उपनाम: समाज सेवा
छत्तीसगढ़ में अनोखी पहल: इस कलेक्टर ने अपनी वेतन से आदिवासी समुदाय के लिए दान की बड़ी राशि
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के एक जिलाधिकारी ने समाज के उत्थान के लिए अपनी निजी आय से योगदान देने का सराहनीय संकल्प लिया है।
झारखंड की मदर टेरेसा: सिस्टर निर्मला जोशी का जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित
रांची की सिस्टर निर्मला जोशी को राज्य की मदर टेरेसा के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन निस्वार्थ भाव से समाज सेवा और जरूरतमंदों के उत्थान में लगा दिया। मिशनरीज ऑफ चैरिटीज की प्रमुख रहीं निर्मला जोशी के जीवन सफर और उनके योगदानों पर एक वि...
पाली: होटल में जूठे बर्तन धोने को मजबूर लाचार लाभूराम की बदली किस्मत, दिव्यांग सेवा संस्थान ने अपनाया
पाली के हाईवे पर बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहे मंदबुद्धि लाभूराम देवासी को एक समाजसेवी संस्था ने नया जीवन दिया है। अब उन्हें न केवल रहने का ठिकाना मिला है, बल्कि उन्हें परिवार जैसा अपनापन भी मिल रहा है।
बुरहानपुर: घर के खर्च से बचत कर शुरू की गौसेवा, आज 200 लोगों के सहयोग से 80 गौवंश को मिल रहा नया जीवन
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक अनोखी पहल देखने को मिल रही है, जहाँ कुछ लोग अपने घरेलू खर्चों में से पैसे बचाकर गौशाला चला रहे हैं। आज इस अभियान से 200 से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं और 80 गौवंश की सेवा कर रहे हैं।
सीतामढ़ी के डॉ. राजीव ने पेश की मानवता की मिसाल, 61वीं बार रक्तदान कर बचाई कई जिंदगियां
बिहार के सीतामढ़ी में डॉ. राजीव कुमार काजू ने अब तक 61 बार रक्तदान कर समाज के सामने एक अनूठी प्रेरणा रखी है। उन्होंने लोगों से नियमित रक्तदान करने की अपील की है ताकि रक्त की कमी से किसी की जान न जाए।
अंक ज्योतिष: इस मूलांक के लोग होते हैं असली दानवीर, सेवा-भाव को मानते हैं अपना सच्चा धर्म!
अंक ज्योतिष के अनुसार 9 मूलांक वाले लोग बेहद उदार और दयालु स्वभाव के होते हैं। दूसरों की मदद और समाज सेवा को ये अपने जीवन का असली मकसद मानते हैं।
शादी देखने गए तो पहला सवाल था- ‘रक्तदान करती हैं?’, अंबाला के राजेंद्र गर्ग ने 221 बार किया रक्तदान
विश्व रक्तदाता दिवस पर अंबाला के 72 वर्षीय राजेंद्र गर्ग की कहानी सामने आई है, जिन्होंने अब तक 221 बार रक्तदान किया और पूरे परिवार को इस मुहिम से जोड़ा। परिवार ने मिलकर अब तक 379 यूनिट रक्तदान किया है।
हादसे ने बदली राह: मंदिर में दो बच्चों से शुरू हुआ सफर, आज हजारों का सहारा बनीं सुशीला बोहरा
पति की दृष्टि और फिर उनके निधन के बाद टूटने के बजाय समाजसेवा का रास्ता चुनने वाली सुशीला बोहरा ने 1977 में दो नेत्रहीन बच्चों के साथ संस्थान की नींव रखी थी, जो आज सैकड़ों बच्चों का सहारा है।
न नक्शा, न मशीन... मिनटों में बता देते हैं पानी का पता, 15 साल से बिना शुल्क लिए दे रहे सटीक जानकारी
छतरपुर के श्याम गिरि महाराज पिछले 15 सालों से बिना कोई शुल्क लिए लोगों को जमीन के नीचे पानी की सटीक जानकारी देते आ रहे हैं। जल और नारियल की मदद से वह बता देते हैं कि कहां, कितनी गहराई पर और कितने इंच पानी निकलेगा।