यूपी 2027: मायावती ने साधा OBC, अखिलेश यादव ब्राह्मण नेताओं संग बैठक में जुटे उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 63
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जहां ब्राह्मण नेताओं के साथ बैठक बुलाई है, वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने पार्टी के ओबीसी नेताओं संग रणनीति पर मंथन किया है।

लखनऊः उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों ने अभी से जोर पकड़ लिया है और सियासी दलों ने अपनी-अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। एक तरफ बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने ओबीसी नेताओं के साथ बैठक की, तो दूसरी ओर सपा मुखिया अखिलेश यादव बुधवार को ब्राह्मण नेताओं के साथ चर्चा में जुटे हैं। दरअसल, वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अखिलेश यादव ने ब्राह्मण कार्ड खेला है और मिशन-2027 का खाका तैयार करने के लिए उन्होंने ब्राह्मण नेताओं की मीटिंग बुलाई है।

इस बैठक में मौजूदा और पूर्व विधायकों के साथ-साथ सांसदों और पूर्व सांसदों को भी आमंत्रित किया गया है। आने वाले चुनाव को देखते हुए इन नेताओं के साथ ब्राह्मण मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति पर विचार-विमर्श होगा। इसके अलावा पार्टी को संगठनात्मक रूप से मजबूत करने और ब्राह्मण समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर भी बातचीत की जाएगी। समाजवादी पार्टी की यह बैठक 2027 के चुनाव के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें पार्टी ब्राह्मण वोटरों को अपने साथ लाने की योजना बना सकती है।

सपा की ब्राह्मण वोटरों पर नजर

भाजपा से ब्राह्मण मतदाताओं की कथित नाराजगी की खबरें लंबे समय से चर्चा में रही हैं। इसी को देखते हुए समाजवादी पार्टी लगातार इन वोटरों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है और खुद को उनका सबसे बड़ा हितैषी साबित करना चाहती है। यही वजह है कि अखिलेश यादव ब्राह्मण नेताओं के साथ मंथन करने जा रहे हैं।

मायावती की ओबीसी वोटर्स पर नजर

उधर, बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने मंगलवार को पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का समर्थन जुटाने में जुट जाएं। बताया जा रहा है कि लखनऊ में ओबीसी नेताओं के साथ हुई बैठक में मायावती ने याद दिलाया कि किस तरह 2007 में ओबीसी के समर्थन से बसपा ने अपने दम पर सत्ता हासिल की थी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे 2027 के चुनाव में भी वैसा ही परिणाम दोहराने के लिए मेहनत करें।

100 सीटों पर ब्राह्मण वोटर्स का असर

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं की हिस्सेदारी 10-12 फीसदी है और राज्य की करीब 100 सीटों पर इनका सीधा प्रभाव माना जाता है। 12 जिलों में तो ब्राह्मण किसी भी उम्मीदवार की हार-जीत में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि सपा इस समुदाय को अपने साथ जोड़ना चाहती है। सपा प्रमुख अक्सर पीडीए के 'ए' को अगड़ी जातियों से भी जोड़कर परिभाषित करते हैं। इतना ही नहीं, शंकराचार्य विवाद में भी उन्होंने खुलकर समर्थन जताया था। पार्टी अब अपने पारंपरिक मुस्लिम-यादव समीकरण तक ही सीमित नहीं रहना चाहती। माना जा रहा है कि 2027 में भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए अगड़ी जातियों, खासकर ब्राह्मणों को साथ लाना सपा के लिए बेहद जरूरी हो गया है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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