उत्तर प्रदेश
एक दिन पहले
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विचारों
बहराइच जिले के कटरा बहादुरगंज गांव की रहने वाली संगीता देवी कभी खेती को लेकर खासी चिंतित रहती थीं। धान और गेहूं की परंपरागत खेती से उन्हें इतनी कमाई नहीं हो पाती थी कि परिवार की आर्थिक हालत सुधर सके। इसी बीच उनके पड़ोस में बिहार से आईं महिला किसान माया देवी ने सब्जी की खेती शुरू की, जिसे देखकर संगीता के मन में भी कुछ नया करने का विचार आया।
पड़ोसी से मिली राह
संगीता ने माया देवी से साग-सब्जी उगाने के तौर-तरीके सीखे। माया देवी ने उन्हें सलाह दी कि अगर 3 बीघा जमीन में सखड़वा यानी बंडा की खेती की जाए तो अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। उनका तर्क था कि बहराइच तराई क्षेत्र है और यहां बंडा की पैदावार बेहतर होती है। इस सलाह पर अमल करते हुए संगीता ने सखड़वा की खेती शुरू कर दी।
सखड़वा ने बदल दी जिंदगी
संगीता बताती हैं कि पहले वे पूरी तरह धान और गेहूं पर ही निर्भर थीं, लेकिन इन फसलों से होने वाली आमदनी बेहद सीमित थी। सखड़वा की खेती अपनाने के बाद उनकी कमाई में बड़ा बदलाव आया। अब वे महज 6 महीने में ही 3 बीघा जमीन से लाखों रुपये का मुनाफा कमा लेती हैं।
लागत और मुनाफे का गणित
संगीता के मुताबिक बदलते समय के साथ बंडा (सखड़वा) की मांग भी बढ़ी है। अब इसका इस्तेमाल केवल साग-सब्जी के तौर पर ही नहीं, बल्कि दूसरी खाद्य सामग्री बनाने में भी होने लगा है। वे बताती हैं कि एक बीसवें हिस्से में ही लगभग 2 कुंटल तक पैदावार हो जाती है। इस लिहाज से 3 बीघा जमीन से 100 से 120 कुंटल तक उत्पादन हासिल हो जाता है।
संगीता का कहना है कि 3 बीघा में सखड़वा की खेती पर करीब 50 से 60 हजार रुपये तक की लागत आती है, जबकि मुनाफा लाखों रुपये तक पहुंच जाता है। मंडियों में बंडा की अच्छी मांग और बेहतर दाम मिलने की वजह से उनकी आमदनी अब स्थिर और मजबूत हो गई है।
छोटे किसानों के लिए संदेश
संगीता मानती हैं कि कम जमीन वाले किसान भी यदि सोच-समझकर योजना बनाकर सखड़वा की खेती करें तो वे आसानी से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूती दे सकते हैं।
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