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2 घंटे पहले
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कोडरमा के ग्रामीण स्वाद की अनोखी पहचान
झारखंड के कोडरमा जिले के ग्रामीण इलाकों में खान-पान की परंपरा काफी अनूठी और देसी है। यहाँ के लोग साधारण सी दिखने वाली चीजों को भी अपने खास अंदाज और पारंपरिक तरीकों से इतना लाजवाब बना देते हैं कि स्वाद लंबे समय तक याद रहता है। ऐसी ही एक बेहद लोकप्रिय डिश है स्मोकी टमाटर की चटनी। यह चटनी अपनी सोंधी खुशबू और धुएं वाले स्वाद के लिए मशहूर है, जिसे तैयार करने की तकनीक किसी को भी हैरान कर सकती है। यहाँ के लोग इसे बनाने के लिए किसी आधुनिक मशीन का नहीं बल्कि जलते हुए गर्म कोयले का सहारा लेते हैं, जो इस चटनी को एक नया आयाम देता है।
स्मोकी टमाटर की चटनी बनाने की पारंपरिक विधि
कोडरमा की रहने वाली राधिका प्रजापति बताती हैं कि इस चटनी को बनाने की प्रक्रिया की शुरुआत बहुत सरल है, लेकिन इसमें बारीकी का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। सबसे पहले ताजे और पूरी तरह पके हुए टमाटरों को अच्छी तरह धोकर साफ किया जाता है। इसके बाद इन टमाटरों को धीमी आंच पर तब तक पकाया जाता है जब तक कि वे पूरी तरह नरम न हो जाएं। इस दौरान टमाटर को समय-समय पर पलटते रहना आवश्यक है ताकि वे चारों तरफ से एक समान पकें और अंदर से भी अच्छे से गल जाएं।
कोयले के उपयोग से आता है असली फ्लेवर
जब टमाटर पककर तैयार हो जाते हैं, तो उन्हें एक बर्तन में निकालकर थोड़ी देर के लिए ठंडा होने के लिए रख दिया जाता है। ठंडा होने के बाद टमाटर के ऊपरी छिलके को आसानी से उतार लिया जाता है। इसके बाद असली चटनी बनाने का काम शुरू होता है। राधिका के अनुसार, छिलके उतरे हुए टमाटरों में लहसुन की कलियां, तीखी हरी मिर्च और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है। इन सभी चीजों को अच्छी तरह आपस में मैश किया जाता है।
गर्म कोयले और सरसों तेल का जादू
चटनी को स्मोकी बनाने का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण कोयले का उपयोग है। इस प्रक्रिया में लकड़ी के कोयले को पहले अच्छी तरह से गर्म करके अंगारे जैसा बना लिया जाता है। इसके बाद एक जलते हुए कोयले को सावधानीपूर्वक चम्मच की मदद से चटनी वाले बर्तन के बीचों-बीच रखा जाता है। जैसे ही उस गर्म कोयले के ऊपर थोड़ा सा सरसों का तेल डाला जाता है, बर्तन में से धुआं उठने लगता है। यही धुआं चटनी में वह खास स्मोकी फ्लेवर भर देता है। कुछ मिनटों तक बर्तन को ढककर रखा जाता है ताकि धुआं चटनी में पूरी तरह समा जाए। इसके बाद कोयले को निकाल दिया जाता है और चटनी को अच्छी तरह मिला लिया जाता है।
बिना महंगे मसालों के तैयार देसी व्यंजन
इस चटनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे बनाने के लिए किसी भी तरह के महंगे मसालों या विशेष सामग्री की आवश्यकता नहीं पड़ती। महज पका हुआ टमाटर, लहसुन, हरी मिर्च, नमक, सरसों का तेल और लकड़ी का कोयला मिलकर इस चटनी को स्वाद का खजाना बना देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे अक्सर गरमा-गरम चावल के साथ परोसा जाता है, जो खाने के स्वाद को दोगुना कर देता है। यह चटनी न केवल एक भोजन है, बल्कि कोडरमा की उस देसी पाक-कला और परंपरा की झलक भी है, जो आज भी अपने जड़ों से मजबूती से जुड़ी हुई है।
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