तीज का खास स्वाद: सत्तू से बनी लाजवाब मिठाई, जानें जालौर की परंपरा जीवनशैली एक घंटा पहले 3
सावन और तीज के मौके पर राजस्थान के जालौर में सत्तू की मिठाई बनाने की पुरानी परंपरा है। कम सामग्री में तैयार होने वाला यह पकवान स्वाद और सेहत का अनूठा संगम है।

तीज पर सत्तू की मिठास

सावन का महीना और तीज का त्योहार आते ही राजस्थान के जालौर जिले के हर घर में पारंपरिक पकवानों की महक आने लगती है। इस दौरान सत्तू की मिठाई का विशेष स्थान है। यह पकवान न केवल यहां की रसोई का मुख्य हिस्सा है, बल्कि यह पीढ़ियों से चली आ रही पारिवारिक परंपराओं का एक अहम प्रतीक भी है।

कैसे तैयार होता है खास सत्तू

जालौर में बनने वाले इस पारंपरिक सत्तू को तैयार करने के लिए बहुत कम सामग्री की आवश्यकता होती है, लेकिन इसका स्वाद बेहद लाजवाब होता है। इसे मुख्य रूप से निम्नलिखित सामग्रियों से बनाया जाता है:

  • भुने हुए चने का आटा या गेहूं का आटा
  • शुद्ध देसी घी
  • मिठास के लिए शक्कर
  • स्वाद बढ़ाने के लिए इलायची
  • मेवे जैसे काजू और बादाम

परंपरा और रिश्तों का संगम

जालौर की संस्कृति में सत्तू का संबंध केवल स्वाद से नहीं, बल्कि रिश्तों की गर्माहट से भी है। तीज के शुभ अवसर पर परिवार के लोग सत्तू बनाकर अपनी बहनों, बेटियों और सगे-संबंधियों के घरों में भेजते हैं। यह आदान-प्रदान रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाता है।

नई पीढ़ी को सीख

आज के दौर में भी जालौर की बुजुर्ग महिलाएं अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं। वे नई पीढ़ी को इस पारंपरिक मिठाई को बनाने की सही विधि सिखाती हैं। इस प्रकार, घर की रसोई में बैठकर सत्तू बनाने का यह चलन आज भी अपनी पूर्ण भव्यता के साथ जीवित है और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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