किम जोंग उन का क्या वाकई कोई बड़ा बेटा है, साउथ कोरिया की खुफिया रिपोर्ट ने छेड़ी नई बहस विश्व 5 घंटे पहले 3
साउथ कोरिया की खुफिया एजेंसी ने दावा किया है कि उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन अपनी 13 साल की बेटी किम जू ए को उत्तराधिकारी बनाने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि परिवार के अन्य बच्चों की पहचान अभी भी एक पहेली बनी हुई है।

उत्तर कोरिया के सत्ता गलियारों में मचा है मंथन

उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन का परिवार हमेशा से दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों और विश्लेषकों के लिए चर्चा का केंद्र रहा है। इस रहस्यमयी परिवार के बारे में अब साउथ कोरिया की नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस यानी एनआईएस ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, किम जोंग उन अपनी 13 साल की बेटी किम जू ए को अपना उत्तराधिकारी बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। हालांकि, इस दावे के साथ ही किम के परिवार से जुड़ी एक और अनसुलझी पहेली सामने आई है कि क्या तानाशाह का कोई बड़ा बेटा भी है, जिसे दुनिया से छिपाकर रखा गया है।

उत्तराधिकारी की रेस में सबसे आगे किम जू ए

एनआईएस की ताजा खुफिया जानकारी यह स्पष्ट करती है कि किम जोंग उन अपनी बेटी किम जू ए को भविष्य के नेता के तौर पर तैयार कर रहे हैं। किम जू ए को बीते कुछ समय से अपने पिता के साथ कई महत्वपूर्ण सैन्य आयोजनों और मिसाइल परीक्षणों के दौरान खुलेआम देखा गया है। जिस तरह से उसे अंतरराष्ट्रीय दौरों पर ले जाया जा रहा है, उससे यह संकेत मिलता है कि उत्तर कोरियाई शासन में उसे काफी महत्व दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह 2011 में किम जोंग इल के निधन के बाद किम जोंग उन ने सत्ता संभाली थी, उसी तर्ज पर अब जू ए की ताजपोशी की पटकथा लिखी जा रही है।

सीक्रेट बेटे की मौजूदगी पर बना सस्पेंस

इस पूरी कवायद के बीच एनआईएस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किम जोंग उन का कोई बड़ा बेटा है? खुफिया एजेंसी के अधिकारी इस संभावना की बारीकी से जांच कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर किम का कोई बड़ा बेटा मौजूद भी है, तो भी उसे सत्ता मिलने की संभावना न के बराबर है। एजेंसी का स्पष्ट रुख है कि भविष्य का नेतृत्व किम जू ए के हाथों में ही रहने वाला है। इसके अलावा, एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि किम की एक और संतान है, जो छोटा भाई या बहन हो सकता है। हालांकि, उस बच्चे के लिंग या पहचान के बारे में अब तक कोई भी पुख्ता जानकारी सामने नहीं आ पाई है।

पब्लिक इमेज बिल्डिंग का सरकारी अभियान

किम जोंग उन अपनी बेटी को एक ऐसे लीडर के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं जिसे जनता का समर्थन प्राप्त हो। नवंबर 2022 में जब जू ए पहली बार एक आईसीबीएम मिसाइल टेस्ट के दौरान अपने पिता के साथ सार्वजनिक रूप से दिखाई दी थी, तब से उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा है। वह न केवल राजनीतिक बैठकों में हिस्सा ले रही है, बल्कि चीन की राजधानी बीजिंग जैसे शहरों के उच्च-स्तरीय दौरों में भी शामिल रही है। उत्तर कोरिया का सरकारी मीडिया अब उसे 'प्रिय बच्ची' और 'महान मार्गदर्शक' जैसे विशेष संबोधन दे रहा है। ये उपाधियां आमतौर पर देश के सर्वोच्च नेताओं के लिए आरक्षित होती हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जू ए का कद प्रशासन में कितना बड़ा कर दिया गया है।

महिला लीडर को स्वीकार करना क्या चुनौती होगी?

उत्तर कोरिया की राजनीति 'पैक्टू ब्लडलाइन' के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां नेता को एक देवतुल्य हस्ती के रूप में देखा जाता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या देश के कट्टरपंथी वरिष्ठ अधिकारी एक महिला नेता को स्वीकार कर पाएंगे? विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता हस्तांतरण का यह रास्ता उतना सरल नहीं होगा। कई विशेषज्ञों को इस बात की चिंता है कि यदि जू ए का विवाह किसी बाहरी व्यक्ति से होता है, तो सत्ता की बागडोर किसी दूसरे परिवार के हाथ में जा सकती है। यही कारण है कि किम जोंग उन हर कदम बहुत सोच-समझकर उठा रहे हैं और जनता के बीच बेटी की छवि को मजबूती से स्थापित कर रहे हैं।

गोपनीयता की दीवार कब ढहेगी?

उत्तर कोरिया अपनी निजी पारिवारिक जानकारियों को दुनिया से छिपाने के लिए कुख्यात है। एनआईएस की रिपोर्ट भले ही किम परिवार के बारे में नई अंतर्दृष्टि प्रदान करती हो, लेकिन सच्चाई अभी भी एक रहस्य के पर्दे में लिपटी हुई है। तानाशाह के कुल कितने बच्चे हैं और उनका जन्मक्रम क्या है, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है। फिर भी, सरकारी प्रोटोकॉल और जू ए को मिल रही अहमियत यह बताने के लिए पर्याप्त है कि किम जोंग उन ने अपनी विरासत सौंपने का मन बना लिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या खुफिया एजेंसी बड़े बेटे या अन्य बच्चों के बारे में कोई ठोस साक्ष्य पेश कर पाती है, या फिर यह परिवार इसी तरह दुनिया के लिए एक पहेली बना रहेगा।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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