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3 घंटे पहले
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इंडोनेशिया में भूकंप का तांडव
इंडोनेशिया के पूर्वी द्वीपीय हिस्सों में आए 7.7 तीव्रता के जोरदार भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। आपदा के एक दिन बाद रविवार को बचाव कर्मियों ने मलबे से छह और शव निकाले, जिसके बाद कुल मृतकों की संख्या बढ़कर 53 हो गई है। भूकंप की मार झेल रहे हजारों लोगों ने लगातार आ रहे झटकों के डर से अपने घरों के बजाय बाहर खुले में रात गुजारी। कैथोलिक बहुल फ्लोरेस द्वीप पर भूकंप के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है, जिसने बचाव कार्यों की राह में बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। राहत और बचाव दल लगातार मंगराई, पूर्वी मंगराई और नागेकेओ जैसे सुदूर इलाकों में मलबा हटाने का काम कर रहे हैं, जहां पहुंचना पहले से ही बेहद कठिन था।
राहत और बचाव कार्यों की चुनौतियां
सिक्का रीजेंसी की राजधानी मौमेरे में सर्च एंड रेस्क्यू ऑफिस के प्रमुख फथुर रहमान ने बताया कि बचाव दल ने ज्यादातर भूस्खलन वाली जगहों को साफ कर लिया है और उन रास्तों को दोबारा शुरू किया है जो गांवों को मुख्य शहर से जोड़ते थे। हालांकि, वे स्वीकार करते हैं कि संचार साधनों के ठप होने और बिजली की कटौती के कारण बचाव अभियानों में काफी मुश्किलें आ रही हैं। ईस्ट नुसा तेंगारा प्रांत में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहां 900 से अधिक घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं और 450 घरों को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा है। इस आपदा के कारण लगभग 5,000 लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं और अस्थायी शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं।
फ्लोरेस द्वीप पर बड़े पैमाने पर नुकसान
नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी के आपदा रोकथाम प्रमुख अब्दुल मुहरी ने जानकारी दी कि केवल फ्लोरेस इलाके में कम से कम 241 घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, यह भूकंप शनिवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 6 बजे से कुछ समय पहले मात्र 10 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया। भूकंप के तुरंत बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी, जिसके चलते लोग डर के मारे सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। हालांकि बाद में चेतावनी वापस ले ली गई, लेकिन मुहरी के मुताबिक, शनिवार से अब तक कुल 995 आफ्टरशॉक रिकॉर्ड किए गए हैं। इनमें से 46 झटके लोगों ने खुद महसूस किए हैं, जबकि इस दौरान कुल 135 लोग घायल भी हुए हैं।
खुले आसमान के नीचे बितानी पड़ी रात
कोमोडो नेशनल पार्क के प्रवेश द्वार के रूप में प्रसिद्ध लाबुआन बाजो में भी बड़ी संख्या में लोगों ने आफ्टरशॉक के डर से अपने घर छोड़ दिए और बाहर रात बिताई। एक स्थानीय किसान अनास्तासिया इमाद, जो अपने क्षतिग्रस्त घर के पास तंबू में रह रही हैं, ने बताया कि झटके इतने डरावने थे कि उनका घर गिरने की कगार पर पहुंच गया था। उन्हें डर था कि सोते समय छत उनके ऊपर न गिर जाए। भूस्खलन के कारण प्रसिद्ध ट्रांस फ्लोरेस हाईवे के कई हिस्से अवरुद्ध हो गए हैं। यह लगभग 700 किलोमीटर लंबी सड़क पहाड़ी द्वीप के विभिन्न समुदायों को आपस में जोड़ने वाली एकमात्र महत्वपूर्ण कड़ी है।
राहत सामग्री का वितरण
प्रशासन और राहत कर्मी प्रभावित लोगों तक चावल, भोजन के पैकेट, पीने का पानी, कंबल और आवश्यक दवाइयां पहुंचा रहे हैं। फिलहाल प्राथमिकता बिजली और संचार व्यवस्था को बहाल करने के साथ-साथ उन गांवों तक मदद पहुंचाना है जो भूस्खलन के कारण बाकी दुनिया से पूरी तरह कट गए हैं। गौरतलब है कि इंडोनेशिया 17,000 से अधिक द्वीपों का एक विशाल समूह है। यह देश पैसिफिक रिंग ऑफ फायर पर स्थित है, जिसकी वजह से यहां भूकंपीय हलचल और ज्वालामुखीय विस्फोट का खतरा हमेशा बना रहता है।
आपदाओं का केंद्र रहा है फ्लोरेस
फ्लोरेस द्वीप का इतिहास दुखद आपदाओं से भरा रहा है। साल 1992 में आए एक शक्तिशाली भूकंप और सुनामी ने यहां लगभग 2,500 लोगों की जान ली थी। इसके अलावा, साल 2018 में सुलावेसी द्वीप पर आए 7.5 मैग्नीट्यूड के भूकंप और उसके बाद आई सुनामी में 4,400 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, साल 2004 में सुमात्रा के निकट आए 9.1 मैग्नीट्यूड के भीषण भूकंप ने एक दर्जन देशों में सुनामी पैदा कर दी थी, जिसमें कुल 230,000 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी।
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