बुरहानपुर के मशहूर केले के वड़े: रेसिपी जो चलती है पूरे 2 दिन, घर पर ऐसे बनाएं स्वाद का खजाना जीवनशैली एक घंटा पहले 3
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर का यह पारंपरिक व्यंजन कच्चे केले और आलू से तैयार होता है। अपनी कुरकुरी बनावट के कारण यह न केवल चाय का बेहतरीन साथी है, बल्कि इसे दो दिन तक सुरक्षित भी रखा जा सकता है।

स्वाद और परंपरा का मेल

मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर में खाने-पीने-पीने की अपनी एक अलग ही संस्कृति है। यहां की पाक कला अपनी सादगी और स्वाद के लिए पूरे क्षेत्र में जानी जाती है। इसी परंपरा का एक अहम हिस्सा हैं कच्चे केले से बनने वाले वड़े। बरसात के सुहावने मौसम में जब शाम को गरमा-गरम चाय के साथ कुछ कुरकुरा खाने का मन होता है, तब ये केले के वड़े बुरहानपुर के हर घर में पहली पसंद बनकर सामने आते हैं।

जरूरी सामग्री

इस स्वादिष्ट व्यंजन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बहुत ही साधारण और आसानी से उपलब्ध होने वाली चीजों से तैयार किया जा सकता है। इसे बनाने के लिए आपको मुख्य रूप से इन सामग्रियों की आवश्यकता होती है:

  • कच्चे केले
  • आलू
  • चावल का आटा
  • जीरा
  • नमक
  • हरी मिर्च
  • तलने के लिए तेल

तैयारी की विधि

बुरहानपुर की विशेषज्ञ कविता जी बताती हैं कि इन वड़ों को बनाना बेहद सरल है। सबसे पहले आपको कच्चे केले और आलू को अच्छी तरह उबालना होगा। उबलने के बाद इनका छिलका उतारकर इन्हें एक बर्तन में डालकर अच्छी तरह मैश कर लें। मैश किए हुए मिश्रण में अब चावल का आटा मिलाएं। यह आटा वड़ों को एक विशेष कुरकुरापन देने का काम करता है। इसके बाद मिश्रण में स्वादानुसार नमक, बारीक कटी हुई हरी मिर्च और जीरा डालें। सभी चीजों को एक साथ गूंथकर एक समान मिश्रण तैयार कर लें।

तलने का सही तरीका

मिश्रण तैयार होने के बाद इसके छोटे-छोटे वड़े बना लें। एक कड़ाही में पर्याप्त तेल गर्म करें। जब तेल मध्यम आंच पर गर्म हो जाए, तब तैयार वड़ों को इसमें धीरे-धीरे छोड़ें। इन्हें मध्यम आंच पर तब तक तलें जब तक कि इनका बाहरी आवरण पूरी तरह से सुनहरा और कुरकुरा न हो जाए। धीमी और मध्यम आंच पर तलने से ये अंदर तक अच्छी तरह पक जाते हैं और बाहर से लंबे समय तक क्रिस्पी बने रहते हैं।

क्यों खास हैं ये वड़े?

इन वड़ों की सबसे बड़ी खासियत इनकी शेल्फ लाइफ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि इन वड़ों को सही तरीके से रखा जाए, तो ये 2 दिन तक खराब नहीं होते हैं। यही कारण है कि बहुत से लोग इन्हें एक ही बार में अधिक मात्रा में बनाकर रख लेते हैं ताकि कई दिनों तक चाय के साथ इनका आनंद लिया जा सके।

बरसात के दिनों में परिवार के सदस्य अक्सर इन्हें शाम की चाय या अपनी पसंद की किसी चटपटी चटनी के साथ खाना बेहद पसंद करते हैं। यदि आप भी बुरहानपुर के इस स्थानीय जायके को महसूस करना चाहते हैं, तो इस आसान रेसिपी को अपने घर पर जरूर आजमाएं। यह न केवल स्वाद में बेहतरीन है बल्कि बनाने में भी बहुत आसान है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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