सीतामढ़ी का कमाल: प्लास्टिक कचरे से बन रहे मजबूत बेंच, PM मोदी भी कर चुके हैं तारीफ बिहार 2 घंटे पहले 4
बिहार के सीतामढ़ी जिले ने सिंगल यूज प्लास्टिक को रिसाइकिल कर टिकाऊ फर्नीचर बनाने की अनूठी पहल की है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सराहा है।

पर्यावरण संरक्षण की नई दिशा

बिहार का सीतामढ़ी जिला इन दिनों अपशिष्ट प्रबंधन यानी वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में पूरे देश के लिए एक नजीर बनकर उभरा है। यहाँ जिला प्रशासन ने सिंगल यूज प्लास्टिक जैसी गंभीर पर्यावरणीय समस्या को एक अवसर में बदल दिया है। प्लास्टिक के कचरे को न केवल ठिकाने लगाया जा रहा है, बल्कि उसे रिसाइकिल करके बेहद मजबूत और टिकाऊ सीटिंग बेंच तैयार की जा रही हैं। इस अभिनव प्रयास की चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुँच चुकी है, जिन्होंने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात के जरिए इस पहल की जमकर तारीफ की थी। सीतामढ़ी का यह मॉडल अब राज्य के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ स्वच्छता और रोजगार के नए रास्ते खोल रहा है।

इस नवाचार की शुरुआत और प्रशासनिक पहल

प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक निपटान की यह यात्रा जिले के बाजपट्टी प्रखंड में स्थित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट के साथ शुरू हुई। उप विकास आयुक्त श्वेता भारती ने बताया कि जनवरी 2024 में जब जिले में कचरा संग्रहण का अभियान जोर-शोर से चल रहा था, तब सिंगल यूज प्लास्टिक का निस्तारण प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा था। इस चुनौती से पार पाने के लिए जिलाधिकारी रिची पांडेय के मार्गदर्शन में प्रशासन ने एक ठोस कार्ययोजना तैयार की। इसके तहत 19 फरवरी 2024 को बक्सर की राइन इंडस्ट्रीज के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर किए गए। इस योजना के क्रियान्वयन हेतु लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के अंतर्गत बाजपट्टी के साथ-साथ रुन्नीसैदपुर, डुमरा और रीगा प्रखंडों में प्लास्टिक प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित की गईं। इनमें से बाजपट्टी की यूनिट ने सफलतापूर्वक उत्पादन कार्य शुरू कर दिया है।

तकनीक और मजबूती का संगम

प्लास्टिक रिसाइकिलिंग की पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक और पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल बनाया गया है। एक अकेली सीटिंग बेंच के निर्माण में करीब 40 किलोग्राम सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है। जिला प्रशासन ने इस प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण में कंपनी को लगभग 3.5 टन प्लास्टिक कचरा उपलब्ध करवाया था। इसके परिणामस्वरूप अप्रैल 2024 में 85 शानदार सीटिंग बेंच बनकर तैयार हुईं। ये बेंच न केवल देखने में आधुनिक और आकर्षक हैं, बल्कि इनकी मजबूती और स्थायित्व भी बेजोड़ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक से बनी बेंचें बिना किसी नुकसान के 25 से 30 वर्षों तक आराम से उपयोग की जा सकती हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि पारंपरिक लकड़ी या लोहे के फर्नीचर की तुलना में इस तकनीक से बनी एक बेंच पर करीब दो हजार रुपये की बचत भी हो रही है।

कचरे से आय और जनभागीदारी

तैयार की गई इन बेंचों को अब सीतामढ़ी की विभिन्न पंचायतों में स्थापित किया जा रहा है। जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देशों के बाद, इन्हें पंचायत सरकार भवन, सामुदायिक केंद्रों, सरकारी स्कूलों, सार्वजनिक पार्कों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर लगाया जा रहा है। इससे एक ओर जहाँ लोगों को बैठने की सुविधा मिल रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय आबादी में रिड्यूस, रियूज और रिसाइकिल यानी 3Rs के महत्व को लेकर जागरूकता भी बढ़ रही है। बाजपट्टी यूनिट के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले भर से एकत्र किए गए कुल 11 हजार किलोग्राम प्लास्टिक में से 4 हजार किलोग्राम कचरे का सफल पुनर्चक्रण किया जा चुका है। यह स्वच्छता अभियान को तो मजबूती दे ही रहा है, साथ ही साथ कचरे को आय के एक नए और टिकाऊ स्रोत में भी बदल रहा है।

विस्तार की योजना

राष्ट्रीय नियोजन कार्यक्रम के निदेशक शशिकांत शर्मा ने इस मॉडल के भविष्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि फिलहाल जिले की पंचायतों और नगर निकायों के माध्यम से हर दिन 500 से 600 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा इकट्ठा किया जा रहा है। बाजपट्टी की सफलता के बाद अब अगले महीने से रुन्नीसैदपुर यूनिट में भी प्लास्टिक बेंचों का उत्पादन शुरू हो जाएगा। जिला प्रशासन इस पूरे मॉडल के विस्तार की रणनीति पर काम कर रहा है। सिंगल यूज प्लास्टिक प्रबंधन के मामले में राज्य में दूसरा स्थान हासिल कर सीतामढ़ी ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही दिशा में योजना बनाई जाए, आधुनिक तकनीक का उपयोग हो और इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो कचरे जैसी बेकार वस्तु को भी एक मूल्यवान संसाधन में बदला जा सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप