घर पर बनाएं मधुबनी का मशहूर 'आलू बम', जानें 100 साल पुरानी रेसिपी जीवनशैली 3 घंटे पहले 4
मिथिला क्षेत्र में अपनी अनोखी स्वाद के लिए मशहूर मधुबनी के 'बैजू बम' की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रोजाना यहां 10,000 से अधिक आलू बम बिक जाते हैं। आज हम आपको इस 100 साल पुरानी और खास रेसिपी के बारे में विस्तार से बताएंगे।

मिथिला की शान और स्वाद का पर्याय

अगर आप चटपटा और कुछ अलग खाने के शौकीन हैं, तो मधुबनी का 'बैजू बम' आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। पूरे मिथिलांचल में मशहूर यह डिश न केवल स्थानीय लोगों की पहली पसंद है, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग इसे चखने के लिए यहां आते हैं। इस दुकान की लोकप्रियता इतनी अधिक है कि इसके नाम 'बैजू बम' का उल्लेख स्थानीय मैथिली गीतों में भी मिलता है। लोगों का कहना है कि एक बार जो व्यक्ति इसका स्वाद ले लेता है, वह इसे बार-बार खाने की इच्छा रखता है।

100 साल पुरानी विरासत

यह दुकान लगभग 100 साल पुरानी है, जिसे बैजू साह ने शुरू किया था। समय के साथ यह परंपरा आगे बढ़ती रही, जिसे उनके बेटे ने संभाला और अब उनके पोते इस विरासत को उसी कुशलता के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि दुकान का नाम असल में 'आलू बम' था, लेकिन इसके स्वाद और लोकप्रियता के कारण ग्राहकों ने इसका नाम 'बैजू बम' रख दिया। आज भी यह दुकान अपनी पुरानी पहचान और स्वाद के प्रति समर्पित है, जिसे लोग आज भी उसी झोपड़ीनुमा ढांचे में चला रहे हैं जहां से इसकी शुरुआत हुई थी।

क्या है आलू बम का खास सीक्रेट?

आलू बम की खासियत इसके अंदर भरी जाने वाली खास स्टफिंग है। आमतौर पर घरों में आलू के पकौड़े बेसन में आलू भरकर बनाए जाते हैं, लेकिन यहां की तकनीक बिल्कुल अलग है। बैजू बम के अंदर एक खास मसाला भरा जाता है। इस मसाले को तैयार करने के लिए सबसे पहले चना दाल को भिगोया जाता है। इसके बाद इसमें नमक, लाल मिर्च, हल्दी, धनिया और ढेर सारा लहसुन मिलाया जाता है। अंत में गरम मसालों के साथ इसे फ्राई किया जाता है। यही चटपटा मिश्रण इस डिश को बाकी पकौड़ों से अलग और बेहद स्वादिष्ट बनाता है।

तैयारी का पारंपरिक तरीका

बैजू बम बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारंपरिक है। इसे आधुनिक गैस चूल्हे के बजाय आज भी मिट्टी के चूल्हे पर कोयले की धीमी आंच पर तैयार किया जाता है। लोहे की कढ़ाई में जब ये आलू बम डीप फ्राई होते हैं, तो इनका स्वाद और भी निखर कर आता है। इनकी बिक्री की रफ्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुकान शाम 4:00 बजे खुलती है और रात के 8:00 बजे तक, यानी मात्र 4 घंटों के भीतर यहां से 10,000 से अधिक पीस आलू बम की बिक्री हो जाती है।

स्वाद और कीमत का तालमेल

इस मशहूर व्यंजन की एक पीस की कीमत मात्र 20 रुपये है। खास बात यह है कि आलू बम के साथ परोसी जाने वाली मुरही (मुरमुरा) इसके स्वाद को दोगुना कर देती है। इसे खाने के बाद किसी को भी शाम का भारी नाश्ता करने की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि यह एक संपूर्ण और पेट भरने वाला स्नैक है। यही कारण है कि शाम के वक्त अरेर बीचला छला चौक पर लोगों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। कई लोग तो 70-80 किलोमीटर दूर से यहां तक सफर करके आते हैं और बड़ी मात्रा में इसे पैक करवा कर अपने साथ ले जाते हैं। विशेष अवसरों पर इसकी मांग और भी बढ़ जाती है, जहां लोग पहले से ऑर्डर देकर इसे मंगवाते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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