एक्ट्रेस शहाना गोस्वामी का खुलासा-वे 'ओपन रिलेशनशिप' में हैं, जानिए क्या है यह और कितने तरह के होते हैं ऐसे रिश्ते रिश्ते 13 घंटे पहले 1
अभिनेत्री शहाना गोस्वामी के एक से अधिक पार्टनर वाले 'ओपन रिलेशनशिप' में होने के बयान ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। जानिए ओपन रिलेशनशिप, सिचुएशनशिप, बेंचिंग और घोस्टिंग जैसे रिश्तों के नए रूप और इन पर भारत का कानून क्या कहता है।

हाल ही में अभिनेत्री शहाना गोस्वामी ने एक इंटरव्यू में बताया कि वे "ओपन रिलेशनशिप" में हैं और उनके जीवन में एक से अधिक पार्टनर हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके ये रिश्ते "कैजुअल" नहीं, बल्कि भावनात्मक और ईमानदारी पर टिके हुए हैं। इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई कि क्या आज के दौर में रिश्तों की परिभाषा सचमुच बदल रही है।

सवाल यह भी उठा कि क्या ओपन रिलेशनशिप, सिचुएशनशिप, बेंचिंग और घोस्टिंग जैसे शब्द नई पीढ़ी के प्रेम और अकेलेपन की नई भाषा बन चुके हैं। दुनियाभर में रिश्तों के तौर-तरीके और शर्तें तेजी से बदल रही हैं और भारत भी इससे अछूता नहीं है। यह सही है कि अभी ये बातें बहुत बड़े स्तर पर न तो फैली हैं और न ही व्यापक रूप से स्वीकार की जाती हैं, लेकिन युवा पीढ़ी तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रही है और रिश्तों को एक नए नजरिये से जीने लगी है।

इस तरह का चलन 2020 के दशक में और तेजी से दुनिया को बदल रहा है। अब सिर्फ "बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड" या "पति-पत्नी" जैसी पारंपरिक परिभाषाएं ही नहीं रह गई हैं। डिजिटल कल्चर, डेटिंग ऐप्स, शहरी अकेलापन, करियर पर केंद्रित जीवनशैली और निजी स्वतंत्रता की बढ़ती चाहत ने रिश्तों के कई नए रूप गढ़ दिए हैं। शहाना गोस्वामी ने भी साफ कहा कि "प्यार में नियम और नियंत्रण" जरूरी नहीं होते।

ओपन रिलेशनशिप क्या होती है?

ओपन रिलेशनशिप एक ऐसा अरेंजमेंट है, जिसमें दो लोग आपसी सहमति से यह तय करते हैं कि वे एक-दूसरे के अलावा अन्य लोगों के साथ भी भावनात्मक या शारीरिक संबंध रख सकते हैं। इसे चीटिंग से अलग माना जाता है, क्योंकि इसमें पारदर्शिता और सहमति दोनों मौजूद रहती हैं। इसके भी कई रूप हैं—

  1. मोनोगैमिश – इसमें दो लोग मुख्य पार्टनर होते हैं, लेकिन कुछ सीमित परिस्थितियों में दूसरे लोगों से भी जुड़ सकते हैं।
  2. पॉलीअमरी – इसमें एक व्यक्ति एक साथ कई लोगों से प्रेम संबंध रख सकता है और सभी को इसकी जानकारी होती है।
  3. रिलेशनशिप एनार्की – इसमें रिश्तों को किसी तय ढांचे में नहीं बांधा जाता और दोस्ती, प्रेम तथा साझेदारी की सीमाएं लचीली रहती हैं।
  4. कैजुअल ओपन रिलेशन – इसमें भावनात्मक गहराई कम और स्वतंत्रता अधिक होती है।

भारत में यह अवधारणा फिलहाल सीमित शहरी वर्ग तक ही दिखाई देती है, लेकिन डेटिंग ऐप्स और सोशल मीडिया ने इसे चर्चा का हिस्सा बना दिया है।

सिचुएशनशिप किसे कहते हैं

यह ऐसा रिश्ता होता है जिसमें दो लोग भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं, साथ समय बिताते हैं और कभी-कभी उनके बीच शारीरिक संबंध भी होते हैं, मगर वे अपने रिश्ते को कोई स्पष्ट नाम नहीं देते। यह न तो पूरी तरह दोस्ती होती है और न ही प्रेम संबंध। इसका मतलब होता है – "हम साथ हैं भी और नहीं भी।" ऐसे रिश्ते अक्सर इसलिए बनते हैं क्योंकि लोग "कमिटमेंट" से बचना तो चाहते हैं, लेकिन अकेले भी नहीं रहना चाहते।

बेंचिंग क्या है?

यह शब्द खेलों की "बेंच" से आया है। जैसे क्रिकेट या फुटबॉल में किसी खिलाड़ी को रिजर्व में बैठा दिया जाता है, उसी तरह रिश्तों में "बेंचिंग" का अर्थ है किसी व्यक्ति को पूरी तरह छोड़ना तो नहीं, लेकिन उसे प्राथमिकता भी नहीं देना। इसमें ये बातें होती हैं—

  • कभी-कभार मैसेज करते रहना
  • सामने वाले की उम्मीद बनाए रखना
  • लेकिन कोई गंभीर रिश्ता नहीं बनाना

यानी सामने वाले को एक तरह की "वेटिंग लिस्ट" में रखना। डेटिंग ऐप्स के दौर में यह व्यवहार इसलिए बढ़ा है, क्योंकि लोगों को हमेशा यह लगता रहता है कि शायद कोई "बेहतर विकल्प" मिल जाए।

घोस्टिंग यानी अचानक गायब हो जाना

इसे आज की डिजिटल संस्कृति का सबसे आम और सबसे क्रूर व्यवहार माना जाता है। घोस्टिंग का मतलब है अचानक संपर्क पूरी तरह खत्म कर देना, मैसेज या कॉल का कोई जवाब न देना और बिना किसी स्पष्टीकरण के गायब हो जाना। मनोवैज्ञानिक इसे भावनात्मक असुरक्षा और टकराव से बचने की प्रवृत्ति से जोड़कर देखते हैं।

यह बदलाव आया कैसे

टिंडर, बम्बल और हिंज जैसे ऐप्स ने रिश्तों को "चॉइस" आधारित बना दिया है, जिसमें लोगों के सामने ढेरों विकल्प मौजूद रहते हैं। पहले विवाह एक सामाजिक आवश्यकता था, मगर अब शहरी युवाओं के लिए यह "व्यक्तिगत चुनाव" बनता जा रहा है। नई पीढ़ी अपने करियर, निजी स्पेस और मानसिक स्वतंत्रता को बहुत अहमियत देती है।

महानगरों में लाखों लोग अपने परिवार से दूर रहते हैं, ऐसे में रिश्ते भावनात्मक सहारे का जरिया तो बनते हैं, लेकिन उनमें स्थायित्व कम होता है। इंस्टाग्राम और डिजिटल लाइफस्टाइल ने रिश्तों में तुलना और असुरक्षा की भावना को भी बढ़ाया है।

क्या यह चलन पश्चिम से आया है

काफी हद तक इसका जवाब हां कहा जा सकता है। 1960 और 70 के दशक में अमेरिका और यूरोप में सेक्सुअल रेवोल्यूशन हुआ, जिस दौर में विवाह और सेक्स को लेकर पारंपरिक धारणाओं को चुनौती दी गई। "फ्री लव", लिव-इन रिलेशन और ओपन मैरिज जैसे विचार वहीं से लोकप्रिय हुए। हालांकि भारतीय समाज में भी रिश्तों की विविधता हमेशा से मौजूद रही है।

इन रिश्तों पर कानून क्या कहता है

भारत का कानूनी ढांचा आज भी मुख्य रूप से विवाह केंद्रित है। फिर भी कानून मुख्य तौर पर तीन बातों पर ध्यान देता है—

  • क्या रिश्ता सहमति से बना है
  • क्या उसमें धोखा, जबरदस्ती या शोषण है
  • क्या वह विवाह कानूनों का उल्लंघन करता है

इसी आधार पर अलग-अलग रिश्तों की कानूनी स्थिति को समझा जा सकता है।

ओपन रिलेशनशिप पर कानून का रुख

"ओपन रिलेशनशिप" नाम की कोई अलग कानूनी श्रेणी भारत में नहीं है। यानी न तो यह कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त संस्था है और न ही इसे अपराध घोषित किया गया है। अगर दो वयस्क आपसी सहमति से किसी रिश्ते में हैं, तो भारतीय कानून आमतौर पर उसमें दखल नहीं देता। समस्या तब खड़ी होती है जब कोई व्यक्ति शादीशुदा हो और विवाह कानूनों का उल्लंघन हो रहा हो।

क्या शादीशुदा व्यक्ति ओपन रिलेशन रख सकता है?

यह सामाजिक रूप से भले विवादित हो, लेकिन केवल सहमति से बने शारीरिक संबंध अब अपने-आप में अपराध नहीं हैं। वर्ष 2018 में जोसेफ साइनी बनाम संघीय भारत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने IPC की धारा 497 (व्यभिचार) को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। इसका अर्थ है कि विवाहेतर संबंध अब अपराध नहीं हैं, लेकिन वे तलाक का आधार जरूर बन सकते हैं। यानी ऐसे मामलों में जेल नहीं होगी, मगर पति या पत्नी अदालत में तलाक की मांग कर सकते हैं।

लिव-इन रिलेशनशिप की कानूनी स्थिति

भारत में लिव-इन रिलेशन पूरी तरह गैरकानूनी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में कहा है कि अगर दो बालिग साथ रहना चाहें तो यह उनका अधिकार है।

पॉलीअमरी और एक से अधिक पार्टनर

यहां कानून थोड़ा सख्त हो जाता है। हिंदू विवाह कानून के तहत एक समय में केवल एक ही वैध विवाह मान्य है। दूसरा विवाह करने पर "बायगैमी" (दोहरी शादी) का मामला बन सकता है। कई लोगों से भावनात्मक संबंध रखना अपराध नहीं है, लेकिन कानूनी तौर पर एक से ज्यादा शादी नहीं की जा सकती।

सिचुएशनशिप और कैजुअल रिलेशन

इनके लिए कोई अलग कानून नहीं है। कानून तभी हस्तक्षेप करता है जब धोखा हुआ हो, झूठे विवाह के वादे पर संबंध बने हों, आर्थिक शोषण हुआ हो, निजी तस्वीरें फैलाई जाएं या सहमति का उल्लंघन हो।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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