रक्षाबंधन 2026: भाई को राखी बांधने से पहले इन देवताओं को करें समर्पित, जानें पूजन की सही विधि और शुभ समय धर्म एक घंटा पहले 4
रक्षाबंधन के पवित्र पर्व पर भाई की कलाई पर रक्षासूत्र सजाने से पूर्व किन देवताओं का आशीर्वाद लेना अनिवार्य है, इस लेख में जानें पूरी धार्मिक प्रक्रिया और 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां।

रक्षाबंधन का महत्व और परंपरा

इस वर्ष 28 अगस्त 2026 को पूरे भारतवर्ष में भाई और बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। लोक मान्यता है कि इस पावन दिवस पर भाई की कलाई पर राखी बांधने से उनके जीवन में खुशहाली और संपन्नता का संचार होता है, साथ ही सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद बना रहता है। इस दिन भाई अपनी बहनों की सुरक्षा का संकल्प लेते हैं। सनातन धर्म के अनुसार, कोई भी मांगलिक कार्य या पर्व ईश्वर की स्तुति के बिना पूर्ण नहीं माना जाता है, इसलिए राखी बांधने की रस्म से पूर्व देवी-देवताओं को रक्षासूत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ और अनिवार्य माना गया है।

किस देवता को सबसे पहले समर्पित करें राखी?

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, रक्षाबंधन पर इन देवताओं का स्मरण और पूजन करना अत्यंत फलदायी होता है:

  • भगवान गणेश: हिंदू मान्यताओं में भगवान गणेश को 'प्रथम पूज्य' का दर्जा प्राप्त है। अतः किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणपति वंदना से ही होती है, इसलिए रक्षाबंधन पर सबसे पहले उन्हें राखी अर्पित करनी चाहिए।
  • भगवान शिव: सावन का महीना महादेव का सबसे प्रिय माह माना जाता है। रक्षाबंधन सावन की पूर्णिमा को आता है, इसलिए गणेश जी के बाद भगवान शिव को राखी चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे उनकी विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है।
  • हनुमान जी: संकटमोचन हनुमान जी को रक्षाबंधन के अवसर पर लाल रंग की राखी अर्पित करना विशेष फलदायी होता है। इससे भक्तों को जीवन के सभी संकटों से मुक्ति मिलती है।
  • श्री कृष्ण: रक्षाबंधन की परंपरा में भगवान कृष्ण का स्थान महत्वपूर्ण है। पौराणिक कथाओं में वर्णित है कि द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू चीरकर जब भगवान कृष्ण की उंगली पर बांधा था, तब उन्होंने द्रौपदी की रक्षा का वचन दिया था।

राखी बांधने की शास्त्रीय विधि

पूजा की थाली में कुमकुम, अक्षत, चंदन, दीपक और मिठाइयां रखें। सबसे पहले भगवान गणेश और अपने इष्ट देव का तिलक करें। इसके बाद उन्हें अक्षत अर्पित करें और रक्षासूत्र बांधें या उनकी मूर्ति/चित्र पर राखी अर्पित करें। अंत में उन्हें भोग लगाएं और आरती उतारकर पूरे परिवार की सुख, शांति और सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें।

रक्षाबंधन 2026 का शुभ मुहूर्त

  • पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ: 27 अगस्त 2026 को सुबह 09:08 ए एम बजे से।
  • पूर्णिमा तिथि का समापन: 28 अगस्त 2026 को सुबह 09:48 ए एम बजे तक।
  • रक्षाबंधन अनुष्ठान का समय: 28 अगस्त 2026 की सुबह 06:23 ए एम से 09:48 ए एम के बीच।
प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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