जीवनशैली
एक घंटा पहले
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विचारों
छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और यहां के पारंपरिक खान-पान का अपना एक अलग ही अनूठा मिजाज है। हर मौसम के मिजाज के हिसाब से यहां की रसोइयों में अलग-अलग लजीज व्यंजन तैयार किए जाते हैं। मानसून की दस्तक के साथ ही छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक के घरों में एक बेहद खास सब्जी की खुशबू महकने लगती है, जिसे स्थानीय भाषा में कोचई कहा जाता है। देश के अन्य कई हिस्सों में लोग इसे अरबी या घुइयां के नाम से भी पहचानते हैं। बरसात के सुहाने मौसम में सरसों के तेल, लहसुन, हरी मिर्च और पारंपरिक मसालों के अनोखे तड़के के साथ तैयार की गई कोचई की सूखी या तरीदार सब्जी भोजन की थाली का स्वाद दोगुना कर देती है। यदि आप भी इस बारिश के मौसम में कुछ नया और पूरी तरह देसी आजमाना चाहते हैं, तो छत्तीसगढ़ी स्टाइल की इस बेहद स्वादिष्ट सब्जी को अपने घर पर आसानी से तैयार कर सकते हैं।
कोचई की सफाई और काटने का सही तरीका
कोचई की स्वादिष्ट सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले उसकी सही तरीके से सफाई करना सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। चूंकि यह जमीन के अंदर उगने वाली कंद वाली सब्जी है, इसलिए इस पर काफी मात्रा में मिट्टी लगी होती है। सबसे पहले कोचई को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद चाकू की मदद से इसके छिलके को पूरी तरह उतार लें और इसे छोटे-छोटे मनपसंद टुकड़ों में काट लें। काटने के बाद भी इसे एक बार पानी से अच्छी तरह धोकर अलग रख लें। यहां एक बात का विशेष ध्यान रखें कि कोचई को छीलने और काटने के दौरान कुछ लोगों के हाथों में हल्की खुजली हो सकती है, इसलिए आप चाहें तो हाथों में थोड़ा सा सरसों का तेल लगाकर इसे काट सकते हैं ताकि त्वचा सुरक्षित रहे।
सरसों तेल और लहसुन का पारंपरिक तड़का
छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की असली जान उनके तड़के और बनाने के पारंपरिक तरीके में छिपी होती है। इस सब्जी को बनाने के लिए पारंपरिक तौर पर केवल सरसों के तेल का ही इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसका तीखापन और खुशबू निखर कर आती है। सबसे पहले एक कड़ाही में पर्याप्त मात्रा में सरसों का तेल गर्म करें। जब तेल से धुआं निकलने लगे, तब आंच धीमी करके इसमें राई या जीरा डालें। इसके तुरंत बाद बारीक कटी हुई लहसुन की कलियां, तीखी हरी मिर्च और बारीक कटे हुए प्याज डालें। इस तड़के को तब तक भूनें जब तक कि लहसुन और प्याज का रंग हल्का सुनहरा और खुशबूदार न हो जाए। लहसुन और सरसों तेल का यह देसी तड़का ही इस साधारण सी सब्जी को एक लाजवाब स्वाद प्रदान करता है।
धीमी आंच पर पकाना है बेहद जरूरी
जब कड़ाही में प्याज और लहसुन का तड़का अच्छी तरह भूनकर तैयार हो जाए, तो इसमें पहले से साफ करके काट कर रखी गई कोचई के टुकड़े डाल दें। इसे तड़के के साथ अच्छी तरह मिला लें ताकि तेल की कोटिंग कोचई पर अच्छी तरह चढ़ जाए। इसके बाद कड़ाही को एक ढक्कन से ढक दें और गैस की आंच को बिल्कुल धीमा कर दें। कोचई को धीमी आंच पर भाप में धीरे-धीरे पकने दें। बीच-बीच में ढक्कन हटाकर इसे चम्मच से चलाते रहें ताकि सब्जी कड़ाही के तलवे में चिपके नहीं। यदि आपको लगे कि सब्जी सूखी हो रही है और अभी पूरी तरह पकी नहीं है, तो आप इसमें जरूरत के अनुसार पानी की कुछ बूंदें या बहुत थोड़ा सा पानी छिड़क सकते हैं। कोचई के पूरी तरह नरम होने तक इसे पकाना इस रेसिपी का सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
देसी मसालों और टमाटर का लाजवाब तालमेल
जैसे ही कोचई के टुकड़े पूरी तरह से गलकर नरम हो जाएं, तब इसमें खटास और तीखापन लाने की बारी आती है। अब कड़ाही के बीच में थोड़ी जगह बनाकर बारीक कटे हुए टमाटर डालें। इसके साथ ही इसमें हल्दी पाउडर, तीखी लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और स्वादानुसार नमक डालें। इन सभी मसालों और टमाटर को कोचई के टुकड़ों के साथ अच्छी तरह मिला लें। अब दोबारा कड़ाही को ढककर कुछ मिनटों के लिए धीमी आंच पर पकाएं, जब तक कि टमाटर पूरी तरह गल न जाएं और मसाले अपना तेल न छोड़ दें। थोड़ी देर में सारे मसाले और टमाटर कोचई के साथ मिलकर एक बेहतरीन चटपटी ग्रेवी या लटपटी सूखी सब्जी का रूप ले लेंगे और इसकी महक पूरे घर में फैल जाएगी।
दाल-भात और गरम रोटी के साथ उठाएं लुत्फ
छत्तीसगढ़ के पारंपरिक घरों में दोपहर के भोजन के समय कोचई की सब्जी को बेहद पसंद किया जाता है। गरमा-गरम दाल और चावल के साथ इस सूखी या मसालेदार सब्जी का मेल लाजवाब लगता है। इसके अलावा रात के भोजन में इसे ताजी बनी रोटियों के साथ भी बड़े चाव से परोसा जाता है। यदि इस थाली के साथ तीखी हरी मिर्च, टमाटर की देसी सिलबट्टे वाली चटनी या कोई अन्य पारंपरिक चटनी भी हो, तो भोजन का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। मेहमानों को छत्तीसगढ़ी स्वाद से रूबरू कराने के लिए यह एक बेहतरीन और उत्तम शाकाहारी विकल्प है।
स्वाद के साथ सेहत की सावधानी भी है जरूरी
स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ कोचई की सब्जी बनाते समय एक बेहद महत्वपूर्ण सावधानी रखना जरूरी है। कोचई को हमेशा बहुत ही अच्छी तरह से पकाकर ही परोसना चाहिए। यदि यह सब्जी अधपकी रह जाती है या हल्की भी कच्ची रह जाती है, तो इसे खाने के बाद मुंह, जीभ और गले में तेज खुजली, खराश या हल्की जलन की समस्या हो सकती है। ऐसा इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्वों के कारण होता है, जो पूरी तरह पकने के बाद निष्क्रिय हो जाते हैं। इसलिए जल्दबाजी में सब्जी न बनाएं और पर्याप्त समय देकर कोचई के पूरी तरह नरम होने के बाद ही गैस बंद करें। इस आसान सावधानी के साथ आप इस मानसून में छत्तीसगढ़ी स्वाद का भरपूर आनंद ले सकते हैं।
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