राजस्थान का खास स्वाद अब मध्य प्रदेश में, खाटू श्याम के दर्शन ने बदली अशोक की किस्मत मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 4
शिवपुरी के रहने वाले अशोक पाराशर ने खाटू श्याम जी के दर्शन के दौरान चखा कढ़ी-कचौरी का स्वाद, तो इसे ही अपना नया व्यवसाय बना लिया। आज वे इस ठेले से हर महीने अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं।

राजस्थान की तर्ज पर शिवपुरी में कढ़ी-कचौरी का कारोबार

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में रहने वाले अशोक पाराशर ने एक ऐसी मिसाल पेश की है जो आज के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध खाटू श्याम जी के दर्शन करने के बाद अशोक पाराशर ने वहीं के मशहूर कढ़ी-कचौरी के स्वाद से प्रभावित होकर अपना नया उद्यम शुरू किया है। उन्होंने शिवपुरी शहर में श्री श्याम कढ़ी कचौरी के नाम से एक ठेला लगाना शुरू किया है, जो आज शहर के लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है।

प्रेरणा का स्रोत और व्यवसाय का विचार

अशोक पाराशर का यह सफर एक धार्मिक यात्रा से शुरू हुआ था। इससे पहले वह रेलवे स्टेशन के पास एक दुकान का संचालन करते थे, लेकिन समय के साथ उन्होंने उस काम को छोड़कर कुछ नया करने का मन बनाया। जब वह खाटू श्याम जी के दर्शन के लिए राजस्थान गए, तो वहां की कढ़ी-कचौरी के अनूठे स्वाद ने उनका मन मोह लिया। उन्होंने गहराई से महसूस किया कि यदि शिवपुरी में भी लोगों को ठीक वैसा ही जायका उपलब्ध कराया जाए, तो यह एक सफल व्यवसाय साबित हो सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने शिवपुरी लौटने पर इसे हकीकत में बदलने का फैसला किया।

लगभग 50 हजार रुपये के निवेश से शुरू हुई शुरुआत

कोई भी काम शुरू करने के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है। अशोक ने एमएम चौराहे के पास अपना ठेला लगाने के लिए करीब 50 हजार रुपये का शुरुआती निवेश किया। शुरुआती दिनों में उनके मन में यह आशंका जरूर थी कि क्या स्थानीय लोग राजस्थान के इस खास स्वाद को स्वीकार करेंगे, लेकिन धीरे-धीरे उनके ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी। आज स्थिति यह है कि स्थानीय लोग कढ़ी-कचौरी का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में उनके ठेले पर आते हैं।

हर महीने 20 से 25 हजार रुपये की कमाई

अपने व्यवसाय की सफलता को लेकर अशोक काफी उत्साहित हैं। उन्होंने साझा किया कि इस काम से उन्हें अब हर महीने लगभग 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। ग्राहकों से मिलने वाले अच्छे प्रतिसाद ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार किया है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई दी है।

स्वाद की विशेषता

अशोक का मानना है कि उनके कारोबार की असली पहचान उनकी कढ़ी का लाजवाब स्वाद है। वह अपनी कढ़ी को पूरी तरह से देसी अंदाज में तैयार करते हैं और गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं करते। गरमा-गरम कचौरी के साथ परोसी जाने वाली यह कढ़ी इतनी स्वादिष्ट होती है कि एक बार खाने वाले ग्राहक बार-बार उनके पास लौटकर आते हैं। अपने इस सफल व्यवसाय को उन्होंने खाटू श्याम जी का नाम दिया है, जो उनकी अटूट आस्था और मेहनत का प्रतीक बन चुका है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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