उत्तराखंड
एक घंटा पहले
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विचारों
पवित्र सावन के महीने में उत्तराखंड की पावन नगरी ऋषिकेश इन दिनों शिवभक्तों और पर्यटकों की भारी भीड़ से सराबोर है। चारों तरफ गूंजते 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारों के बीच गंगा घाटों पर आस्था का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। सुबह की पहली किरण से लेकर देर रात तक बाजारों, सड़कों और प्रमुख स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही बनी हुई है। लेकिन इस पावन माहौल के बीच देवभूमि के इस मुख्य द्वार से एक ऐसी चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है, जिसने स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यावरण प्रेमियों को भी गहरी चिंता में डाल दिया है।
श्रद्धालुओं और पर्यटकों के सैलाब से गुलजार देवभूमि का प्रवेश द्वार
सावन के विशेष अवसर पर हर साल की तरह इस बार भी ऋषिकेश में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा हुआ है। कांवड़ यात्रा के चलते बड़ी संख्या में कांवड़िए और देश-विदेश से पर्यटक गंगा जल लेने और दर्शन करने यहां पहुंच रहे हैं। गंगा के विभिन्न घाटों पर सुबह से ही स्नान और पूजा-अर्चना के लिए तांता लगा रहता है। इस भारी भीड़ के चलते स्थानीय व्यापारियों के चेहरे खिले हुए हैं और बाजारों में अच्छी-खासी रौनक दिखाई दे रही है। शहर की सड़कें चौबीसों घंटे गुलजार हैं, लेकिन इस भारी मानवीय दबाव का असर अब शहर की बुनियादी व्यवस्थाओं, विशेषकर स्वच्छता पर दिखने लगा है।
धार्मिक पर्यटन की पहचान को ठेस पहुंचाता कचरे का ढेर
आस्था के इस सैलाब के बीच ऋषिकेश की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराती हुई नजर आ रही है। शहर के कई प्रमुख हिस्सों, सड़कों के किनारों, सार्वजनिक स्थानों और सबसे संवेदनशील माने जाने वाले गंगा घाटों के आसपास कचरे का अंबार लगा हुआ है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं द्वारा उपयोग की गईं प्लास्टिक की बोतलें, खाली डिब्बे, खाने-पीने के सामानों के रैपर और पॉलिथीन जगह-जगह बिखरी पड़ी हैं। गंगा नदी के किनारे फैले इस कचरे से न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि पवित्र नदी की मर्यादा और गरिमा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यदि इस गंदगी पर तुरंत लगाम नहीं कसी गई, तो वैश्विक स्तर पर ऋषिकेश की जो स्वच्छ और आध्यात्मिक छवि है, उसे गहरा धक्का लग सकता है।
बढ़ती भीड़ के साथ नाकाफी साबित हो रहे प्रशासनिक इंतजाम
गंदगी की इस गंभीर स्थिति को लेकर स्थानीय जनता में गहरा रोष व्याप्त है। लोकल 18 से विशेष बातचीत करते हुए क्षेत्र के स्थानीय निवासी नरेंद्र गिरी ने प्रशासन की लचर व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सावन के दौरान हर साल यहां लाखों की संख्या में भीड़ जुटती है, यह कोई नई बात नहीं है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कोई विशेष या अतिरिक्त पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। पुरानी ढर्रे पर चल रही सफाई प्रणाली इस भारी भीड़ का बोझ उठाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है।
स्थानीय नागरिक ने अपनी चिंता साझा करते हुए आगे कहा कि सुबह के समय कर्मचारी आते हैं और सफाई करके चले जाते हैं। लेकिन भीड़ इतनी अधिक है कि कुछ ही घंटों में सड़कों और घाटों पर दोबारा कचरे के बड़े-बड़े ढेर लग जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय लोग बाहर से आने वाले सभी श्रद्धालुओं और पर्यटकों का पूरे दिल से स्वागत करते हैं, लेकिन शहर को साफ-सुथरा रखना भी प्रशासन और सभी की साझी जिम्मेदारी है। वर्तमान में जो दृश्य देखने को मिल रहे हैं, वे बेहद विचलित करने वाले हैं।
सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए जरूरी कदम
इस विकट समस्या से निपटने और ऋषिकेश को स्वच्छ बनाए रखने के लिए स्थानीय लोगों ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिन पर प्रशासन को तत्काल अमल करने की आवश्यकता है:
- अतिरिक्त सफाई कर्मियों की तैनाती: केवल सामान्य दिनों की कार्यप्रणाली से काम नहीं चलेगा। सावन जैसे भीड़भाड़ वाले सीजन के दौरान सफाई कर्मचारियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की जानी चाहिए, जो चौबीसों घंटे अलग-अलग शिफ्टों में काम कर सकें।
- पर्याप्त डस्टबिन की उपलब्धता: सभी प्रमुख रास्तों, बाजारों और गंगा घाटों के आसपास थोड़ी-थोड़ी दूरी पर बड़े डस्टबिन लगाए जाने चाहिए ताकि लोगों को कचरा सड़क पर न फेंकना पड़े।
- जन जागरूकता अभियान: केवल नियमों और कर्मचारियों के भरोसे सफाई नहीं हो सकती। आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को लाउडस्पीकर और पोस्टरों के माध्यम से जागरूक किया जाना जरूरी है कि वे कचरा नियत स्थान पर ही डालें।
- त्वरित कचरा उठान प्रणाली: कूड़ेदानों के भरने का इंतजार किए बिना, उन्हें समय-समय पर तुरंत खाली करने के लिए वाहनों की गश्त बढ़ाई जानी चाहिए।
ऋषिकेश में सावन के इस पावन पर्व पर भीड़ के भारी दबाव के कारण न केवल सफाई व्यवस्था बल्कि यातायात और अन्य नागरिक सुविधाओं पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ा है। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि वह आपदा प्रबंधन की तर्ज पर अतिरिक्त संसाधन जुटाए और इस पावन तीर्थ क्षेत्र की शुचिता को बनाए रखने के लिए युद्ध स्तर पर काम करे।
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