पीएम मोदी की घोषणा के बावजूद हिमाचल को 1500 करोड़ का पैकेज क्यों नहीं? जेपी नड्डा ने बताई पूरी वजह हिमाचल प्रदेश एक घंटा पहले 2
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शिमला में सुक्खू सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र ने हिमाचल को भरपूर आर्थिक मदद दी, लेकिन राज्य सरकार उसका सही उपयोग नहीं कर सकी। उन्होंने 1500 करोड़ रुपये की आपदा सहायता पर खर्च की स्पष्टता न होने का आरोप लगाया।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शिमला में हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अपनी प्रशासनिक नाकामियों को छिपाने के लिए केंद्र पर मदद न देने का इल्ज़ाम मढ़ रही है। उनके मुताबिक केंद्र ने प्रदेश को पर्याप्त आर्थिक सहायता मुहैया कराई, मगर राज्य सरकार उसका असरदार इस्तेमाल नहीं कर पाई।

1500 करोड़ की सहायता पर खर्च की स्पष्टता नहीं

नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बीते वर्ष आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए धर्मशाला में घोषित 1500 करोड़ रुपये की सहायता का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अब तक यह साफ नहीं कर पाई है कि यह राशि किन परियोजनाओं और मदों में खर्च की जाएगी। उन्होंने जोड़ा कि केंद्र सरकार धन देने को तैयार है, लेकिन उपयोग और योजना की स्पष्टता भी ज़रूरी है।

हालांकि जब पीएम मोदी ने आपदा राहत के लिए हिमाचल हेतु 1500 करोड़ की मदद का ऐलान किया था, उस वक्त इस राशि के लिए कोई शर्त नहीं रखी गई थी। उसी मौके पर प्रधानमंत्री ने पंजाब के लिए भी राहत राशि की घोषणा की थी।

"सुक्खू सरकार की नाकामी से लौटी करोड़ों की राशि"

नड्डा ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार कई केंद्रीय योजनाओं का पैसा खर्च नहीं कर सकी, जिसके चलते बड़ी रकम वापस चली गई। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्र की ओर से दिए गए करीब 300 करोड़ रुपये भी खर्च नहीं हो पाए और अब यह राशि लौटने की स्थिति में है। उन्होंने बल्क ड्रग पार्क का उदाहरण देते हुए कहा कि स्वीकृत राशि का सीमित इस्तेमाल हुआ, जबकि मेडिकल डिवाइस पार्क जैसी परियोजनाओं को भी राज्य सरकार ने आगे नहीं बढ़ाया।

"हिमाचल में एडहॉक सरकार चल रही है"

राजधानी शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नड्डा ने प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हिमाचल में "एडहॉक सरकार" चल रही है और मुख्यमंत्री भी एडहॉक पर हैं, जबकि सरकार दिल्ली से संचालित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य सचिव और डीजीपी जैसे पदों पर अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था प्रशासन को प्रभावित कर रही है। उनके अनुसार प्रदेश में "नो मैनेजमेंट, नो गवर्नेंस" की हालत है और सरकार फैसले लेने में कमज़ोर नज़र आ रही है।

"कट मनी और कमीशन की राजनीति"

राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए नड्डा ने कहा कि प्रदेश में "कट मनी और कमीशन" की सियासत चल रही है। उन्होंने सरकार को "अटैची वाली सरकार" बताते हुए कहा कि जनता विकास और पारदर्शिता चाहती है।

केंद्रीय सहायता और विकास कार्यों का ब्योरा

नड्डा ने दावा किया कि वित्त वर्ष 2024-25 में हिमाचल प्रदेश को विशेष सहायता योजना के तहत 2,381 करोड़ रुपये, एनडीआरएफ के माध्यम से 2,006 करोड़ रुपये और बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लिए 2,150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद दी गई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़कों और फोरलेन परियोजनाओं का विस्तार हो रहा है तथा रेलवे क्षेत्र में इस वर्ष 2,911 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। साथ ही 4 वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन भी विकसित किए जा रहे हैं।

सड़क, रेल, शिक्षा और ऊर्जा में अभूतपूर्व निवेश

उन्होंने कहा कि प्रदेश में 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं प्रगति पर हैं। रेलवे क्षेत्र में रिकॉर्ड 2,911 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है और 13,168 करोड़ रुपये की लागत वाली चार प्रमुख रेल परियोजनाओं पर काम जारी है। अमृत भारत स्टेशन योजना और वंदे भारत ट्रेन ने प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार दी है।

नड्डा ने कहा कि आईआईएस सिरमौर, ट्रिपल आईटी ऊना, स्मार्ट सिटी मिशन, रेणुका जी बांध और लुहरी परियोजना जैसे अनेक विकास कार्य हिमाचल के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं।

स्वास्थ्य में ऐतिहासिक निवेश, पर क्रियान्वयन में पिछड़ी सरकार

नड्डा ने बताया कि एम्स बिलासपुर, मेडिकल कॉलेजों, पीजीआई सैटेलाइट सेंटर और आईजीएमसी शिमला के लिए हजारों करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। जायका समर्थित 1,422 करोड़ रुपये की परियोजना के ज़रिए प्रदेश के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है।

हालांकि उन्होंने कहा कि पीएम-एबीएचआईएम के तहत स्वीकृत 15 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों में से केवल एक ही पूरा हो पाया है। 12 इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स में से सिर्फ एक तैयार हुई है और 73 स्वीकृत ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों में से एक भी संचालित नहीं हो सकी है। 15वें वित्त आयोग के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए स्वीकृत 521 करोड़ रुपये में से लगभग आधी राशि खर्च ही नहीं की गई।

बल्क ड्रग पार्क: मंजूरी में लगे तीन साल

नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार ने 11 अक्टूबर 2022 को ही बल्क ड्रग पार्क परियोजना को स्वीकृति दे दी थी, लेकिन प्रदेश सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्राथमिकता नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की सुस्त कार्यशैली और प्रक्रियागत लापरवाही के कारण पर्यावरणीय मंजूरी हासिल करने में करीब तीन वर्ष लग गए और यह मंजूरी 25 सितंबर 2025 को जाकर मिली।

उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश सरकार समय रहते ज़रूरी औपचारिकताएं पूरी करती तो आज हिमाचल देश के फार्मा क्षेत्र में नई पहचान बना चुका होता और हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो चुके होते। नड्डा के मुताबिक केंद्र सरकार ने इस परियोजना के लिए 1,000 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता स्वीकृत की और 225 करोड़ रुपये जारी भी किए, लेकिन प्रदेश सरकार महज 102.13 करोड़ रुपये ही उपयोग कर सकी।

मेडिकल डिवाइस पार्क का मौका गंवाया

नड्डा ने कहा कि 100 करोड़ रुपये लागत वाले मेडिकल डिवाइस पार्क को 10 फरवरी 2022 को स्वीकृति मिली थी, लेकिन प्रदेश सरकार अक्टूबर 2024 में खुद इस परियोजना से पीछे हट गई। इसका नतीजा यह हुआ कि केंद्र सरकार द्वारा जारी 30 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी वापस करनी पड़ी।

कर्ज और वित्तीय हालात पर सवाल

नड्डा ने आरोप लगाया कि सुक्खू सरकार के कार्यकाल में हिमाचल का कर्ज 1 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया है और राज्य का ऋण-जीडीपी अनुपात 41 प्रतिशत तक जा पहुंचा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में प्रदेश का पूंजीगत व्यय भी पिछले साल की तुलना में काफी कम रहा। सीएजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश पर ऋण का बोझ 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, शासन-प्रशासन में समन्वय की कमी है और विकास परियोजनाएं अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहीं।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने में नाकाम रही है और जनता अब सरकार के कामकाज का आकलन कर रही है। शिमला स्थित होलीडे होम में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों, हिमाचल को मिले अभूतपूर्व केंद्रीय सहयोग और प्रदेश की कांग्रेस सरकार की प्रशासनिक विफलताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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