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3 घंटे पहले
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सैन्य अभ्यास में कटौती का अचानक फैसला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्णय अक्सर वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर देते हैं। चाहे बात वेनेजुएला में सैन्य अभियान की हो, टैरिफ से जुड़े विवाद हों या फिर ईरान को लेकर उनकी बदली हुई नीति, उन्होंने हमेशा सबको चौंकाया है। इसी क्रम में अब ट्रंप ने पेंटागन को एक बड़ा निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि दक्षिण कोरिया के साथ प्रस्तावित संयुक्त सैन्य अभ्यास में भारी कटौती की जाए। इस फैसले के पीछे की सबसे बड़ी वजह ईरान को माना जा रहा है। ट्रंप का आरोप है कि दक्षिण कोरिया, ईरान को परमाणु हथियारों से मुक्त करने की अमेरिकी मुहिम में मदद करने से बच रहा है। इसके अलावा उन्होंने उत्तर कोरिया के प्रति अपनी नरम नीति और वहां के नेता किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे संबंधों का भी जिक्र किया है।
महंगा सैन्य अभ्यास और उत्तर कोरिया का रुख
सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस सप्ताह शुरू होने जा रहे सैन्य अभ्यास न केवल बेहद महंगे हैं, बल्कि उत्तर कोरिया के लिए भी यह गलत संदेश देते हैं, जिसे वे दुश्मनी भरा मानते हैं। ट्रंप का तर्क है कि उनके शासनकाल के दौरान उत्तर कोरिया ने कभी भी अमेरिका को धमकी नहीं दी, बल्कि उनका व्यवहार हमेशा सम्मानजनक रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि हाल ही में उन्होंने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति से ईरान को परमाणु हथियारों से मुक्त करने की दिशा में अमेरिकी प्रयासों का समर्थन करने का आग्रह किया था, जिसे सियोल प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया।
सहयोग न मिलने से नाराज हुए ट्रंप
अपने पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि चूंकि अब अभ्यास को रद्द करने में बहुत देर हो चुकी है, इसलिए उन्होंने युद्ध सचिव पीट हेगसेथ को निर्देशित किया है कि इस जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज को काफी हद तक सीमित कर दिया जाए। उन्होंने आगे कहा कि जब उन्होंने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति से इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के परमाणु निरस्त्रीकरण में साथ देने को कहा, तो उन्हें वहां से स्पष्ट मनाही मिली।
ट्रंप प्रशासन की बदलती प्राथमिकताएं
इस फैसले को एक बड़े कूटनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप का यह कदम यह दर्शाता है कि वे अपने सहयोगी देश से दूरी बनाने और उन देशों के साथ जुड़ने में संकोच नहीं कर रहे, जिन्हें पूर्ववर्ती अमेरिकी प्रशासन दुश्मन मानता था। इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ जारी संघर्ष में नाटो सहयोगियों से अपेक्षित समर्थन न मिलने पर उनकी कड़ी आलोचना कर चुका है।
क्या था सैन्य अभ्यास का मुख्य उद्देश्य?
यह प्रस्तावित जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज कुल 11 दिनों तक चलने वाली थी, जिसमें करीब 18,000 दक्षिण कोरियाई सैनिकों के हिस्सा लेने की योजना थी। इसका प्राथमिक लक्ष्य उत्तर कोरिया से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों के खिलाफ दोनों देशों की संयुक्त सैन्य तैयारियों और अभियान क्षमता को सुदृढ़ बनाना था। गौरतलब है कि इस अभ्यास की रूपरेखा तब तैयार की गई थी, जब उत्तर कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षणों को पुनः शुरू कर दिया था।
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