हर मौसम में पसंदीदा बघेलखंडी महेरी, महज 5 मिनट में तैयार स्वाद और सेहत का देसी खजाना जीवनशैली एक महीने पहले 27
मट्ठा और चावल के मेल से बनने वाली बघेलखंड की पारंपरिक महेरी हर मौसम में चाव से खाई जाती है और इसे बनाने में सिर्फ पांच मिनट लगते हैं। जानिए स्थानीय निवासी मीना द्विवेदी से सीखी आसान बघेलखंडी रेसिपी।

रोज-रोज वही दाल-चावल खाकर अगर आप ऊब चुके हैं और कुछ ऐसा तलाश रहे हैं जो स्वाद में लाजवाब होने के साथ पेट को भी शांत और तंदुरुस्त रखे, तो बघेलखंड की रसोई की एक खास डिश आपके लिए बेहतरीन विकल्प है। मट्ठा और चावल के अनोखे मेल से तैयार होने वाली महेरी स्वाद और सेहत का ऐसा देसी खजाना है, जिसे हर मौसम में बड़े चाव से खाया जा सकता है। सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बनाने में सिर्फ पांच मिनट का वक्त लगता है और इसमें कोई ज्यादा झंझट भी नहीं होती।

कई नामों से पहचानी जाती है यह पारंपरिक डिश

इस पारंपरिक व्यंजन को अलग-अलग इलाकों में कई नामों से जाना जाता है। कहीं इसे मट्ठा-भात कहा जाता है तो कहीं इसकी पहचान मटखोर के रूप में है। मूल रूप से इसे पके हुए चावल और छाछ को आपस में मिलाकर तैयार किया जाता है। ग्रामीण इलाकों में आज भी इसके बिना खाने की थाली अधूरी मानी जाती है। हरी मिर्च, जीरा और लहसुन का तड़का इसके स्वाद को दोगुना कर देता है, जबकि यह शरीर को अंदर से पूरी तरह तृप्त रखती है और पाचन तंत्र को दुरुस्त बनाए रखती है।

महेरी बनाने का बघेलखंडी तरीका

स्थानीय निवासी मीना द्विवेदी ने महेरी की रेसिपी साझा करते हुए बताया कि इसे बनाना बेहद आसान है और इसके लिए किसी तामझाम की जरूरत नहीं पड़ती। आइए, बिना देर किए बघेलखंडी अंदाज में महेरी बनाने की यह आसान विधि नोट कर लें।

चावल को हल्का मैश करें

सबसे पहले एक कप छोटे यानी आसानी से गलने वाले चावल लेकर अच्छी तरह धो लें। अब इन्हें तीन कप पानी और स्वादानुसार नमक के साथ कुकर या पतीले में तब तक पकाएं, जब तक ये खिचड़ी की तरह बिल्कुल नरम न हो जाएं। पकने के बाद चावल को हल्का सा मैश कर लें।

अब एक अलग बर्तन में ढाई से तीन कप खट्टा मट्ठा लें। इसमें आधा चम्मच हल्दी पाउडर और थोड़ा सा नमक मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें। इसके बाद इस फेंटे हुए मट्ठे को पके हुए गर्म चावल में धीरे-धीरे डालते जाएं। ध्यान रहे कि इस दौरान चम्मच लगातार चलाते रहना है, ताकि मट्ठा फटे नहीं और चावल के साथ अच्छी तरह घुल-मिल जाए।

सोंधी खुशबू से महक उठेगा घर

अब बारी आती है महेरी की जान यानी इसके कड़क तड़के की। इसके लिए एक छोटे पैन में एक बड़ा चम्मच सरसों का तेल या देसी घी गर्म करें। तेल गर्म होते ही उसमें एक चुटकी हींग, एक छोटा चम्मच जीरा, दो सूखी लाल मिर्च और बारीक कटा हुआ लहसुन डालकर अच्छे से चटकाएं। जैसे ही लहसुन सुनहरा होने लगे, इस कड़कते तड़के को तुरंत महेरी के ऊपर पलट दें और बर्तन को दो मिनट के लिए ढक दें। ऐसा करने से तड़के की सोंधी खुशबू पूरी महेरी में रच-बस जाएगी।

अब आपकी गरमागरम और पौष्टिक बघेलखंडी महेरी पूरी तरह तैयार है। इसे प्लेट में निकालें और ऊपर से हरी मिर्च तथा कटी हुई प्याज के साथ परोसें। यकीन मानिए, इस सादे और हल्के भोजन का स्वाद आपको किसी फाइव स्टार होटल के खाने में भी नहीं मिलेगा।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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