झारखंड
2 घंटे पहले
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विचारों
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए आज होने वाले मतदान ने प्रदेश की सियासत का पारा चढ़ा दिया है। इन दो सीटों के लिए कुल तीन उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में उतरे हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय और दिलचस्प बन गया है। सत्तारूढ़ महागठबंधन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बैद्यनाथ राम को प्रत्याशी बनाया है, वहीं कांग्रेस ने प्रणव झा को टिकट दिया है। दूसरी तरफ एनडीए ने निर्दलीय उम्मीदवार और उद्योगपति परिमल नाथवानी को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस तिकोने संघर्ष में बाजी किसके हाथ लगती है।
जीत के लिए चाहिए कितने वोट
झारखंड विधानसभा की मौजूदा स्थिति के हिसाब से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को करीब 27 से 28 प्रथम वरीयता मतों की दरकार है। ऐसे में पूरा चुनावी समीकरण विधायकों की गिनती और उनके समर्थन पर आकर टिक गया है। यही कारण है कि मतदान से ठीक पहले हर दल अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखने की कवायद में जुटा है। क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच राजनीतिक हलचल लगातार तेज होती जा रही है।
किस दल के पास है सबसे मजबूत संख्या बल
विधानसभा के ताजा आंकड़ों पर गौर करें तो झामुमो सबसे मजबूत स्थिति में नजर आती है, क्योंकि पार्टी के पास 34 विधायक हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए जरूरी मत देने के बाद भी झामुमो के पास 6 वोट अतिरिक्त बचते हैं। इसके अलावा महागठबंधन में कांग्रेस के 16 विधायक, राजद के 4 विधायक और भाकपा माले के 2 विधायक शामिल हैं।
अगर झामुमो अपने बचे हुए 6 वोट कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में स्थानांतरित कर दे और राजद तथा माले भी साथ दें, तो कांग्रेस का आंकड़ा 28 वोट तक पहुंच जाता है, जो जीत के लिहाज से पर्याप्त साबित हो सकता है।
बैद्यनाथ राम की जीत मानी जा रही पक्की
झामुमो प्रत्याशी बैद्यनाथ राम को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगभग आम सहमति है कि उनका रास्ता साफ है। पार्टी के पास अपने बूते इतना संख्या बल मौजूद है कि वह बिना किसी कठिनाई के अपने उम्मीदवार को राज्यसभा भेज सकती है। इसी वजह से पहली सीट पर किसी बड़े उलटफेर की गुंजाइश नहीं दिखती और अब समूचा सियासी ध्यान दूसरी सीट पर केंद्रित हो गया है।
कांग्रेस प्रत्याशी के सामने बड़ी चुनौती
महागठबंधन ने दूसरी सीट कांग्रेस के हिस्से में दी है और प्रणव झा को मैदान में उतारा है। हालांकि उनकी राह पूरी तरह आसान नहीं मानी जा रही। जीत के लिए उन्हें सहयोगी दलों के सभी वोटों को एकजुट रखना अनिवार्य होगा। अगर गठबंधन में कहीं भी मतों का बिखराव हुआ या क्रॉस वोटिंग की नौबत आई, तो कांग्रेस प्रत्याशी की हार तय मानी जाएगी।
एनडीए की उम्मीदें क्रॉस वोटिंग पर टिकीं
एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के पास इस समय एनडीए के 24 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है, लेकिन यह संख्या जीत के लिए नाकाफी है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक नाथवानी को जीत दर्ज करने के लिए कम से कम 3 से 4 अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। यही वजह है कि मतदान से पहले क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं और हर दल अपने विधायकों पर पैनी नजर बनाए हुए है।
दूसरी सीट पर टिकी सबकी निगाहें
संख्या बल के आधार पर पहली सीट झामुमो के खाते में जाती दिख रही है, मगर दूसरी सीट का नतीजा अब भी पूरी तरह अनिश्चित बना हुआ है। यदि महागठबंधन अपने तमाम वोट सुरक्षित रखने में कामयाब रहता है तो कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की जीत मुमकिन है। वहीं अगर एनडीए अतिरिक्त वोट जुटा लेता है तो परिमल नाथवानी पूरे चुनावी गणित को पलट सकते हैं।
ऐसे में आज का यह चुनाव महज दो सीटों का मुकाबला भर नहीं है, बल्कि इसे झारखंड की राजनीतिक एकजुटता, रणनीति और विधायकों की निष्ठा की कड़ी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। अब हर किसी की नजर मतदान और उससे निकलने वाले नतीजों पर लगी हुई है।
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