जीवनशैली
एक घंटा पहले
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विचारों
क्रोनिक गिल्ट क्या है
आज के दौर में कई लोग ऐसी मानसिक स्थिति से गुजर रहे हैं जहां वे बिना किसी ठोस गलती के भी खुद को अपराधी मानने लगते हैं। मनोविज्ञान में इसे क्रोनिक गिल्ट कहा जाता है। इसमें व्यक्ति हर छोटी-बड़ी बात के लिए खुद को दोषी ठहराता है और लगातार यह महसूस करता है कि वह दूसरों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है।
डिप्रेशन की ओर बढ़ता रास्ता
लगातार तनाव या क्रोनिक गिल्ट की स्थिति शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ा देती है। कोर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर मस्तिष्क में सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे खुशी देने वाले रसायनों के उत्पादन को प्रभावित करता है। इसके अलावा, लंबे समय तक तनाव से मस्तिष्क का हिप्पोकैम्पस हिस्सा सिकुड़ सकता है, जो भावनाओं और याददाश्त को नियंत्रित करता है। यही कारण है कि यह स्थिति आगे चलकर गंभीर डिप्रेशन का रूप ले सकती है।
क्रोनिक गिल्ट के 4 प्रमुख लक्षण
- बिना वजह सॉरी कहना: सामने वाले को खुश रखने की कोशिश में हर बात पर माफी मांगना।
- ना न कह पाना: किसी को मना करने में घबराहट होना और मना करने के बाद खुद को दोषी महसूस करना।
- खुद की खुशी में अपराधबोध: आराम करते समय या अपने लिए समय निकालते समय समय बर्बाद करने का डर लगना।
- दूसरों के मूड की जिम्मेदारी: घर या ऑफिस में किसी के गुस्से या नाराजगी के लिए खुद को जिम्मेदार मान लेना।
इस मानसिक जाल से बाहर कैसे निकलें
इस समस्या से उबरने के लिए आपको अपनी सोच के दायरे को बदलना होगा:
- तथ्यों पर गौर करें: जब भी अपराधबोध महसूस हो, तो खुद से पूछें कि क्या वास्तव में उस स्थिति के लिए आप जिम्मेदार हैं।
- मना करना सीखें: दूसरों को खुश रखने के चक्कर में खुद की मानसिक शांति को दांव पर न लगाएं। अपनी सीमाएं तय करना स्वार्थ नहीं, बल्कि सेल्फ-केयर है।
- खुद को माफ करना जरूरी: अतीत की गलतियों को पकड़े रहने के बजाय उनसे सीखें और आगे बढ़ें। आप भी एक इंसान हैं और गलतियां होना सामान्य है।
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