केरल: मार थोमा चर्च के पादरी की अजीब मांग, बोले- चर्च में शादी से पहले अनिवार्य हो HIV टेस्ट भारत एक घंटा पहले 7
केरल के तिरुवनंतपुरम में मार थोमा चर्च के एक पादरी के सुझाव ने नया विवाद पैदा कर दिया है, जिसमें उन्होंने चर्च में होने वाले विवाह के लिए HIV जांच को जरूरी करने की बात कही है।

शादी के लिए HIV टेस्ट का प्रस्ताव

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से एक बेहद विवादित बयान सामने आया है जिसने धार्मिक और सामाजिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। मार थोमा चर्च से जुड़े पादरी और ट्रस्टी रेव. डॉ. के. थॉमस ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अजीबोगरीब मांग रखी है। उन्होंने सुझाव दिया है कि चर्च में विवाह के बंधन में बंधने वाले सभी युवक-युवतियों के लिए यह अनिवार्य कर देना चाहिए कि वे पहले अपनी HIV जांच करवाएं। इस बयान के सार्वजनिक होते ही चर्च के भीतर ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं और सोशल मीडिया पर लोग इसे लेकर खासी नाराजगी जता रहे हैं।

स्कूल के कार्यक्रम में कही बात

यह पूरा मामला 30 अगस्त को तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक स्कूल कार्यक्रम के दौरान सामने आया। चर्च की ओर से आयोजित इस फैमिली गैदरिंग में पादरी के. थॉमस माता-पिता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कर्नाटक सरकार की एक कथित पहल का जिक्र करते हुए कहा कि जब शैक्षणिक परिसरों में ऐसी जांच हो सकती है, तो चर्च में होने वाली शादियों में भी यह नियम लागू होना चाहिए। उन्होंने वहां मौजूद अभिभावकों से मुखातिब होते हुए कहा, मैं चाहता हूं कि मार थोमा चर्च में होने वाली सभी शादियां ऐसे टेस्ट के बाद ही हों। पैरेंट्स, मेरी बात का बुरा मत मानिए।

बेटियों की सुरक्षा पर की टिप्पणी

पादरी ने केवल HIV जांच तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि उन्होंने अभिभावकों को अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर भी सचेत किया। उन्होंने कहा कि जब माता-पिता अपनी 27 साल की बेटी को दुल्हन के रूप में चर्च लेकर आते हैं, तो यह सुनिश्चित करना उनका कर्तव्य है कि बेटी के साथ अतीत में कोई गलत हरकत या शोषण न हुआ हो। पादरी के अनुसार, इस सभा का मूल उद्देश्य माता-पिता को उनके बच्चों के जीवन में हस्तक्षेप करने और जागरूक रहने के प्रति सक्षम बनाना था।

समुदाय में नाराजगी का दौर

इस बयान के बाद से ही पादरी के. थॉमस की चौतरफा आलोचना हो रही है। आलोचकों का तर्क है कि शादी जैसे पवित्र रिश्ते को HIV जांच जैसे मेडिकल टेस्ट से जोड़ना न केवल युवाओं के लिए अपमानजनक है, बल्कि यह उनकी निजता और गरिमा पर भी बड़ा हमला है। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी से समाज में गलत संदेश जाता है और यह युवाओं के प्रति अविश्वास को दर्शाता है। गौरतलब है कि केरल में चर्च से जुड़ी ऐसी विवादास्पद टिप्पणियां समय-समय पर चर्चा का विषय बनती रही हैं, इससे पहले भी ईसाइयों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्च ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं, जिनमें महिलाओं के शोषण और सुरक्षा के दावे भी शामिल रहे हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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