जीवनशैली
4 घंटे पहले
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विचारों
लव मैरेज में जो प्यार की नींव शादी से पहले रखी जाती है, उसे लंबे समय तक टिकाए रखने के लिए एक-दूसरे के प्रति सम्मान और दूसरे की कमियों को स्वीकार करने की भावना ही सबसे मजबूत सीमेंट का काम करती है. ज्यादातर जोड़े यह मानकर चलते हैं कि "हम तो एक-दूसरे को सालों से जानते हैं, फिर हमारे बीच कोई परेशानी कैसे आ सकती है?" लेकिन हकीकत इससे अलग है. डेटिंग के दौर की दुनिया और शादी के बाद की व्यावहारिक जिंदगी में जमीन-आसमान का फर्क होता है.
रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि शादी की असली परीक्षा उसी समय शुरू होती है, जब शुरुआती आकर्षण धीरे-धीरे कम होने लगता है. जब तक हम पार्टनर की खामियों को अपनाना नहीं सीखते, तब तक वैवाहिक जीवन में स्थिरता आना मुश्किल होता है.
जब विशेषज्ञ कहते हैं कि परफेक्ट होना जरूरी नहीं
मशहूर मैरेज काउंसलर डॉ. जॉन गॉटमैन के मुताबिक, एक कामयाब शादी इस बात पर निर्भर नहीं करती कि दोनों साथी कितने परफेक्ट हैं, बल्कि यह इस बात पर टिकी होती है कि वे एक-दूसरे के मतभेदों और कमियों को कितनी खूबसूरती और सम्मान के साथ अपनाते हैं.
एक सफल शादी इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आप दोनों कितने परफेक्ट हैं, बल्कि इस बात पर टिकी होती है कि आप एक-दूसरे के मतभेदों और कमियों को कितनी खूबसूरती और सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं.
यही वजह है कि लव मैरेज के बाद कुछ असली चुनौतियां सामने आती हैं, जहां केवल प्यार ही नहीं, बल्कि मैच्योरिटी की भी सबसे ज्यादा जरूरत महसूस होती है.
'परफेक्ट पार्टनर' की इमेज का टूटना
डेटिंग के दौरान हम हमेशा अपना सबसे अच्छा व्यवहार यानी बेस्ट वर्जन सामने रखते हैं. लेकिन शादी के बाद जब दोनों 24 घंटे एक साथ रहने लगते हैं, तो पार्टनर का वह रूप भी सामने आता है, जो शायद उतना ग्लैमराइज़्ड नहीं होता.
इसका असर क्या पड़ता है
धीरे-धीरे साथी की छोटी-मोटी कमियां सामने आने लगती हैं—जैसे गुस्सा करने का तरीका, आलस, चीजों को बिखेर कर रखना, या तनाव को ठीक से संभाल न पाना. ऐसे हालात में मन में यह भावना घर करने लगती है कि "यह तो वैसा नहीं है, जिससे मैंने प्यार किया था." असल में यहीं पर रिश्ते की सबसे बड़ी परीक्षा होती है—कि हम साथी की कमियों को कितनी सहजता और समझदारी के साथ अपना पाते हैं.
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