रसगुल्ले जैसा दिखने वाला यह अनोखा मुरब्बा ₹400 किलो, बारिश में बनता है और सालभर खाया जाता है जीवनशैली 2 घंटे पहले 4
छतरपुर के जीतेंद्र बाजपेयी सालों से बांस का खास मुरब्बा बना रहे हैं, जो 400 रुपए किलो बिकता है और हड्डियां मजबूत करने समेत कई फायदे देता है।

आंवले का मुरब्बा तो आपने कई बार खाया होगा, लेकिन छतरपुर जिले के रहने वाले जीतेंद्र बाजपेयी एक बिल्कुल अलग तरह का मुरब्बा बनाते हैं, जो देखने में रसगुल्ले जैसा लगता है। यह मुरब्बा बांस से तैयार किया जाता है और इसका स्वाद बेहद लाजवाब होता है। जीतेंद्र सालों से लोगों को यह खास मुरब्बा बनाकर खिला रहे हैं और इसे बाजार में 400 रुपए किलो की दर से बेचते हैं।

कैसे तैयार होता है बांस का मुरब्बा

जीतेंद्र बताते हैं कि बांस का मुरब्बा बनाने के लिए सबसे पहले बांस के पेड़ से ताजा माल निकाला जाता है। यह ताजा माल उसी समय निकाला जाता है जब बांस में पीका होता है, इसी को ताजा माल कहा जाता है। ताजे बांस को काटने के बाद उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है। इसके बाद इन टुकड़ों को प्राकृतिक रूप से चीनी यानी शक्कर में गलाया जाता है। चीनी में अच्छी तरह गलने के बाद बांस का मुरब्बा बनकर तैयार हो जाता है। इसे बनाने में न तो ज्यादा समय लगता है और न ही ज्यादा मेहनत।

सेहत के लिए फायदेमंद

जीतेंद्र के अनुसार जो भी व्यक्ति बांस का मुरब्बा खाता है, उसकी हड्डियां मजबूत हो जाती हैं। साथ ही यह बल वृद्धि में भी सहायक होता है। इसके अलावा यह लंबाई बढ़ाने में भी मदद करता है, इसलिए इसके फायदे सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं।

जून के आखिरी हफ्ते से शुरू होता है सीजन

जीतेंद्र बताते हैं कि बांस का मुरब्बा बनाने का सबसे अच्छा समय जून के आखिरी सप्ताह से शुरू हो जाता है, क्योंकि इस दौरान मानसून की बारिश हो जाती है। इसी बारिश से बांस पीका फोड़ता है और यही ताजा बांस वे किसान भाइयों से खरीदते हैं। इसके बाद जुलाई से बांस के मुरब्बे का उत्पादन शुरू कर दिया जाता है। हालांकि इसका रेट थोड़ा महंगा होता है और 1 किलोग्राम बांस का मुरब्बा 400 रुपए किलो बिकता है, फिर भी लोग इसे काफी पसंद करते हैं।

बांस के अलावा कई और उत्पाद

जीतेंद्र सिर्फ बांस का मुरब्बा ही नहीं बनाते, बल्कि आंवला कैंडी, बाजरे और रागी का पोहा, कई तरह के अचार, गेहूं का दलिया, महुआ लड्डू और शिलाजीत पेड़ा जैसे अनेक फूड प्रोडक्ट भी तैयार करते हैं। उनका यह कारोबार अब काफी आगे बढ़ चुका है और वे ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों तरीकों से अपने उत्पाद बेच रहे हैं।

महुआ से बनी मिठाइयां

जीतेंद्र वाजपेई ने महुआ फूल से भी कई फूड आइटम तैयार किए हैं, जिनकी मांग सिर्फ छतरपुर जिले में ही नहीं बल्कि देशभर में है। वे महुआ फूल से तरह-तरह की मीठी मिठाइयां बनाते हैं और इससे बर्फी तथा लड्डू भी तैयार करते हैं।

बिजावर और पन्ना में दुकान

जीतेंद्र बताते हैं कि बुंदेली अनुभूति स्व सहायता समूह के नाम से उनकी दुकान फिलहाल बिजावर और पन्ना में खुली है। बिजावर में उत्पादन भी किया जाता है, जबकि पन्ना में आउटलेट है। इसके साथ ही उनकी एक ऑफिशियल वेबसाइट भी है, जहां से ऑनलाइन ऑर्डर लिए जाते हैं और ग्राहक तमाम बुंदेली व्यंजनों की जानकारी लेकर उन्हें मंगवा भी सकते हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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