तीजा पर्व की रौनक बढ़ाती है छत्तीसगढ़ की खास खुरमी, घर पर ऐसे तैयार करें यह पारंपरिक व्यंजन जीवनशैली एक घंटा पहले 4
छत्तीसगढ़ में तीजा का त्योहार सिर्फ धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि खानपान की समृद्ध परंपराओं का भी प्रतीक है। इस मौके पर विशेष रूप से बनाई जाने वाली खुरमी न केवल स्वादिष्ट होती है, बल्कि इसे लंबे समय तक सुरक्षित भी रखा जा सकता है।

तीजा और छत्तीसगढ़ी खानपान का अटूट संबंध

छत्तीसगढ़ में तीजा का त्योहार महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है, जिसमें मायके और ससुराल दोनों जगह पारंपरिक व्यंजनों की धूम रहती है। इस त्योहार की मिठास छत्तीसगढ़ी खानपान की संस्कृति के बिना अधूरी है। इन्हीं व्यंजनों में से एक प्रमुख नाम है खुरमी, जो अपने स्वाद और बनावट के लिए जानी जाती है। आधुनिक समय में जब हम तेजी से बदलती जीवनशैली में कई पुरानी चीजों को भूल रहे हैं, तीजा जैसे पर्व हमें अपनी जड़ों और पारंपरिक स्वादों से जोड़े रखने का एक बेहतरीन माध्यम बनते हैं। खुरमी जैसे व्यंजन नई पीढ़ी तक हमारी सांस्कृतिक विरासत को पहुँचाने का काम करते हैं।

खुरमी की सामग्री और उसका महत्व

खुरमी को तैयार करने के लिए बहुत ही साधारण और घर में आसानी से उपलब्ध सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। इसके मुख्य घटकों में गेहूं का आटा, सूजी, गुड़ या चीनी, तिल और घी शामिल हैं। यदि आप इसमें अतिरिक्त स्वाद जोड़ना चाहते हैं, तो आप कद्दूकस किया हुआ नारियल, इलायची पाउडर और सौंफ का भी उपयोग कर सकते हैं। इन सभी चीजों के मेल से जो व्यंजन तैयार होता है, वह बाहर से कुरकुरा और अंदर से बेहद स्वादिष्ट होता है। सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बनाने के लिए किसी जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती है।

स्टेप 1: गुड़ का मीठा घोल तैयार करना

खुरमी बनाने की शुरुआत सबसे पहले गुड़ के घोल को तैयार करने से होती है। इसके लिए एक पैन में थोड़ा पानी लेकर उसमें गुड़ डालें और धीमी आंच पर गर्म करें। गुड़ को तब तक गर्म करें जब तक वह पूरी तरह से पिघल न जाए। जब घोल तैयार हो जाए, तो इसे आंच से उतारकर कुछ देर के लिए ठंडा होने दें। अगर आप गुड़ की जगह चीनी का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं, तो चीनी को पानी में घोलकर इसी प्रक्रिया को दोहराया जा सकता है।

स्टेप 2: मोयन से खस्तापन लाना

एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा, थोड़ी सूजी और तिल को एक साथ छान लें ताकि वे अच्छी तरह मिल जाएं। अब इसमें लगभग ¼ कप घी डालें। घी को आटे में दोनों हाथों से रगड़कर अच्छी तरह मिलाएं। इस प्रक्रिया को मोयन देना कहते हैं और यही खुरमी को खस्ता बनाने का मुख्य रहस्य है। इसकी सही मात्रा की पहचान करने के लिए, मुट्ठी में आटा दबाकर देखें। यदि आटा मुट्ठी में आसानी से बंध रहा है, तो समझ लें कि मोयन बिल्कुल सही है।

स्टेप 3: सख्त आटा गूंथना

अब धीरे-धीरे तैयार किया गया गुड़ का घोल आटे में मिलाते जाएं और आटा गूंथें। यह ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है कि आटा बहुत नरम नहीं होना चाहिए; इसे सख्त ही रखें ताकि खुरमी कुरकुरी बने। आटा गूंथने के बाद इसे लगभग 10 मिनट के लिए ढककर एक तरफ रख दें, ताकि सूजी और आटा पूरी तरह सेट हो जाए और मिश्रण एकसार हो जाए।

स्टेप 4: आकार देना और तलना

सेट हुए आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और उन्हें बेलन की सहायता से थोड़ा मोटा बेल लें। अब एक तेज धार वाले चाकू की मदद से इन्हें अपनी मनचाही आकृति जैसे चौकोर, गोल या डायमंड शेप में काट लें। पारंपरिक रूप से इसे अलग-अलग आकार देकर भी सजाया जाता है। कड़ाही में तेल या घी गर्म करें, लेकिन आंच मध्यम ही रखें। धीमी से मध्यम आंच पर खुरमी को धीरे-धीरे तलें। धीमी आंच पर तलने का फायदा यह है कि यह अंदर तक अच्छी तरह पकती है और इसका कुरकुरापन लंबे समय तक बना रहता है। जब ये सुनहरी और कुरकुरी हो जाएं, तो इन्हें तेल से बाहर निकाल लें।

लंबे समय तक भंडारण और संरक्षण

खुरमी को पूरी तरह से ठंडा होने के बाद ही किसी एयरटाइट डिब्बे में रखें। यदि आप इसे ठीक से स्टोर करते हैं, तो यह कई दिनों तक खराब नहीं होती और इसका स्वाद और कुरकुरापन भी बरकरार रहता है। तीजा के मौके पर आप इसे पहले से बनाकर रख सकते हैं, ताकि त्योहार के दौरान मेहमानों के आने पर उन्हें छत्तीसगढ़ के इस पारंपरिक स्वाद से रूबरू करा सकें। यह न केवल घर के बड़ों को बल्कि बच्चों को भी बहुत पसंद आता है। छत्तीसगढ़ की यह पारंपरिक मिठाई वास्तव में संस्कृति और स्वाद का अनूठा संगम है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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