अयोध्या की चिंता छोड़िए और पश्चाताप कीजिए, सीएम योगी ने अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर दी बड़ी चुनौती उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 9
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अखिलेश को अयोध्या और मथुरा के मुद्दों पर घेरा और उनके विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े किए।

आगरा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आक्रामक तेवर

उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के बीच वाकयुद्ध लगातार तीखा होता जा रहा है। इसी कड़ी में आगरा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर अब तक का सबसे कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने न केवल अयोध्या के मुद्दे पर अखिलेश को नसीहत दी, बल्कि मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि के विषय पर उन्हें एक सीधी और खुली चुनौती भी दे डाली है।

अयोध्या और पश्चाताप पर अखिलेश को दी नसीहत

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि अखिलेश यादव को अयोध्या की चिंता करने के बजाय अपने अतीत के कृत्यों पर आत्मचिंतन करना चाहिए। योगी आदित्यनाथ ने कटाक्ष करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष को प्रभु श्रीराम के दर्शन के लिए जाना चाहिए, जिससे उन्हें सद्बुद्धि प्राप्त हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग पहले रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के निमंत्रण को ठुकरा चुके हैं, उन्हें अब अयोध्या की राजनीति करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, यह उन लोगों के लिए पश्चाताप का समय है जो राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों पर गोली चलवाने जैसी घटनाओं के जिम्मेदार माने जाते हैं।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा और राजनीतिक ध्रुवीकरण

सीएम योगी ने केवल अयोध्या तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के विवाद को उठाकर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। उन्होंने अखिलेश यादव को चुनौती दी कि यदि वे वास्तव में न्याय की बात करते हैं, तो उन्हें खुलकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के अभियान का समर्थन करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मंच से सपा अध्यक्ष से पूछा कि क्या उनमें इस मुद्दे पर स्पष्ट स्टैंड लेने की हिम्मत है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मथुरा के मुद्दे को इस तरह प्रमुखता से उठाकर भाजपा ने चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की दिशा तय कर दी है।

सपा के विकास मॉडल बनाम डबल इंजन सरकार

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान चले आ रहे परिवारवाद और क्षेत्रवाद की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता का विकास ही उनकी सरकार की एकमात्र प्राथमिकता है। उन्होंने सपा के 'सैफई मॉडल' पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार किसी एक विशेष परिवार या क्षेत्र के तुष्टीकरण के बजाय समान रूप से प्रदेश के हर नागरिक के उत्थान के लिए काम कर रही है। योगी ने दावा किया कि उनकी सरकार ने तुष्टीकरण की नीति को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है और अब विकास कार्यों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है।

दलित विरोधी होने का लगाया गंभीर आरोप

अखिलेश यादव द्वारा चलाए जा रहे पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक नैरेटिव पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को दलित विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि इन दोनों दलों ने सदैव भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सपनों को नष्ट करने का कार्य किया है। सीएम योगी ने आरोप लगाया कि ये दल चुनाव के समय सामाजिक न्याय का ढोंग रचते हैं, लेकिन सत्ता में रहने के दौरान दलितों और पिछड़ों के अधिकारों पर डकैती डालते हैं। उन्होंने सपा और कांग्रेस को सामाजिक न्याय के पुरोधाओं का अपमान करने वाला बताया।

2027 के चुनाव की बिसात

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह आक्रामक रुख स्पष्ट करता है कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के केंद्र में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, कानून व्यवस्था और विकास रहेगा। भाजपा मथुरा और काशी जैसे सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से विपक्ष को बैकफुट पर लाने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं, दलित और ओबीसी अस्मिता की राजनीति करने वाले दलों को घेरने के लिए भाजपा लगातार उनके पुराने रिकॉर्ड को जनता के सामने रख रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी नेतृत्व सीएम योगी द्वारा दी गई इस खुली चुनौती पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। क्या वे मथुरा के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करेंगे या इस प्रश्न से किनारा कर लेंगे, यह आने वाले कुछ ही दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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