उत्तर प्रदेश
एक दिन पहले
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Ram Mandir में दान और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
अयोध्या में राम मंदिर के दानपात्रों और आभूषणों की कथित चोरी ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में जांच कर रही SIT अब हर पहलू को खंगाल रही है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने अपने अयोध्या दौरे के दौरान स्पष्ट किया है कि आस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और अगले 15 दिनों के भीतर सच्चाई सामने आ जाएगी।
जांच का दायरा और संदिग्ध भूमिकाएं
SIT के सामने सबसे बड़ी चुनौती साक्ष्य जुटाना है क्योंकि मंदिर के काउंटिंग सेंटर में लगे CCTV फुटेज केवल 45 दिन तक ही सुरक्षित रह पाते हैं। अब तक की जांच में कई नाम सामने आए हैं जिन पर पुलिस की नजर है। इन व्यक्तियों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
- Anil Mishra (ट्रस्ट सदस्य)
- Gopal Rao (निर्माण सहायक)
- Tinnu Yadav, KD Tiwari, Subhash Srivastava, Rajesh Pathak
- Manish Yadav, Karun, Ritik, Anukalp Mishra, Luvkush Mishra और Somesh
खासकर Anil Mishra की भूमिका सवालों के घेरे में है क्योंकि वित्तीय प्रबंधन और बैंक में रकम जमा कराने की जिम्मेदारी उन्हीं के पास थी।
दान की गिनती में बरती गई लापरवाही
मंदिर परिसर में 40 दानपात्र हैं जिनसे एकत्रित राशि को यात्री सुविधा केंद्र के बेसमेंट में स्थित काउंटिंग सेंटर ले जाया जाता है। यहां दो शिफ्टों में 22-22 लोग काम करते हैं। जांच में पता चला है कि:
- काउंटिंग रूम में प्रवेश से पहले तलाशी के अनिवार्य नियमों की अनदेखी की गई।
- कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले कपड़े पहनने का नियम था, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ।
- अक्सर गिनती के दौरान CCTV कैमरे बंद कर दिए जाते थे।
- फुटेज में कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियां छिपाते हुए नजर आए हैं।
कीमती भेंट और आभूषणों का हिसाब-किताब
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि बैंक ले जाते समय नोटों के पैकेटों से गड्डियां निकाल ली जाती थीं। इसके अलावा, बहुमूल्य आभूषणों को लेकर भी बड़ा विवाद है। जौनपुर के रहने वाले Ajay Vishwakarma द्वारा अर्पित किए गए रत्नजड़ित हार और चांदी की चरण पादुकाओं का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। गर्भगृह प्रभारी KD Tiwari से भी इस संदर्भ में पूछताछ की जा रही है।
राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम
मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। वहीं, मंदिर निर्माण से जुड़े रहे पूर्व इंजीनियर Dinanath Verma ने पहले भी भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनका कहना है कि समय पर शिकायत करने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया। फिलहाल 800 पुलिसकर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुए इस घोटाले की अंतिम रिपोर्ट का सभी को इंतजार है।
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