जीवनशैली
3 घंटे पहले
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विचारों
पारंपरिक स्वाद की विरासत
बघेलखंड क्षेत्र का खान-पान अपनी सादगी और शुद्ध देसी स्वाद के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहाँ के रसोईघरों में कई ऐसे पकवान पीढ़ियों से बनते आ रहे हैं, जो कम सामग्री का उपयोग करते हुए भी स्वाद का अद्भुत अनुभव कराते हैं। इन्हीं खास व्यंजनों में से एक है मूंग दाल का भिजौरा। इसे कई क्षेत्रों में पानी वाले मुगौड़े के नाम से भी जाना जाता है। इस व्यंजन की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनोखा स्वाद और बनाने की सरल विधि है। अंजलि चतुर्वेदी, जो कि एक स्थानीय निवासी हैं, का कहना है कि यह व्यंजन किसी भी खास मौके या सामान्य नाश्ते के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित होता है। इसे आप सुबह के नाश्ते, दोपहर के भोजन के साथ एक साइड डिश के रूप में या फिर शाम को गरमा-गरम चाय के साथ आनंद ले सकते हैं।
दाल तैयार करने की प्रक्रिया
भिजौरा बनाने के सफर की शुरुआत मूंग दाल को तैयार करने से होती है। सबसे पहले आपको अच्छी गुणवत्ता वाली मूंग दाल लेनी होगी। दाल को अच्छे से साफ करें और उसे पानी में कम से कम तीन से चार घंटे के लिए भिगोकर रख दें। जब दाल पूरी तरह से फूल जाए और अपने आकार में थोड़ी बड़ी हो जाए, तो अतिरिक्त पानी को पूरी तरह छान लें। अब इस भीगी हुई दाल को मिक्सर ग्राइंडर में डालें। यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि आपको इसे बिल्कुल बारीक पेस्ट के रूप में नहीं पीसना है। दाल को थोड़ा दरदरा रखें, ताकि जब भिजौरा बनकर तैयार हो, तो उसमें दाल का अपना एक अलग टेक्सचर और कुरकुरापन बना रहे।
मसालों का अनूठा मिश्रण
जब दाल का पेस्ट तैयार हो जाए, तो उसे एक बड़े बर्तन या परात में निकाल लें। अब इसमें स्वाद के अनुसार लाल मिर्च पाउडर, नमक, थोड़ी सी हींग, धनिया पाउडर और बारीक घिसा हुआ अदरक मिलाएं। इसके साथ ही ताजी कटी हुई हरी धनिया की पत्तियां भी डालें, जिससे भिजौरे में खुशबू और स्वाद का संतुलन बना रहे। सभी मसालों को दाल के साथ अच्छी तरह मिला लें ताकि मिश्रण के हर हिस्से में स्वाद बराबर पहुंच जाए। इस मिश्रण को तैयार करने के बाद तुरंत तलने के बजाय इसे 15 से 20 मिनट के लिए अलग रख देना चाहिए।
स्पंजी बनावट का रहस्य
पेस्ट को 15 से 20 मिनट के लिए रखने के पीछे एक वैज्ञानिक कारण है। इस दौरान मिश्रण थोड़ा हवा ले लेता है और स्पंजी हो जाता है, जिससे तलने के बाद भिजौरा अंदर से एकदम नरम और बाहर से कुरकुरा बनता है। समय पूरा होने के बाद मिश्रण को एक बार फिर हल्के हाथों से मिला लें। याद रखें कि पेस्ट की सघनता का ध्यान रखना आवश्यक है। यदि पेस्ट बहुत अधिक पतला हो गया तो उसे आकार देने में दिक्कत होगी, और यदि बहुत सख्त रहा तो भिजौरा कड़ा बन सकता है।
तलने की सही विधि
अब एक कड़ाही में तेल गरम करें। ध्यान रखें कि तेल को बहुत ज्यादा तेज आंच पर गरम नहीं करना है, बल्कि मध्यम आंच पर ही रखें। हाथ में थोड़ी मात्रा में मिश्रण लें और इसे बड़े आकार की मुगौड़ी का रूप दें। आप इसे अपनी पसंद के अनुसार गोल या थोड़ा चपटा आकार दे सकते हैं। अब इन्हें सावधानी से गरम तेल में डालें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन्हें धीमी आंच पर ही तला जाए। तेज आंच पर तलने से भिजौरा बाहर से तो जल सकता है लेकिन अंदर से कच्चा रहने का डर रहता है। धीरे-धीरे तलने से यह अंदर तक पकता है और इसकी बाहरी सतह अच्छी तरह कुरकुरी हो जाती है। जब ये सुनहरे भूरे रंग के हो जाएं, तो इन्हें कड़ाही से निकाल लें।
पानी में डुबोने का जादू
भिजौरा तैयार करने का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण नमक वाले पानी में भिगोना है। जब भिजौरे कड़ाही में तल रहे हों, उसी समय एक अलग बर्तन में साधारण पानी लें और उसमें स्वादानुसार नमक मिला लें। कड़ाही से निकले हुए गरमा-गरम भिजौरों को सीधे इस नमक वाले पानी में डालते जाएं। उन्हें पानी में कुछ समय के लिए छोड़ दें। धीरे-धीरे भिजौरा पानी सोखना शुरू कर देगा। जैसे-जैसे यह पानी को अवशोषित करेगा, उसका स्वाद दोगुना हो जाएगा और वह भीतर से पूरी तरह नरम हो जाएगा।
परोसने का तरीका
जब भिजौरे ने पर्याप्त पानी सोख लिया हो, तो आपका बघेलखंडी स्टाइल का भिजौरा परोसने के लिए तैयार है। इसे आप तीखी हरी चटनी या पुदीने की चटनी के साथ गरमा-गरम परोसें। यह नाश्ते की मेज पर सभी को पसंद आएगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि आप इसे दाल-चावल के साथ एक अतिरिक्त व्यंजन के रूप में भी रख सकते हैं। शाम की चाय के साथ यह एक बेहद संतोषजनक स्नैक बनता है। इसे बनाना न केवल आसान है बल्कि यह आपकी रसोई में एक नए और देसी स्वाद को शामिल करने का अच्छा अवसर भी है।
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