जीवनशैली
एक घंटा पहले
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विचारों
मिथिलांचल में गर्मी के मौसम में अचार बनाने की पुरानी परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है। इसी परंपरा का एक अनोखा नमूना है 'खटरस', जो अपने खट्टे, तीखे और चटपटे स्वाद के कारण हर किसी की जुबान पर चढ़ जाता है। चूँकि यह कई सामग्रियों के मिश्रण से तैयार होता है, इसलिए इसे चखने पर एक साथ कई अलग-अलग अचारों के स्वाद का अहसास होता है।
खटरस की खास बात
यही वह वजह है कि एक बार खटरस का स्वाद ले लेने के बाद बाकी अचार फीके लगने लगते हैं। यह अचार एक तरह से कई अचारों का मेल है, जो इसे बेहद खास बनाता है।
सामग्री कैसे तैयार करें
सबसे पहले कच्चे आम, ओल (जिमीकंद) और अदरक को कद्दूकस कर लें। लहसुन को छीलकर अलग रख लें और हरी मिर्च को दरदरा पीस लें। इसके बाद मेथी, सरसों, कलौंजी, सौंफ और जीरा यानी पांच फोड़न को हल्का भूनकर दरदरा पीस लें। इसमें सौंठ पाउडर और एक चुटकी हींग मिला दें।
बनाने की विधि
अब इन सभी सामग्रियों को एक साफ और सूखे बर्तन में अच्छी तरह मिलाकर 4-5 दिन तक धूप में रखें। हर दिन एक बार चम्मच से इसे चलाते रहना जरूरी है। तीसरे दिन सरसों का तेल गर्म करके ठंडा कर लें और उसे अचार में मिला दें। इसके बाद दो दिन और धूप दिखाएं।
भंडारण का सही तरीका
जब मसाले और तेल आपस में अच्छी तरह घुल-मिल जाएं, तो अचार को कांच के साफ और सूखे जार में भरकर रख दें। सही तरीके से तैयार किया गया खटरस अचार एक साल या उससे भी अधिक समय तक खराब हुए बिना सुरक्षित रहता है।
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