हिमाचल प्रदेश: 26 साल बाद शिमला जिला परिषद में भाजपा का परचम, तीन मंत्रियों के प्रभाव वाले जिले में कांग्रेस को करारी मात भारत एक घंटा पहले 6
शिमला जिला परिषद के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए सत्ताधारी कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है। राज्य के 12 में से 11 जिला परिषदों पर अब भाजपा का नियंत्रण हो गया है।

शिमला में कांग्रेस का किला ढहा

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर भारतीय जनता पार्टी ने अपना कब्जा जमा लिया है। यह जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि बीते 26 सालों तक इस पद पर भाजपा काबिज नहीं हो पाई थी। दिलचस्प बात यह है कि शिमला जिले में राज्य सरकार के तीन मंत्री होने के बावजूद कांग्रेस अपनी साख बचाने में नाकाम रही। इस जीत के साथ ही जिला शिमला की सत्ता का समीकरण बदल गया है।

कौन बना अध्यक्ष और उपाध्यक्ष

चौपाल विधानसभा क्षेत्र के निवासी भूपेंद्र सिंह सिसोदिया ने जिला परिषद अध्यक्ष पद का चुनाव जीता है। वे भाजपा समर्थित उम्मीदवार थे। वहीं, जुब्बल कोटखाई के टिककर वॉर्ड से जीत हासिल करने वाले निर्दलीय सदस्य भरत सिंह कलांटा को उपाध्यक्ष के रूप में चुना गया है। चुनाव परिणाम आने के बाद उपायुक्त कार्यालय शिमला के बाहर भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जोरदार जश्न मनाया। इस विजय के मौके पर भाजपा के राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन और सिकंदर कुमार के साथ ही विधायक बलबीर वर्मा भी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

चुनाव में भाजपा की रणनीति और आंकड़े

शिमला जिला परिषद के कुल 25 सदस्यों वाले सदन में अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला काफी कड़ा रहा। भाजपा समर्थित उम्मीदवार भूपेंद्र सिसोदिया को जीत के लिए 13 वोट हासिल हुए। उनके मुकाबले में खड़े कांग्रेस के प्रत्याशी सुरेंद्र रेटका को 10 वोट मिले, जबकि इस प्रक्रिया में 2 वोट को अमान्य घोषित कर दिया गया। उपाध्यक्ष पद पर भी भाजपा समर्थित निर्दलीय सदस्य भरत सिंह कलांटा ने बाजी मारी। उन्हें उपाध्यक्ष बनने के लिए 14 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की ओर से प्रत्याशी मीनाक्षी को केवल 10 वोट प्राप्त हुए और 1 वोट को अमान्य माना गया।

भाजपा का दावा: कांग्रेस की विदाई तय

राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने जीत के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि यह लंबा इंतजार था, जिसके बाद पार्टी को यह सफलता मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की सरकार लगातार चुनाव टालने की कोशिश कर रही थी और इस मामले को सुलझाने के लिए भाजपा प्रत्याशियों को अदालत का दरवाजा तक खटखटाना पड़ा था। हर्ष महाजन ने दावा किया कि प्रदेश की कुल 12 जिला परिषदों में से अब 11 पर भाजपा का नियंत्रण है। उन्होंने इसे आने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस की विदाई का स्पष्ट संकेत बताया। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने जनता और पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार जताते हुए विकास कार्यों को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया है।

सदस्यों का गणित और राजनीतिक महत्व

शिमला जिला परिषद के कुल 25 सदस्यों के चुनाव के दौरान भाजपा समर्थित 11 और कांग्रेस समर्थित 10 प्रत्याशी जीतकर सामने आए थे, जबकि 4 निर्दलीय सदस्य थे। इन परिणामों के करीब 3 महीने 10 दिन बाद हुई अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की चयन प्रक्रिया ने कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। राज्य सरकार में तीन मंत्रियों की उपस्थिति के बाद भी कांग्रेस का अपने ही गृह क्षेत्र में इस तरह पिछड़ जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। अब हिमाचल प्रदेश की 12 में से 11 जिला परिषदों पर भाजपा का दबदबा स्थापित हो गया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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