कम बारिश की आशंका में किसान क्या लगाएं? कृषि वैज्ञानिक ने सुझाईं धान की 5 भरोसेमंद किस्में बिहार 3 महीने पहले 41
मानसून में सामान्य से कम बारिश की आशंका के बीच कृषि विज्ञान केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक ने किसानों को कम अवधि और कम पानी में तैयार होने वाली धान की किस्में अपनाने की सलाह दी है, जो 120 से 130 दिनों में पककर तैयार हो जाती हैं।

इस साल मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की आशंका को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को पहले से ही सतर्क रहने की सलाह दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के मुताबिक इस बार बारिश सामान्य से कम रह सकती है। ऐसे हालात में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), शिवहर की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनुराधा रंजन ने किसानों से अपील की है कि वे समय रहते अपनी खेती की रणनीति में बदलाव करें।

लंबी अवधि वाली किस्मों से करें परहेज

डॉ. अनुराधा रंजन का कहना है कि अगर किसान इस बार भी पुराने और पारंपरिक ढंग से ही खेती करते रहे, तो उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे लंबी अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों को लगाने से बचें। इन किस्मों को पकने में अधिक समय और कहीं ज्यादा पानी की आवश्यकता पड़ती है, जो कम बारिश की परिस्थिति में फसल के लिए खतरा बन सकता है।

कहां करें और कहां न करें धान की खेती

वैज्ञानिक के अनुसार जिन किसानों की जमीन ऊपरी क्षेत्र यानी अपलैंड में है, उन्हें वहां धान की खेती से बचना चाहिए। इसके बजाय मध्यम भूमि (मिडलैंड) और निचली भूमि (लोलैंड) में धान उगाना अधिक सुरक्षित साबित होगा। इस तरह कम बारिश की स्थिति में भी फसल को पर्याप्त नमी मिलती रहेगी।

कम पानी में भी बेहतर उपज देने वाली किस्में

डॉ. अनुराधा रंजन ने बताया कि कम बारिश की चुनौती से पार पाने के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कम अवधि वाली धान की किस्में बेहतर विकल्प हैं। ये किस्में 120 से 130 दिनों के भीतर तैयार हो जाती हैं और कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखती हैं।

किसानों को इन पांच किस्मों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है:

  • राजेंद्र नीलम
  • राजेंद्र सुवासिनी
  • राजेंद्र भगवती
  • राजेंद्र सरस्वती
  • प्रभात

सुगंधित और महीन धान उगाने वालों के लिए भी राहत

सुगंधित और महीन धान की खेती करने वाले किसानों के लिए भी अच्छी खबर है। कृषि विज्ञान केंद्र में राजेंद्र कस्तूरी, राजेंद्र श्वेता और राजेंद्र मंसूरी जैसी उन्नत किस्मों के बीज मौजूद हैं। इन किस्मों की किसानों के बीच काफी मांग है और बड़ी संख्या में किसान यहां से प्रमाणित बीज खरीद रहे हैं।

बदलते मौसम में सही चयन जरूरी

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती मौसमी परिस्थितियों को देखते हुए इस बार किसानों के लिए सही किस्म का चुनाव और वैज्ञानिक सलाह पर अमल करना बेहद अहम होगा। इससे वे कम बारिश की स्थिति में भी अच्छा उत्पादन हासिल कर आर्थिक नुकसान से खुद को बचा सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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