बरसात के मौसम में खेतों में मिलता है सेहत का खजाना, बीपी और शुगर पर ऐसे करता है असर जीवनशैली एक घंटा पहले 2
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में बरसात के दौरान नदी-नालों में पाए जाने वाले केकड़े से बनने वाला व्यंजन स्वाद और स्वास्थ्य का अनूठा मेल है। स्थानीय लोग इसे कमजोरी दूर करने और कई बीमारियों में राहत देने वाला मानते हैं।

बरसात का खास तोहफा

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में मानसून की दस्तक के साथ ही ग्रामीण जीवन में एक बड़ा बदलाव आता है। जैसे-जैसे तालाब, नदियां, नाले और खेत पानी से भरते हैं, वैसे ही प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले देसी केकड़ों की संख्या में भारी उछाल आ जाता है। ग्रामीण इन्हें पकड़कर अपने भोजन का हिस्सा बनाते हैं। यह व्यंजन न केवल खाने में स्वादिष्ट और लाजवाब होता है, बल्कि स्थानीय लोग इसे ताकत का एक बड़ा स्रोत भी मानते हैं।

बीपी और शुगर में असरदार

स्थानीय निवासी और इस व्यंजन के जानकार सिकंदर प्रजापति ने बताया कि केकड़े का सेवन कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं में लाभकारी माना जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि जो लोग उच्च रक्तचाप यानी बीपी और शुगर से पीड़ित हैं, उनके लिए यह भोजन काफी फायदेमंद हो सकता है। सिकंदर के अनुसार, केकड़े का जूस और इसकी सब्जी दोनों ही शरीर में स्फूर्ति लाने का काम करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ये पारंपरिक दावे हैं और इनकी पुष्टि चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा नहीं की गई है, लेकिन गांव के लोग सदियों से इसे स्वास्थ्य के लिए गुणकारी मानते आए हैं।

कैसे तैयार होता है यह देसी व्यंजन

इस व्यंजन को बनाने की प्रक्रिया काफी सरल और पारंपरिक है। सिकंदर प्रजापति ने बताया कि बरसात के समय नदी और खेतों के किनारे से 8 से 10 केकड़े इकट्ठा किए जाते हैं। घर लाने के बाद इन्हें बहुत सावधानी से साफ किया जाता है। इसकी सब्जी बनाने के लिए मसालों का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि इसका जूस तैयार करने के लिए इसमें खटाई के रूप में स्थानीय सामग्री मिलाई जाती है। यह खट्टा और चटपटा स्वाद ग्रामीण रसोई की पहचान है।

कमजोरी दूर करने का अचूक नुस्खा

गांवों में यह मान्यता है कि केकड़े का नियमित सेवन करने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और भूख भी खुलकर लगती है। सिकंदर का दावा है कि इसे खाने वाले लोगों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कम देखी जाती हैं। उन्होंने बताया कि यह उनके दैनिक जीवन का एक अहम और पसंदीदा मौसमी व्यंजन है। उन्होंने और गांव के अन्य लोगों ने लंबे समय से इसका सेवन किया है और अब तक उन्हें किसी भी तरह के दुष्प्रभाव का अनुभव नहीं हुआ है। उनके लिए यह केवल भोजन नहीं, बल्कि ग्रामीण परंपरा का एक अभिन्न हिस्सा है जिसे परिवार के सभी सदस्य मिल-जुलकर खाते हैं। गर्मियों के दिनों में भी केकड़े मिलते हैं, लेकिन बरसात के मौसम में इनकी उपलब्धता काफी अधिक हो जाती है, जिससे यह आम लोगों की थाली तक आसानी से पहुंच जाते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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