भीषण गर्मी में सेहत का रखें ख्याल, इन मिठाइयों से दूरी बनाना ही है समझदारी जीवनशैली 2 महीने पहले 83
गर्मी के मौसम में दूध और खोए से बनी मिठाइयां बहुत जल्दी खराब हो जाती हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। सेहत को सुरक्षित रखने के लिए आपको किन मिठाइयों से परहेज करना चाहिए और क्या सावधानियां बरतनी चाहिए, जानिए यहां।

गर्मी में मिठाइयों के सेवन में सावधानी क्यों जरूरी है

गर्मी का मौसम अपने साथ कई चुनौतियां लेकर आता है। इस दौरान न केवल हमें अपनी शारीरिक गतिविधियों में बदलाव करने की जरूरत होती है, बल्कि खानपान को लेकर भी बेहद सतर्क रहना पड़ता है। उत्तर भारत में इन दिनों तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जिसका असर हमारे द्वारा खाई जाने वाली चीजों पर भी पड़ता है। विशेष रूप से दूध, खोया, मलाई और छेना से तैयार की गई मिठाइयां बहुत जल्दी खराब होने लगती हैं। यदि ये चीजें सही तापमान पर नहीं रखी जाती हैं, तो इनमें खतरनाक बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं, जो फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त और पेट के गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि गर्मी के दिनों में बासी या लंबे समय से खुली रखी मिठाइयों का सेवन कतई नहीं करना चाहिए।

इन 10 मिठाइयों से बरतें विशेष परहेज

गर्मी के मौसम में कुछ खास मिठाइयां ऐसी हैं, जिनमें संक्रमण का जोखिम सबसे ज्यादा रहता है। यदि आप भी बाजार से मिठाई खरीदने जा रहे हैं, तो इन नामों को ध्यान में रखें:

  • रसगुल्ला: अगर रसगुल्ला फ्रिज में न रखा गया हो और इसे बाहर रखा जाए, तो चाशनी में बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जो सेहत बिगाड़ सकते हैं।
  • गुलाब जामुन: खोया और चाशनी का मेल होने के कारण यह गर्मी में बहुत जल्दी खराब होता है। सड़क किनारे मिलने वाले गुलाब जामुन खाने से बचना चाहिए।
  • मिल्क केक: यह दूध और खोए से बनती है और गर्मी में खराब होने वाली सबसे प्रमुख मिठाइयों में से एक है।
  • कलाकंद: इसमें नमी बहुत ज्यादा होती है, जिस कारण इसमें बैक्टीरिया बहुत जल्दी सक्रिय हो जाते हैं।
  • रबड़ी: दूध का गाढ़ा मिश्रण होने के कारण रबड़ी में फूड पॉइजनिंग की संभावना सबसे अधिक बनी रहती है।
  • मलाई चॉप और चमचम: छेना और दूध से बनी इन मिठाइयों की शेल्फ लाइफ गर्मी में बहुत ही कम हो जाती है।
  • पेड़ा: मथुरा, बनारस या बिहार में मिलने वाले पेड़े स्वादिष्ट होते हैं, लेकिन खुले में रखे होने पर ये जल्दी संक्रमित हो सकते हैं।
  • खोया बर्फी: काजू बर्फी फिर भी कुछ हद तक सुरक्षित मानी जा सकती है, लेकिन खोया बर्फी, दूध वाली बर्फी और नारियल-दूध बर्फी जल्दी खराब हो जाती हैं।
  • छेना आधारित मिठाइयां: राजभोग, संदेश और छेना टोस्ट जैसी चीजें हमेशा ठंडी जगह पर रखी होनी चाहिए।
  • मावा लड्डू: दूध या मावे से बने लड्डू गर्मी के मौसम में लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रहते हैं।

क्यों खतरनाक है इन इलाकों में स्थिति

उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में मई और जून के महीनों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार चला जाता है। ऐसे में मिठाइयों की दुकानों पर अगर सही कूलिंग सिस्टम या रेफ्रिजरेशन की सुविधा नहीं है, तो मिठाइयों में फफूंद लगना और बैक्टीरिया का पनपना तय है। यही कारण है कि गर्मी के सीजन में अस्पतालों में पेट से संबंधित बीमारियों के मामलों में अचानक उछाल देखने को मिलता है।

किन लोगों को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है

कुछ वर्ग ऐसे हैं जिन्हें खराब खानपान से सबसे अधिक खतरा हो सकता है:

  • छोटे बच्चे
  • बुजुर्ग
  • गर्भवती महिलाएं
  • डायबिटीज से पीड़ित मरीज
  • जिनकी इम्युनिटी काफी कमजोर है

इन लोगों के लिए संक्रमण का असर काफी गंभीर हो सकता है, इसलिए इन्हें बाहर की मिठाइयों के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए।

गर्मी में कौन सी मिठाइयां सुरक्षित हैं

अगर आपको मीठा खाने का मन है, तो आप सुरक्षित विकल्पों का चुनाव कर सकते हैं। बेसन के लड्डू, सूखे मेवे के लड्डू, तिल के लड्डू, गुड़ और ड्राई फ्रूट से बनी मिठाइयां अधिक टिकाऊ होती हैं। इसके अलावा, अच्छी तरह से सील पैक की गई ब्रांडेड मिठाइयां भी सुरक्षित हो सकती हैं, लेकिन खरीदने से पहले उनकी एक्सपायरी डेट को जांचना बेहद आवश्यक है।

मिठाई खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

बाजार से मिठाई लाते समय अपनी सुरक्षा के लिए निम्नलिखित बातों को गंभीरता से अपनाएं:

  • मिठाई हमेशा उसी दुकान से लें जहां रेफ्रिजरेशन की उचित व्यवस्था हो।
  • कभी भी सड़क किनारे या खुली जगह पर रखी मिठाई न खरीदें।
  • पैक्ड मिठाई खरीदते समय निर्माण और एक्सपायरी डेट जरूर चेक करें।
  • घर लाते ही दूध और खोए से बनी मिठाइयों को फ्रिज में रखें।
  • यदि मिठाई का स्वाद असामान्य लगे, रंग बदला हुआ दिखे या उसमें खट्टी गंध महसूस हो, तो उसे तुरंत हटा दें और न खाएं।
देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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