवसेना (यूबीटी) से जुड़े होने का आरोप लगाया है।

सिद्धिविनायक मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में ट्रस्ट की पहली सफाई

मुंबई के प्रतिष्ठित सिद्धिविनायक मंदिर में चढ़ावे को लेकर मचे विवाद पर मंदिर ट्रस्ट ने आज अपना पक्ष स्पष्ट किया है। ट्रस्ट ने साफ तौर पर स्वीकार किया है कि मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटनाएं सामने आई थीं, लेकिन उन्होंने इसे खुद की मिलीभगत बताने वाले आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। ट्रस्ट का कहना है कि यह चोरी उन कर्मचारियों द्वारा की जा रही थी जो सीधे तौर पर उद्धव ठाकरे की पार्टी यानी शिवसेना (यूबीटी) से जुड़े हुए हैं। ट्रस्ट अध्यक्ष सदा सरवणकर ने बताया कि 21 मार्च को पहली बार यह चोरी रंगे हाथों पकड़ी गई थी। सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच के बाद 8 लोगों को चोरी करते हुए पकड़ा गया, जिसके बाद उन्हें तुरंत पुलिस के हवाले कर दिया गया और जेल भेज दिया गया। ट्रस्ट के अनुसार, इन गिरफ्तार लोगों में कुछ कर्मचारी शिवसेना (यूबीटी) की विचारधारा और संगठन से गहराई से जुड़े हुए थे। इस घटना के बाद ट्रस्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कुल 45 कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।

वीआईपी दर्शन और ठगी का नेटवर्क

ट्रस्ट की सफाई में यह भी सामने आया है कि इन कर्मचारियों के तार केवल दान की पेटी में चोरी तक ही सीमित नहीं थे। इनमें से कई कर्मचारी उन लोगों में शामिल थे जो भक्तों को वीआईपी दर्शन के नाम पर ठगने का काम कर रहे थे। सदा सरवणकर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि पहले मंदिर के चढ़ावे की साप्ताहिक रकम करीब 45 लाख रुपये तक आती थी, जो उनकी टीम द्वारा व्यवस्थाएं दुरुस्त करने और दलालों का नेटवर्क तोड़े जाने के बाद अब बढ़कर 98 लाख रुपये तक पहुंच गई है। ट्रस्ट को संदेह है कि पिछली अवधि के दौरान चढ़ावे की रकम में हेरफेर करके मंदिर को सालाना 12 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया है। सरवणकर ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को जांच के लिए पत्र और ऑडिट की मांग करने का फैसला ट्रस्ट का ही था। उन्होंने कहा कि मौजूदा ट्रस्ट का इन चोरियों से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि उन्होंने मंदिर की व्यवस्था में सुधार कर उसे पारदर्शी बनाया है।

सदा सरवणकर का प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखा हमला

मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने मीडिया के सामने सवाल खड़ा किया कि क्या कोई जानबूझकर सिद्धिविनायक मंदिर की गरिमा को नुकसान पहुंचाने के लिए साजिश रच रहा है? उन्होंने बताया कि सार्वजनिक कार्यक्रम में राज ठाकरे द्वारा कथित अनियमितताओं से जुड़ा पत्र पढ़ने के बाद मामला और तूल पकड़ गया। सरवणकर ने कहा कि उन्होंने खुद मंदिर की गड़बड़ियों को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) में शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत पर ही ट्रैप लगाए गए और सीसीटीवी के आधार पर ट्रस्ट के कर्मचारी राजन पेंडुलकर को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने दावा किया कि गिरफ्तार हुए राजन पेंडुलकर और अन्य 9 आरोपी शिवसेना (यूबीटी) की नेता विशाखा राऊत से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपने ऊपर इस्तीफे के दबाव को खारिज करते हुए कहा कि मैंने ही चोरों को पकड़ाया है और दोषियों के खिलाफ 45 लोगों पर कार्रवाई की है। उनके पास सबूत हैं कि ये सभी कर्मचारी शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं से सीधे तौर पर जुड़े रहे हैं।

दान की राशि में सालाना 18 करोड़ का अंतर

सदा सरवणकर ने विस्तार से बताया कि पहले दान की राशि 40-50 लाख रुपये तक ही दर्ज होती थी, लेकिन बाद में यह 90 लाख रुपये तक पहुंच गई। जांच में सालाना लगभग 18 करोड़ रुपये का बड़ा अंतर पाया गया है। इसी अंतर की सच्चाई जानने के लिए ट्रस्ट ने ACB को विस्तृत जांच के लिए पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की कि इस अंतर के पीछे के जिम्मेदार लोगों का खुलासा होना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि उनकी टीम के कार्यभार संभालने के बाद दान में जो वृद्धि हुई है, वही पिछली खामियों का सबसे बड़ा प्रमाण है।

ट्रस्टी राहुल लोंढे की ओर से नई जांच की मांग

ट्रस्ट के एक अन्य सदस्य राहुल लोंढे ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब CID जांच की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि विधि एवं न्याय विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है, जिसे मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के सामने रखा जाएगा। राहुल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को कोई पत्र नहीं लिखा है, इसलिए राज ठाकरे किसका पत्र पढ़ रहे थे, यह उनसे ही पूछा जाना चाहिए। उन्होंने वर्ष 2019 में तत्कालीन अध्यक्ष आदेश बांदेकर द्वारा 'शिव भोजन योजना' के लिए दिए गए 10 करोड़ रुपये के फंड पर भी सवाल उठाए। उस समय उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे और मंदिर से इस योजना के लिए बड़ी राशि ली गई थी। ट्रस्ट अब यह जानना चाहता है कि उस 10 करोड़ रुपये का हिसाब कहां है और यह राशि किन केंद्रों पर खर्च की गई।

व्यवस्था में सुधार और दादर स्टेशन से सक्रिय दलाल

ट्रस्ट ने अपने बचाव में कहा है कि पूरे मामले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। राहुल लोंढे के अनुसार, 2024 में जिम्मेदारी संभालने के बाद जब उन्होंने मंदिर की समीक्षा की, तो दादर स्टेशन से लेकर मंदिर तक श्रद्धालुओं से अवैध वसूली का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय मिला। इसमें फूल विक्रेता, टैक्सी चालक और मंदिर के कुछ कर्मचारी आपस में मिले हुए थे। आरती के बाद दानपेटी से पैसे निकालने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई। इन प्रशासनिक सुधारों के बाद ही साप्ताहिक चढ़ावा 20-50 लाख से बढ़कर 90 लाख से 1 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। ट्रस्ट का मानना है कि पहले सालाना लगभग 18 करोड़ रुपये की संभावित गड़बड़ी हो रही थी, जिसकी अब निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

राजनीतिक गलियारों में चढ़ावे पर घमासान

सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के चढ़ावे पर शुरू हुई इस राजनीति ने अब जोर पकड़ लिया है। 21 अप्रैल 2026 को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लिखे गए पत्र के सार्वजनिक होने के बाद कांग्रेस और अन्य दलों ने भी जांच की मांग की है। हालांकि, ट्रस्ट ने इन दावों को नकारा है कि ट्रस्टियों में कोई भ्रष्टाचार है। उनका कहना है कि हमने खुद गलतियों को पकड़ा और सुधारा है। ट्रस्ट के संचालन में शिवसेना, बीजेपी और एनसीपी (अजित पवार गुट) के प्रतिनिधि शामिल हैं, जिससे इस मामले में राजनीतिक संतुलन बना हुआ है। ट्रस्ट ने यह भी खुलासा किया कि 19 अन्य कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है जो मंदिर के बाहर फूल-हार विक्रेताओं के साथ मिलीभगत कर श्रद्धालुओं से 100 से 500 रुपये तक अवैध उगाही करते थे। बैंक खातों और गूगल पे के सबूतों के बाद इन लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। अंततः, ट्रस्ट का कहना है कि चढ़ावे में वृद्धि चोरी के कारण नहीं, बल्कि पारदर्शी व्यवस्था और सख्त सुधारों का परिणाम है। अब पूरा मामला जांच के दायरे में है, जिसमें मंदिर परिसर को नया लुक देने की प्रस्तावित योजना भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप