होर्मुज जलडमरूमध्य पर डोनाल्ड ट्रंप के दावे गलत, तेल सप्लाई के आंकड़ों ने खोली पोल विश्व एक घंटा पहले 8
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण और तेल आपूर्ति को लेकर किए गए दावों पर सवाल उठ रहे हैं। स्वतंत्र विशेषज्ञों और तेल टैंकरों की निगरानी करने वाली कंपनियों के आंकड़े व्हाइट हाउस के दावों के विपरीत एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहे हैं।

होर्मुज को लेकर छिड़ी है जुबानी जंग

होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार सार्वजनिक रूप से दावा कर रहे हैं कि होर्मुज पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण कायम है और वहां से तेल की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी है। दूसरी ओर, ईरान भी इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपना दबदबा होने की बात लगातार दोहरा रहा है। हालांकि, अब तेल आपूर्ति को लेकर सामने आए ताजा आंकड़ों ने डोनाल्ड ट्रंप के दावों की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

दावों और हकीकत में भारी अंतर

अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने हाल ही में दावा किया था कि होर्मुज के रास्ते प्रतिदिन करीब 90 लाख बैरल तेल का परिवहन हो रहा है। लेकिन तेल टैंकरों की गतिविधियों पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा जुटाए गए आंकड़े इस दावे को सिरे से खारिज कर रहे हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक, इस मार्ग से गुजरने वाले तेल की मात्रा मात्र 50 लाख बैरल प्रतिदिन है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस मार्ग से अधिकतम 70 लाख बैरल तेल निकलना ही संभव है, जिसके आगे के दावे को धरातल पर साबित करना मुश्किल है।

व्हाइट हाउस का रुख

सोमवार को व्हाइट हाउस में एक संबोधन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने फिर दोहराया कि होर्मुज पूरी तरह खुला हुआ है और अमेरिका का उस पर कड़ा नियंत्रण है। उन्होंने कहा कि वहां से हर हफ्ते लाखों बैरल तेल निकाला जा रहा है और तेल की कीमतें भी नीचे जा रही हैं। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा कि यदि अमेरिका कोई बड़ा कड़ा कदम नहीं उठाता है, तो कीमतों में गिरावट का यह दौर आगे भी जारी रहेगा। हालांकि, तेल बाजार के अनुभवी विश्लेषक इन सरकारी दावों को स्वीकार करने में हिचकिचा रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय

तेल टैंकरों की गतिविधियों को ट्रैक करने वाली प्रमुख कंपनी केप्लर के विशेषज्ञ मैट स्मिथ ने पोलिटिको की रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि 90 लाख बैरल का सरकारी आंकड़ा वास्तविक धरातल से बिल्कुल मेल नहीं खाता। मैट स्मिथ के अनुसार, यह संख्या किसी ठोस आधार या डेटा के बिना दी गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस समय होर्मुज में ईरान का प्रभाव सबसे अधिक है। जो भी टैंकर उस रास्ते से गुजर रहे हैं, उनमें से ज्यादातर ईरान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों से होकर निकल रहे हैं, जिससे अमेरिका के दावों को कमजोर माना जा रहा है।

अमेरिका का बचाव और गुप्त डेटा का तर्क

जब इन दावों पर सवाल उठे, तो अमेरिका ने तर्क दिया कि उसके पास वे आंकड़े हैं जो निजी कंपनियां नहीं देख पा रही हैं। क्रिस राइट ने फॉक्स न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में दावा किया कि कुछ टैंकर अपनी पहचान छिपाकर या ट्रांसपोंडर बंद करके होर्मुज पार कर रहे हैं, जिनकी निगरानी केवल अमेरिकी प्रशासन कर पा रहा है। अमेरिका के ऊर्जा विभाग ने भी पुष्टि की है कि कई जहाज अपनी गतिविधियों को छुपाने के लिए तकनीकी उपकरणों को बंद रख रहे हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना एक चुनौती बना हुआ है।

युद्ध से पहले की तुलना में भारी गिरावट

होर्मुज का जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए हमेशा से एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। संघर्ष शुरू होने से पहले, इस मार्ग से रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता था। इतना ही नहीं, यह रास्ता प्राकृतिक गैस, उर्वरक, एल्युमिनियम और हीलियम जैसे महत्वपूर्ण सामानों के परिवहन के लिए भी मुख्य मार्ग था। उस समय रोजाना लगभग 140 जहाज इस क्षेत्र से गुजरते थे, लेकिन वर्तमान स्थिति बिल्कुल बदल चुकी है। केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, हाल ही में एक रविवार को केवल 3 जहाज ही इस मार्ग का उपयोग कर पाए, जबकि पूरे पिछले सप्ताह में कुल 95 जहाजों ने ही इस जलडमरूमध्य को पार किया है।

तेल की ट्रैकिंग क्यों बनी चुनौती?

मौजूदा अस्थिरता के बीच तेल की आवाजाही का सही अनुमान लगाना बेहद कठिन हो गया है। कई जहाज अपनी लोकेशन छिपाने के लिए अपने ट्रांसपोंडर बंद कर रहे हैं। साथ ही, कुछ संवेदनशील इलाकों में उपग्रह के माध्यम से निगरानी करना भी जटिल हो गया है। इसके अलावा, अमेरिकी सेना द्वारा कुछ टैंकरों को अत्यंत गोपनीयता के साथ संचालित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि केप्लर जैसी संस्थाएं अपनी निगरानी प्रणाली में सुधार तो कर रही हैं, लेकिन डार्क ट्रांजिट यानी अंधेरे में यात्रा करने वाले जहाजों की बढ़ती संख्या सही डेटा जुटाने की राह में एक बड़ा रोड़ा बनी हुई है।

वैश्विक तेल कीमतों पर असर

यदि होर्मुज से तेल की आपूर्ति सामान्य नहीं होती है, तो इसका सीधा और घातक असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उछाल का अर्थ है कि हर प्रकार की ढुलाई और रोजमर्रा के सामान महंगे हो जाएंगे। यह विरोधाभास ही है कि अमेरिकी प्रशासन के दावों के बावजूद, सोमवार को वैश्विक कच्चे तेल की कीमत लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं, अमेरिका के भीतर पेट्रोल की औसत कीमत 4.067 डॉलर प्रति गैलन के स्तर पर पहुंच गई है, जो इस अवधि के लिए रिकॉर्ड स्तर माना जा रहा है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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