राष्ट्रीय राजनीति
2 महीने पहले
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विचारों
मन की बात में पीएम मोदी का संबोधन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 135वें एपिसोड में इस बार किसी बड़ी सरकारी नीति या राजनीतिक चर्चा के बजाय प्रकृति संरक्षण से जुड़ी एक अत्यंत प्रेरणादायक कहानी साझा की है। पीएम मोदी ने असम के दुर्लभ हरगिला पक्षी का विशेष जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह पक्षी कभी लोगों के बीच डर और अंधविश्वास का कारण हुआ करता था, लेकिन आज यह न केवल असम के कई गांवों की शान बन चुका है, बल्कि इसने पर्यावरण संतुलन में भी अपनी एक अलग पहचान कायम की है।
क्या है हरगिला पक्षी का इतिहास और अर्थ
हरगिला यानी ग्रेटर एडजुटेंट स्टॉर्क, दुनिया की सबसे दुर्लभ सारस प्रजातियों में से एक है। प्रधानमंत्री ने इस पक्षी के नाम के पीछे के रोचक अर्थ को भी समझाया। उन्होंने बताया कि यह शब्द संस्कृत भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसमें 'हड' का अर्थ है हड्डी और 'गिला' का अर्थ है निगलना। इस प्रकार, इस पक्षी का शाब्दिक अर्थ होता है 'हड्डी निगलने वाला'। यह पक्षी मुख्य रूप से भारत के असम और कंबोडिया के कुछ हिस्सों में पाया जाता है। विशेष बात यह है कि इस पक्षी की वैश्विक आबादी का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा अकेले असम राज्य में ही निवास करता है, जो इसे भारत की जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है।
अंधविश्वास से गौरव तक का सफर
पीएम मोदी ने उन दिनों को याद किया जब असम के लोग इस पक्षी को देखकर डर जाते थे और इसे अपशकुन का प्रतीक माना जाता था। उस दौरान लोग न केवल इसे भगाने का प्रयास करते थे, बल्कि जिन पेड़ों पर हरगिला अपने घोंसले बनाता था, उन्हें भी काट दिया जाता था। लोगों को लगता था कि इस पक्षी की उपस्थिति गांव के लिए किसी अनहोनी का संकेत है। हालांकि, समय के साथ वैज्ञानिक समझ और जन-जागरूकता ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब वही गांव हरगिला पक्षी को अपनी नई पहचान और गौरव के रूप में देखते हैं। उन्होंने इसे समाज की एक बड़ी सामूहिक सफलता करार दिया है।
प्रकृति का सफाईकर्मी और पारिस्थितिकी तंत्र
हरगिला पक्षी की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि यह केवल एक दुर्लभ पक्षी ही नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के लिए एक कुशल सफाईकर्मी की भूमिका भी निभाता है। यह एक मांसाहारी और मृतभक्षी यानी स्कैवेंजर जीव है। यह सड़े-गले मांस, मृत जानवरों के अवशेष और विभिन्न प्रकार के जैविक कचरे को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हरगिला के कारण वेटलैंड और जलाशयों का पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित बना रहता है। पर्यावरण की रक्षा में इसका योगदान अमूल्य है, जो जैव विविधता को बनाए रखने में सीधी भूमिका निभाता है।
पूर्णिमा देवी बर्मन का योगदान
प्रधानमंत्री मोदी ने जीव-वैज्ञानिक पूर्णिमा देवी बर्मन के प्रयासों की जमकर सराहना की। उन्होंने बताया कि कैसे एक वैज्ञानिक की प्रतिबद्धता ने समाज की सोच को बदलने का काम किया। पूर्णिमा देवी ने गांव-गांव जाकर लोगों को इस पक्षी के वैज्ञानिक महत्व के बारे में शिक्षित किया। उन्होंने विशेष रूप से गांव की महिलाओं को इस संरक्षण अभियान के साथ जोड़ा। उन्होंने लोगों को यह समझाया कि हरगिला का अस्तित्व पर्यावरण के लिए कितना आवश्यक है। उनके इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज जिन गांवों में कभी इस पक्षी को भगाया जाता था, वहां अब लोग हरगिला के घोंसलों और उसके चूजों की सुरक्षा के लिए पहरा देते हैं।
एक जनआंदोलन की सफलता
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि जब समाज किसी जीव या वनस्पति के महत्व को आत्मसात कर लेता है, तो संरक्षण का कोई भी अभियान महज सरकारी योजना न रहकर एक जनआंदोलन बन जाता है। हरगिला की यह कहानी समाज में आए सकारात्मक बदलाव का एक जीवंत प्रमाण है। अंत में प्रधानमंत्री ने पूरे देशवासियों से अपील की कि वे अपने आसपास के पर्यावरण, जीव-जंतुओं और जैव विविधता की रक्षा में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि हरगिला का संरक्षण हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर रहना ही बेहतर भविष्य की कुंजी है।
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