जीवनशैली
5 घंटे पहले
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विचारों
रिमझिम बारिश की बूंदें गिरते ही भारतीय घरों में सबसे पहले रसोई से पकौड़ों की सोंधी खुशबू आने लगती है। चाय की गर्म प्याली के साथ कुरकुरे पकौड़े खाने का आनंद ही कुछ अलग होता है। अमूमन जब भी पकौड़ों की बात होती है, तो हमारे दिमाग में आलू, प्याज, पनीर, पालक, गोभी या फिर हरी मिर्च के पकौड़ों की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या आपने कभी बांस से बने बेहद स्वादिष्ट और कुरकुरे पकौड़ों का स्वाद चखा है? देश के पूर्वी राज्य झारखंड के जंगलों में एक ऐसा अनूठा खजाना छिपा है, जिसका स्वाद लेने के लिए लोग सालभर इंतजार करते हैं। यह अनोखा व्यंजन है बांस करील का पकौड़ा, जो न सिर्फ खाने में लाजवाब है, बल्कि इसका अपना एक बेहद खास पारंपरिक महत्व भी है।
झारखंड के वनों का यह अनूठा उपहार
झारखंड के घने जंगल और ग्रामीण इलाके अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपने अनूठे और पारंपरिक खान-पान के लिए भी दुनिया भर में मशहूर हैं। यहां के स्थानीय लोग सदियों से जंगलों से मिलने वाली प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और वनस्पतियों को अपने दैनिक आहार का हिस्सा बनाते आ रहे हैं। इन्हीं प्राकृतिक उपहारों में से एक है बांस का कोपला, जिसे स्थानीय बोलचाल में अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। देवघर और इसके आसपास के क्षेत्रों में इसे मुख्य रूप से बांस करील के नाम से जाना जाता है।
यह बांस करील कोई ऐसी चीज नहीं है जो आपको साल के बारहो महीने बाजार में आसानी से मिल जाए। प्रकृति का यह अनूठा उपहार केवल वर्षा ऋतु के दौरान ही धरती से बाहर आता है। विशेष रूप से अगस्त और सितंबर के इन दो महीनों में ही जंगलों में बांस के नए कोपले फूटते हैं। इसी वजह से स्थानीय बाजारों में इस दौरान बांस करील की मांग काफी ज्यादा बढ़ जाती है। ग्रामीण इलाकों के लोग सुबह-सवेरे जंगलों में जाकर इन कोपलों को इकट्ठा करते हैं और फिर इन्हें स्थानीय बाजारों में बेचने के लिए लाते हैं।
स्वाद में अनोखा और सेहत के लिहाज से खास
बांस की करील का स्वाद सामान्य सब्जियों या पकौड़ों से बिल्कुल अलग होता है। इसमें एक प्राकृतिक और हल्का खट्टापन होता है, जो मसालों के साथ मिलकर एक अद्भुत स्वाद पैदा करता है। झारखंड के देवघर जिले के लोग इस मौसमी सब्जी का बेसब्री से इंतजार करते हैं। उनका मानना है कि इस मौसम में मिलने वाली यह करील न केवल स्वाद में बेहतरीन होती है, बल्कि पारंपरिक रूप से इसे स्वास्थ्य के लिए भी काफी अच्छा माना जाता है। जब इसके गरमा-गरम पकौड़े बनकर तैयार होते हैं, तो उनका तीखा और खट्टा स्वाद किसी को भी अपना दीवाना बना सकता है।
बांस करील का पकौड़ा बनाने के लिए आवश्यक सामग्रियां
इस लाजवाब और पारंपरिक पकौड़े को बनाने के लिए आपको बहुत ज्यादा तामझाम या महंगे सामान की आवश्यकता नहीं होती है। घर की रसोई में आसानी से मिलने वाली सामग्रियों से ही इसे तैयार किया जा सकता है। इसके लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित चीजों की आवश्यकता होती है:
- ताजा बांस की करील (मुख्य सामग्री)
- बेसन (बाइंडिंग के लिए)
- चावल का आटा (पकौड़े को एक्स्ट्रा कुरकुरा बनाने के लिए)
- बारीक कटा हुआ प्याज़
- बारीक कटी हुई हरी मिर्च
- अदरक-लहसुन का पेस्ट
- बारीक कटी हुई हरी धनिया पत्ती
- हल्दी पाउडर और लाल मिर्च पाउडर
- अजवाइन (पाचन और स्वाद के लिए)
- नमक (स्वादानुसार)
- तलने के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद्य तेल
तैयारी की पारंपरिक विधि और जरूरी नुस्खे
बांस करील का पकौड़ा बनाने की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण इसकी तैयारी है। यदि इसे सही तरीके से साफ और तैयार न किया जाए, तो इसका असली स्वाद नहीं मिल पाता है। स्थानीय गृहणी मनोरमा देवी ने इस पारंपरिक व्यंजन को बनाने की खास विधि साझा की है। उनके अनुसार, करील को पकाने से पहले एक विशेष प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जो इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देती है।
सबसे पहले, बाजार से लाई गई एकदम ताजी और कोमल बांस की करील को अच्छी तरह से साफ कर लें। इसके बाद, इसके बाहरी सख्त हिस्से को हटाकर अंदर के बेहद मुलायम भाग को पतले-पतले और गोल टुकड़ों में काट लें।
अब शुरू होता है सबसे महत्वपूर्ण चरण। कटे हुए करील के टुकड़ों को साफ पानी में डालकर लगभग एक दिन (यानी पूरे 24 घंटे) के लिए भिगोकर छोड़ दें। मनोरमा देवी बताती हैं कि पानी में इतने समय तक भिगोकर रखने से करील के भीतर एक विशेष प्रकार का खट्टापन विकसित होता है। यही खट्टापन इस पकौड़े की असली पहचान है और इसी के कारण इसका स्वाद इतना लाजवाब बनता है। इसलिए, जल्दबाजी में सीधे बाजार से लाकर तुरंत पकौड़े बनाने की गलती न करें, बल्कि इसे एक दिन का समय अवश्य दें।
पेस्ट तैयार करने का सही तरीका
जब करील एक दिन तक पानी में अच्छी तरह भीग जाए, तो उसे पानी से बाहर निकाल लें और एक बार फिर साफ पानी से धो लें। इसके बाद, इन टुकड़ों को मिक्सी में डालकर पीस लें और एक चिकना पेस्ट तैयार कर लें। अब इस पीसे हुए पेस्ट को एक बड़े बर्तन में निकालें।
इस पेस्ट में अब स्वादानुसार नमक, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, अजवाइन, अदरक-लहसुन का पेस्ट, बेसन और चावल का आटा मिलाएं। अगर आप चाहें तो इसमें बारीक कटा हुआ प्याज, हरी मिर्च और हरी धनिया पत्ती भी डाल सकते हैं, जिससे पकौड़े का स्वाद और अधिक बढ़ जाता है। इन सभी सामग्रियों को आपस में अच्छी तरह से मिला लें ताकि एक गाढ़ा मिश्रण तैयार हो सके। ध्यान रहे कि इस मिश्रण में अलग से पानी डालने की आवश्यकता आमतौर पर नहीं होती है, क्योंकि करील के पेस्ट में पहले से ही पर्याप्त नमी होती है। मिश्रण को बहुत अधिक पतला न होने दें, अन्यथा कढ़ाई में पकौड़े डालते समय वे बिखर सकते हैं और उनका सही आकार नहीं बन पाएगा।
तलने की कला: धीमी आंच पर सेकें
एक बार जब आपका गाढ़ा पेस्ट पूरी तरह से तैयार हो जाए, तो अपने हाथों की मदद से इसे छोटे-छोटे गोल या मनचाहे आकार के बॉल्स में बना लें। अब एक कड़ाही में तेल गरम करने के लिए गैस पर रखें। तेल को अच्छी तरह से गरम होने दें।
जब तेल अच्छी तरह गरम हो जाए, तो आंच को मध्यम कर दें। अब तैयार किए गए पेस्ट के गोलों को धीरे-धीरे और सावधानी से गरम तेल में डालें। पकौड़ों को तेज आंच पर तलने की गलती कभी न करें, क्योंकि इससे वे बाहर से तो तुरंत लाल हो जाएंगे लेकिन अंदर से कच्चे रह जाएंगे। इन्हें हमेशा मध्यम आंच पर ही धीरे-धीरे पकने दें।
जब पकौड़े एक तरफ से हल्के सुनहरे होने लगें, तो उन्हें पलट दें। इन्हें तब तक तलें जब तक कि इनका रंग चारों तरफ से खूबसूरत सुनहरा न हो जाए और बाहरी परत पूरी तरह से कुरकुरी न दिखने लगे। जब पकौड़े अच्छी तरह से सिक जाएं, तो उन्हें एक छन्नी की मदद से कड़ाही से बाहर निकालें और अतिरिक्त तेल सुखाने के लिए प्लेट में रख लें।
आलू-प्याज के पकौड़ों को भूल जाएंगे आप
आपके गरमा-गरम, खट्टे-तीखे और बेहद कुरकुरे बांस करील के पकौड़े परोसने के लिए बिल्कुल तैयार हैं। इन्हें आप हरी चटनी, पुदीने की चटनी या फिर टमाटर के सॉस के साथ गरमा-गरम परोस सकते हैं। जो भी व्यक्ति एक बार इस पकौड़े का स्वाद चख लेता है, वह इसके अनोखे देसी स्वाद का कायल हो जाता है। इसके सामने पारंपरिक आलू और प्याज के पकौड़े भी फीके लगने लगते हैं। झारखंड के देवघर सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के इन दो महीनों में हर घर में इस पकौड़े की खुशबू महकती है। अगर आपको भी इस मौसम में झारखंड जाने का मौका मिले या स्थानीय बाजार में बांस करील दिखाई दे, तो इस पारंपरिक और स्वादिष्ट पकौड़े को घर पर बनाना बिल्कुल न भूलें।
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